संवेदनशील मामलों सहित अब पुलिस महकमें की कई सेवाएं निजी हाथों में देने की तैयारी

पुलिस आधुनिकीकरण के बहाने केंद्र सरकार ने 50 से अधिक ऐसी सेवाओं की पहचान की है, जिन्हें निजी हाथों में सौंपा जाना है। इससे पुलिस विभाग में कई हजार पद खत्म हो जाएंगे।

इंदौर. केंद्र सरकार के एक प्रस्ताव पर अमल हुआ तो जल्द ही पुलिस विभाग की कई सेवाएं निजी हाथों में नजर आएंगी। पुलिस आधुनिकीकरण के लिए केंद्र ने 50 से अधिक ऐसी सेवाओं की पहचान की है, जिन्हें निजी हाथों में सौंपा जाना है। इसमें पासपोर्ट कैरेक्टर वेरिफिकेशन, नेताओं की एस्कॉर्ट ड्यूटी, पुलिस परीक्षा बंदोबस्त, समन डिलीवरी, रिकॉर्ड कीपिंग, पुलिस आउटडोर ट्रेनिंग जैसे संवेदनशील बिंदु भी हैं। प्रस्ताव पर राज्य सरकार को इसी महीने रिपोर्ट भेजना है। प्रस्ताव पर अमल हुआ तो पुलिस विभाग में 10 हजार से ज्यादा पद खत्म हो जाएंगे। 

एक और विवादास्पद प्रस्ताव नेताओं के लिए लगने वाली एस्कॉर्ट ड्यूटी को भी निजी हाथों मे देने का है। जानकारों के मुताबिक ऐसा करना वीआईपी की सुरक्षा से समझौता करना होगा। पुलिस के डाटा एनालिसिस और रिकॉर्ड मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक जैसे कामों में भी अफसर दुरुपयोग की आशंका जता रहे हैं। हालांकि हाउसकीपिंग, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, कॉल सेंटर मैनेजमेंट, पुलिस वाहन मेंटेनेंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे काम निजी कंपनियों को देने में किसी को आपत्ति नहीं है। 

परंपरागत कारीगरों के अवसर खत्म : विभाग में ट्रेड्समैन के पद यानी बढ़ई, लोहार, कुक, वाटरमैन जैसी सेवाओं पर ग्रामीण क्षेत्रों के परंपरागत कारीगरों को भी मौका मिलता रहा है। एक बार निजीकरण होने पर ऐसे हजारों ट्रेड्समैन के लिए सरकारी नौकरी के अवसर खत्म हो जाएंगे। निजीकरण की सूची में पुलिस बैंड भी है। इसकी भी अलग पहचान रही है। बैंड ने कई परंपरागत धुनों को सहेजकर रखा है। निजी समारोहों में सेवाओं के जरिए पुलिस वेलफेयर के लिए राशि एकत्रित होती रही है। इंदौर स्थित बटालियन का बैंड तो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका हैं।

विदेशों में ये कॉन्सेप्ट है, लेकिन यहां सावधानी बरतना होगी :  विदेशों में पुलिस से जुड़े कई काम आउटसोर्स करने का कॉन्सेप्ट रहा है। कुछ सेवाओं को आउटसोर्स करने से पुलिस पर अनावश्यक बोझ कम होगा, लेकिन बहुत सावधानी रखना होगी, क्योंकि हमारे देश में निजीकरण का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। निजीकरण की सूची में कुछ संवेदनशील सेवाएं भी हैं, इनके निजीकरण से पुलिस की गुणवत्ता और गोपनीयता से समझौता हो सकता है। – एसके राउत, रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक

राज्यों को भेजी चिट्‌ठी : केंद्र ने मदद के लिए जो शर्तें रखी हैं, उसमें कोर पुलिसिंग से जुड़े कामों को छोड़कर कई सेवाओं को आउटसोर्स करने के लिए कहा है। इस बारे में केंद्र के अंडर सेक्रेटरी मनोहर सुकोते ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को चिट्‌ठी भेजी है। रिटायर्ड पुलिस अफसरों के मुताबिक, पासपोर्ट वेरिफिकेशन की व्यवस्था निजी हाथ में सौंपना गोपनीयता व सुरक्षा से समझौता करने जैसा होगा। समन भेजने की व्यवस्था भी आउटसोर्स करने पर विवाद है।

दैनिक भास्कर से साभार

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: