घरेलू कामगारों की माँगों को लेकर 16 जून को दक्षिणी दिल्ली में SGU करेगा सम्मेलन

अंतर्राष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस, (16 जून) घरेलू कामगार अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। संग्रामी घरेलू कामगार यूनियन (SGU) इस दिन राजधानी में क्षेत्रीय सम्मेलन कर रहा है।

घरेलू कामगारों को लगभग हर श्रम अधिकार और रोजगार आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना से बाहर रखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस, ILO कन्वेंशन 189 (16 जून, 2011) को अपनाने का दिन, कई देशों में घरेलू कामगारों के अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हालांकि भारत भी इसका एक हस्ताक्षरकर्ता है, फिर भी इसे उपयुक्त कानून और अधिकार-आधारित नीतियां बनाकर सी-189 की पुष्टि करना बाकी है।

उड़ीसा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, मिज़ोरम और पश्चिम बंगाल से बाहर आ कर बड़े शहरों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई जैसे जगहों पर महिलाएं अपने घरों से निकल कर काम पर जा रहीं हैं और इस तरह घरेलू कामगार एक आर्थिक पेशे के तौर पर एक आकार तो ले रही है।

लेकिन एक पितृसत्तात्मक समाज में घर और उसके बाहर बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति के घरेलू कामगार महिलाओं का पराधीनता से बहार निकलना मुश्किल है।

लॉकडाउन के पश्चात कार्यालय और आवास परिसर खुल गए हैं, साथ ही घरेलू कामगारों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और उन पर अपराधीकरण जैसे मामले तेज हो गए हैं। इनमे से अधिकांश कामगार ऐतिहासिक रूप से हाशिए के समुदायों से आते हैं।

जबकि शहरों में दिखने वाली ऊंची-ऊंची इमारतों और चमकते शीशे के कार्यालय हाशिए से आए इन्ही कामगारों की मेहनत पर चमकी रही एवम टिकी हुई है। अगर हम देश के दूर-दराज गावों और इलाकों से आए मेहनतकश कामगारों के श्रम को यहां से हटा कर देखे तो शीशमहल सी चमकती ऊंची रिहायशी इमारतें और कार्यालय दूसरे दिन ही गंदगी से बजबजती नजर आएगी।

फिर भी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), सहकारी आवास समितियों या प्लेसमेंट एजेंसियों का इन घरेलू कामगारों को लेकर कोई नियमन नहीं है। 

लगातार आ रही नई-नई टेक्नॉलजी से कामगारों पर काम का दवाब और निगरानी दोनों बढ़ती जा रहीं है।

साथ ही साथ ऐतिहासिक रुप से चली आ रही असमानता की खाई बढ़ती जा रही है।

कोविड-लॉकडाउन के बाद से समग्र आर्थिक मंदी और लोगों की नौकरी जाने से इस क्षेत्र में संकट और गहरा गया है। कम होते काम के बीच घरेलू कामगारों की वेतन संबंधी भेदभाव में कमी आ गई है। ऐसे कामगार न्यूनतम मजदूरी या दिहाड़ी पर काम करने पर मजबूर हैं। साथ ही ऐसे कामों में छोटी बच्चियों को दासता के रुप में धकेला जा रहा।

मध्यम और उच्च वर्ग के घरों में घरेलू कामगारों और उनके अथक परिश्रम को आज भी केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार सहित अधिकांश राज्य सरकारों द्वारा ‘अनुसूचित कार्य’ के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। संग्रामी घरेलू कामगार यूनियन (SGU), दिल्ली-एनसीआर, कोलकात्ता और बैंगलोर में घरेलू कामगारों को, उनके काम की कानूनी मान्यता दिलाने और सम्मानजनक रोजगार के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित करता रहा है।

SGU, संग्रामी घरेलू कामगार यूनियन, 16 जून 2022 (अंतर्राष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस) को वसंत कुंज, दिल्ली में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

सम्मेलन की निम्नलिखित माँगें हैं-

🔴 न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा!

🔴 अनिवार्य साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश!

🔴 ट्रेड-यूनियन बनाने का अधिकार!

🔴 विनियमन और शिकायत निवारण के लिए श्रम न्यायाधिकरणों और त्रिपक्षीय प्रक्रियाओं की स्थापना करना!

🔴 काम से मनमानीपूर्ण बर्खास्तगी ना हो!

🔴 कोई अपराधीकरण नहीं, ना कोई भेदभाव और ना कोई यौन उत्पीड़न हो!

🔴 कामगारों के हक़ में विस्तृत कानून बनाया जाए!

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