रुद्रपुर : एलजीबी फैक्ट्री में 4 साल के लिए ग्रॉस में ₹6500 का समझौता संपन्न

अप्रैल 2021 से मार्च 2025 तक के लिए समझौता लागू हुआ है। पिछला समझौता 4 साल के लिए ₹6000 का हुआ था जो इसबार ₹6500 हुआ है। अभी अवैध बर्खास्त साथियों का संघर्ष जारी है।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। 13 महीने के संघर्ष के बाद बाइक का चेन स्पोकेट निर्माता एलजी बालाकृष्णन एंड ब्रास लिमिटेड में 4 साल के लिए ₹6500 का समझौता संपन्न हुआ है। वेतन वृद्धि ग्रास में होगी।

प्लांट के भीतर हुआ समझौता बुधवार को को सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष हस्ताक्षरित हुआ। इसके तहत पिछले 13 महीने की समझौता की राशि एरियर के रूप में मिलेगी।

एलजीबी वर्कर्स यूनियन और प्रबंधन की बीच हुए समझौते के तहत पहले साल ₹2800, दूसरे साल ₹1400, तीसरे और चौथे साल ₹900-₹900 की बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा उत्पादकता के आधार पर ₹500 मिलेंगे।

समझौते की अवधि अप्रैल 2021 से मार्च 2025 तक के लिए है। समझौते की कुल राशि में चार वर्षों में ₹1810 बेसिक में समायोजित होगी। ₹1000 नियत महंगाई भत्ता (एफडीए) के रूप में तथा शेष राशि विभिन्न भत्तों के रूप में बढ़ेगा।

समझौते के तहत प्रत्येक श्रमिक को वर्ष 2022 से 2 जोड़ी सुरक्षा जूते निशुल्क प्राप्त होंगे। बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की अग्रिम राशि जो पहले ₹10000 थी वह बढ़कर ₹15000 हो गई है, जो ₹1250 प्रति माह की दर से वेतन से कटेगा।

यह समझौता एलजीबी के पंतनगर प्लांट के श्रमिकों के लिए हुआ है और यही लाभ एलजीबी के रुद्रपुर स्थित प्लांट के यूनियन से जुड़े श्रमिकों को भी मिलेगा।

हालांकि यूनियन के वर्तमान महामंत्री पूरन चंद पांडे तथा संरक्षक वीरेंद्र सिंह की अवैध बर्खास्तगी के मामले पर कोई सहमति नहीं बनी है और उनका संघर्ष जारी है।

दमन के बीच संघर्ष जारी…

ज्ञात हो कि यूनियन के वर्तमान संरक्षक विरेंद्र सिंह यूनियन बनने के समय 2012 से ही गैरकानूनी बर्खास्तगी झेलते रहे हैं। श्रम न्यायालय से 2014 में जीत के बाद 2015 से उनकी कार्यबहाली हुई थी। और यह मामला वे दो बार हाईकोर्ट और दो बार सुप्रीम कोर्ट से भी जीते।

लेकिन प्रबंधन ने अब एक तकनीकी मुद्दे को आधार बनाया। जिसके तहत विरेंद्र सिंह की शुरुआती बर्खास्तगी के समय श्रम न्यायालय में उनके ‘टूल रूम ट्रेनी’ के पद का संदर्भादेश होने के बहाने प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से जीत के बावजूद ‘ट्रेनी संतोषपूर्ण नहीं है’ के आधार पर सेवा समाप्त कर दी है, जिसकी क़ानूनी लड़ाई अभी जारी है।

दूसरी ओर कोविड-19 में गैरकानूनी वेतन कटौती की मांग उठाने पर महामंत्री पूरन चंद पांडे को 2 वर्ष पूर्व प्रबंधन ने गैरकानूनी रूप से निलंबित फिर बर्खास्त किया था। पूरन चंद पांडे संरक्षित कर्मकार हैं, लेकिन प्रबंधन ने कार्यवाही से पूर्व कोई अनुमति/अनुमोदन नहीं लिया है और पूरा मामला ही गैरकानूनी है, इसलिए यह विवाद श्रम न्यायालय में विचाराधीन है।

उल्लेखनीय है कि कंपनी में जब से यूनियन बनी है तब से दमन का सिलसिला लगातार जारी रहा है और मजदूरों का संघर्ष भी तब से (10 साल से) लगातार चल रहा है। जिले में कंपनी के दो प्लांट हैं, और दोनो की यूनियन एक है। लेकिन प्रबंधन इसे भी तोड़ने की असफल कोशिशें करता रहा है।

प्रबंधन हर स्थिति में यूनियन को तोड़ने और खत्म करने के प्रयास करता रहा, लेकिन इसमें वह कामयाब नहीं हो सका और उसे यूनियन से ही वेतन समझौता करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। इसके साथ बाकी मुद्दों पर संघर्ष जारी है।

समझौते पर प्रबंधन व यूनियन के हस्ताक्षर

समझौता पत्र पर प्रबंधन की ओर से कारखाना प्रबंधक मुत्तुकुमार स्वामी तथा एचआर प्रबंधक एचएस कन्याल के, जबकि एलजीबी वर्कर्स यूनियन की ओर से अध्यक्ष जमन सिंह, उपाध्यक्ष नवीन बकोटी, उप मंत्री जितेंद्र सिंह मेहरा, कोषाध्यक्ष गोविंद सिंह, प्रचार मंत्री जयदेव हलदर तथा संगठन मंत्री श्यामाचरण के हस्ताक्षर हैं।

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