ब्रिटेन में रेल कर्मचारियों की 30 सालों की सबसे बड़ी व व्यापक हड़ताल

तीन दशक में ये पहला मौका है, जब ब्रिटेन में रेल हड़ताल हुई है। इस सप्ताह मंगलवार के बाद गुरुवार को 40,000 रेल कर्मी हड़ताल पर रहे।रेल व मेट्रो बंदी से आवागमन ठहर गया। अब शनिवार को हड़ताल होगी।

ब्रिटेन 30 सालों की सबसे बड़ी रेल हड़ताल का सामना कर रहा है। गुरुवार को रेलवे कर्मचारियों ने इस सप्ताह दूसरी बार रेल हड़ताल किया। इससे पूर्व कर्मचारी बीते मंगलवार को हड़ताल पर रहे। ब्रिटेन की सबसे बड़ी रेलवे हड़ताल के हिस्से के रूप में शनिवार को तीसरी हड़ताल की योजना है।

लंदन के मेट्रो कर्मचारी भी 24 घंटे हड़ताल पर रहे, इस वजह से राजधानी का मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप गया है। रेल व मेट्रो बंद रहने के कारण ब्रिटेन का आवागमन ठहर गया।

वेतन बढ़ोतरी और नौकरी की सुरक्षा को लेकर कर्मचारी संगठनों और रेल कंपनियों के बीच सोमवार को आखिरी पलों की बातचीत भी नाकाम रहने से ब्रिटेन में तीन दशक के अंदर ये पहला मौका है, जब सबसे बड़ी रेल हड़ताल हो रही है।

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को तीन दिनों के लिए रेलवे से जुड़े करीब 40,000 सफाईकर्मी, सिग्नल, रखरखाव कर्मचारी और स्टेशन कर्मचारी देशव्यापी हड़ताल कर रहे हैं।

शिक्षकों सहित अन्य कर्मियों ने भी दी हड़ताल की चेतावनी

ब्रिटेन में रेल हड़ताल शुरू होने के बाद अब शिक्षक, चिकित्सा कर्मी, सफाई कर्मी और कई उद्योगों के मज़दूरों-कर्मचारियों ने भी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। देश में खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई से परेशान ये सभी कर्मचारी अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं।

गुरुवार को हड़ताल रही सफल

वेतन बढ़ाने, बेहतर सेवा शर्तों और नौकरी की गारंटी आदि अपनी मांग के समर्थन में रेल कर्मचारियों ने गुरुवार 23 जून को को हड़ताल की। 24 घंटे की हड़ताल ने देश भर में लगभग समस्त यात्री सेवाओं को रद्द कर दिया। रलवे स्टेशन काफी हद तक वीरान रहे। राजमार्ग भी अपेक्षा से कम व्यस्त थे, और कई लोग यात्रा से बचने की सलाह पर ध्यान देते दिखाई दिए।

इंटरनेट प्रदाता वर्जिन मीडिया ओ2 ने कहा कि उसके डेटा ने सुझाव दिया कि सामान्य से “लाखों अधिक लोग” घर से काम कर रहे थे।

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मंगलवार को भी रही हड़ताल

ब्रिटेन की न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की जारी रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 हजार से ज्यादा रेल कर्मी मंगलवार 21 जून की सुबह ही रेलवे स्टेशन के पास जमा हो गए थे, जिसके बाद कई ट्रेनें स्थगित हो गईं और अधिकांश रेलवे स्टेशन सुनसान हो गए।

सेंट्रल लंदन में मंगलवार की सुबह स्टेशनों पर ट्रेनों की कतारें लगी देखी गईं लेकिन उन्हें चलाने वाले ड्राइवर और दूसरे स्टाफ नहीं थे। कर्मचारी सुबह से ही पिकेट लाइनों पर जमा हो गए, जिससे नेटवर्क ठप हो गया। हड़ताल से देश भर में अधिकांश रेल नेटवर्क बंद हो गई। देश के अधिकांश शहरों में ट्रेनों के संचालन रहे।

हड़ताल के कारण रोजाना चलने वाली लगभग 20 हजार ट्रेनों में से सिर्फ 4500 ही चालू हो पाईं। लेकिन नेटवर्क रेल सिग्नलर्स के बाहर जाने की वजह से ट्रेनों की आवाजाही में दिक्कत रही। ब्रिटेन के ज्यादातर इलाकों में पूरे दिन कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं चली। इस वजह से स्कॉटलैंड, वेल्स, कॉर्नवाल, लिंकन और वॉर्सेस्टर जैसे इलाकों में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।

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मेट्रो कर्मचारी भी हड़ताल पर

रेलवे के साथ-साथ लंदन, लिवरपूल, ग्लासगो जैसे शहरों की अंडरग्राउंड मेट्रो का संचालन भी इससे प्रभावित हुआ है। लंदन के मेट्रो कर्मचारी भी 24 घंटे हड़ताल पर रहे, इस वजह से राजधानी का मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप गया है।

मेट्रो कर्मचारी भी पेंशन और नौकरी छूटने के एक अलग विवाद में हड़ताल पर चले गए हैं। जिससे यात्रियों को परिवहन के वैकल्पिक तरीके अपनाने पड़े हैं।

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जबतक समाधान नहीं, तबतक आंदोलन

हड़ताल से पूर्व रेल, समुद्री और परिवहन (आरएमटी) मामलों के महासचिव मिक लिंच ने कहा था कि इस तरह के आक्रामक एजेंडे का सामना करना आरएमटी के पास औद्योगिक रूप से हमारे सदस्यों की रक्षा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारी आखिरी मिनट की वार्ता विफल हो गई थी, जिसका मतलब है कि इस हफ्ते व्यापक रूप से हड़ताल आगे बढ़ेगी। उन्होंने मीडिया को बताया कि हमारा अभियान तब तक चलेगा जब तक इसे चलाने की जरूरत है।

रेल कर्मचारियों ने वेतन में समुचित वृद्धि न होने पर आगे भी हड़ताल की चेतावनी दी हुई है।

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ब्रिटेन में 1990 के दशक में रेलवे का हुआ था निजीकरण

ब्रिटेन में 1990 के दशक में रेलवे का निजीकरण हुआ था। तबसे दुर्दशा, किरायों में वृद्धि और कर्मचारी संकटग्रस्त होते गए। आज निजी 13 कंपनियां अलग-अलग लाइनों पर ट्रेनों का संचालन करती हैं। सरकार द्वारा निजी रेलवे कंपनियों को 16 बिलियन पाउंड की सब्सिडी मिली हुई है।

संचालक कंपनियों के मुताबिक कोरोना महामारी के समय हुए लॉकडाउन के बाद ट्रेनें पूरी क्षमता से चल रही हैं, लेकिन यात्री अभी भी पहले जितनी संख्या में ट्रेन सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इस कारण किराए से आमदनी और घट गई है।

ट्रेड यूनियनों का दावा है कि देश में बढ़ी महंगाई के कारण रेल कर्मचारियों के लिए पुराने वेतन पर जीना संभव नहीं रह गया है। यूनियनों ने कहा है कि महामारी के दौरान कर्मचारियों ने जान पर खेल कर रेल सेवाओं को जारी रखा था। अब उनके उस योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए।

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ब्रिटेन में गंभीर आर्थिक संकट

ब्रिटेन दशकों के सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने मुद्रास्फीति को 10% की ओर धकेल दिया है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने शुरू में कोविड-19 महामारी से जोरदार वापसी की, लेकिन लगातार मंदी की ओर जा रही है।

रेल, समुद्री और परिवहन कर्मचारी संघ का कहना है कि रेल कंपनियों ने मुद्रास्फीति की प्रासंगिक दरों से बहुत कम वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों से रेल कंपनियों ने वेतन बढ़ोतरी पर रोक भी लगाई हुई थी।

यूनियनों का कहना है कि रेल हड़ताल शिक्षकों, चिकित्सकों, कचरा निपटान कर्मियों और यहां तक ​​कि बैरिस्टरों के साथ इं​डस्ट्रियल एक्शन की दिशा में बढ़ सकती है।

1970 के दशक जैसे हालात

मौजूदा औद्योगिक कार्यवाही की तुलना 1970 के दशक से की जा रही है, जब ब्रिटेन को 1978-79 की “विंटर ऑफ डिसकंटेंट” सहित व्यापक श्रमिक हड़तालों का सामना करना पड़ा था।

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