अग्निपथ योजना के खिलाफ़ जींद में किसानों- युवाओं की विशाल पंचायत

मोदी सरकार की अग्निपथ योजना के खिलाफ़ आज 21 जून को हरियाणा के जींद जिले में एक विशाल पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में विभिन्न किसान यूनियनों, पूर्व सैनिक संगठनों, छात्र युवा संगठनों और हरियाणा के अलग अलग क्षेत्रों से आये खाप पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस महा पंचायत का मुख्य उद्देश्य सेना में भर्ती के लिए केन्द्र सरकार की अग्निपथ योजना के खिलाफ़ चल रहे आंदोलन को एक शान्तिपूर्ण और सुसंगठित दिशा देने का था। साथ ही पंचायत के मंच से किसान संगठनों, सेना की तैयारी में लगे युवाओं, योजना का विरोध कर रहे समाज के बुद्धिजीवी तबके और अन्य संगठनों में समन्वय बनाने का प्रयास प्रमुख रहा।

पंचायत के दौरान वक्ताओं में जहाँ युवाओं में से अनेकों ने उनके ऊपर गुज़र रही बेरोज़गारी और निराशा की कहर को बयान किया, वहीं पूर्व सैनिकों ने सेना में कार्य करने की परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख किया और उसके भीतर सैनिकों के लिए आने वाली समस्याओं पर रौशनी डाली। उन्होंने बताया कि कैसे केंद्र सरकार सैनिकों की संख्या और पेंशन काट कर सेना के बजट का बड़ा हिस्सा मशीनों और हथियार खरीदने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है, लेकिन रण के मैदान में टिके रहने के लिए हथियार से बढ़ कर हिम्मत और प्रतिबद्धता ज़रूरी है, जो सरकार की 4 साल की सैनिक भर्ती करने की नीति से ख़तम हो जाएगी।

पंचायत में बात रखते वक्ता

युवाओं ने सवाल उठाया कि भर्ती करने की इच्छा नहीं रखते हुए भी सरकार जब नौकरियों के लिए फॉर्म निकलवाती हैं तो सोची समझी साजिश के तहत युवाओं से पैसे लूटती हैं। वहीं सालों तक तैयारी करने के बाद नौकरी ना पाने से जो युवाओं के ऊपर मानसिक दबाव बनता है वो किसी ओर को दिखाई नहीं पड़ता, पर समाज पर इसका गहरा दुष्प्रभाव है।

मोदी सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए सरकार की जनता विरोधी नियत पर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से नोटबंदी, जीएसटी, लॉकडाउन, काले कृषि कानून, मज़दूर विरोधी श्रम कानून और अब अग्निवीर योजना, हर कदम पर मोदी सरकार जनता के खिलाफ़ काम करती नज़र आयी है।

अधिकतर वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिछले दिनों आंदोलन में हुई हिंसा और आगजनी की घटनाएं और युवाओं द्वारा आंदोलन में आत्महत्या करने का चलन आंदोलन के लिए नकारात्मक साबित होगा और इनके बजाये आंदोलन के लिए एक सोची समझी सामूहिक रणनीति बनाने की ज़रुरत है। किसान आंदोलन से ऊर्जा और प्रेरणा लेते हुए इस आंदोलन को भी सुचारु और दीर्घकालीन योजनाबद्ध तरीके से चलाने के प्रस्ताव बार बार उठे। इस दिशा में पंचायत से एक कमेटी का गठन किया गया और इसके तहत जिला स्तरीय कमेटियां बनाने की प्रक्रिया चालू करने की बात हुई।

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