बांगलादेश में बड़ी दुर्घटना : कंटेनर डिपो में विस्फोट; कम से कम 43 लोगों की मौत, करीब 500 घायल

हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे कई प्रकार के रसायन कंटेनरों में रखे थे, जिससे आग ने भीषण रूप ले लिया। ऐसा लग रहा था जैसे आग की बारिश हो रही है। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

बांग्लादेश के चटगांव में शनिवार की रात बड़े हादसे ने कई मज़दूरों की जान लील ली। सीताकुंडा उपजिला में एक निजी इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) में विस्फोट के कारण लगी आग में कम से कम 43 लोगों की मौत हो गई और करीब 500 घायल हो गए, जिनमें कई की स्थिति नाजुक है। मरने वालों में दस पुलिस व दमकलकर्मी भी शामिल हैं।

मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है। आसपास के अस्पताल घायलों से भर चुके हैं और लोगों से ब्लड-डोनेट करने की अपील की जा रही है। कुछ घायलों की हालत अभी भी नाज़ुक है।

आग लगने के 40 मिनट के भीतर ही एक बड़ा धमाका हुआ और विस्फोटक रसायनों की मौजूदगी के कारण आग एक कंटेनर से दूसरे कंटेनर में फैल गई। अग्निशमन सेवा के महानिदेशक ने कहा कि चूंकि आग अभी भी भड़की हुई है, जिसे पूरी तरह से बुझने में 24 घंटे और लग सकते हैं, इसलिए डिपो के पास जाना संभव नहीं है।

धमाका इतना तेज़ था कि आस-पास की कुछ इमारतों की खिड़कियां तक टूट गईं। घटनास्थल से क़रीब चार किलोमीटर दूरी तक धमाके की आवाज़ सुनाई दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसा लग रहा था जैसे आग की बारिश हो रही है।

ज्ञात हो कि सीताकुंड देश के दूसरे सबसे बड़े शहर चटगांव से केवल 40 किलोमीटर की दूरी पर है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि डिपो में रखे कुछ कंटेनर्स में केमिकल था, जिसके कारण आग भड़क गई।

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धमाके के बाद आग ने लिया भीषण रूप

खबर के मुताबिक रात करीब नौ बजे कंटेनर डिपो में आग लग गई। जैसे ही फायर सर्विस यूनिट ने इसे बुझाने का काम किया, एक धमाका हुआ और फिर आग फैल गई। शुरू में आशंका जताई जा रही थी कि कंटेनर डिपो में केमिकल के कारण आग लगी है।

पुलिस, दमकल सेवा और स्थानीय सूत्रों के अनुसार आग बीएम कंटेनर डिपो के लोडिंग प्वाइंट के अंदर रात करीब नौ बजे लगी। रात करीब 11:45 बजे, एक बड़ा धमाका हुआ और एक कंटेनर में रसायनों की मौजूदगी के कारण आग एक कंटेनर से दूसरे कंटेनर में फैल गई।

अग्निशमन सेवा के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद मैनुद्दीन ने कहा, “हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे कई प्रकार के रसायनों को डिपो में कंटेनरों में रखा गया था जिससे आग ने भीषण रूप लिया है। बीएम कंटेनर डिपो मई 2011 से काम कर रहा है।

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अबतक 43 की मौत, 450 से अधिक घायल

चटगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीएमसीएच) पुलिस चौकी के सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) अलाउद्दीन तालुकदार के अनुसार सुबह 10:15 बजे तक इस घटना में 43 लोगों की मौत हो गई है। शवों को मुर्दाघर में रख दिया गया है।

एक चश्मदीद ने फोन पर न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, “डिपो काफी हद तक खाली था, आग लगने के बाद दमकलकर्मी, पुलिसकर्मी और अन्य बचावकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और रसायनों से भरे कंटेनरों में विस्फोट होने से उनकी मौत हो गई।” 

फोटोः IANS

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रेड क्रिसेंट यूथ चटगांव में स्वास्थ्य और सेवा विभाग के प्रमुख इस्ताकुल इस्लाम ने बताया, “इस घटना में 450 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कम से कम 350 सीएमसीएच में हैं। अन्य अस्पतालों में मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है।”

विस्फोट के बाद की जो तस्वीरें सामने आयी हैं उनमें बर्बाद हो चुके कंटेनर्स साफ़ नज़र आ रहे हैं। इसके अलावा वेयरहाउस की छत पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।

चटगांव अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा के सहायक निदेशक मोहम्मद फारुक हुसैन सिकदर ने कहा कि दमकल की करीब 19 गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। मौके पर छह एंबुलेंस भी मौजूद है।

आग पर काबू पाने में मुश्किलें

रविवार की सुबह दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन इस दौरान लगातार हो रहे विस्फोट के कारण उन्हे भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इसके साथ ही समुद्र में रसायनों के बहाव को रोकने के लिए सेना को तैनात किया गया है।

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लोगों की मौत पर शोक जताया और बचाव अभियान के लिए सभी सुविधाएं जुटाने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने एक जांच समिति का गठन कर अगले तीन दिनों में रिपोर्ट देने की मांग की है।

बांगलादेश बड़ा निर्यातक देश ; लगातार घटती दुर्घटनाएं

बांग्लादेश पश्चिमी देशों का एक बड़ा निर्यातक देश है। पिछले एक दशक में यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वस्त्र निर्यातक बन गया है।

बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार एक क्षेत्रीय सरकारी अधिकारी के मुताबिक कंटेनर डिपो में लाखों डॉलर के कपड़े मौजूद थे। जिन्हें पश्चिमी खुदरा विक्रेताओं को निर्यात किया जाना था।

दौरातलब है कि मुनाफे की आंधी हवस में सस्ता श्रम, असुरक्षित परिस्थितियों में काम, नियमों की अनदेखी और लापरवाही के कारण बांग्लादेश में ऐसी दुर्घटनाएं लगातार घटित होती हैं और भारी पैमाने पर मज़दूर अकाल मौत के शिकार बनाते हैं।

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