महाराष्ट्र: 7 साल से बंद थर्मल पॉवर के श्रमिकों का वेतन तथा पीएफ की मांग को लेकर प्रदर्शन

कंपनी गेट पर ठीहा आंदोलन। मांडवा स्थित लैन्को थर्मल पॉवर कंपनी वर्ष 2016 से बंद है। करीब 2 हजार श्रमिक बेरोजगार हैं। तबसे श्रमिकों को वेतन तथा पीएफ भी नहीं मिला है।

वर्धा। 7 साल से बंद मांडवा स्थित लैन्को विदर्भ थर्मल पॉवर के श्रमिकों ने वेतन तथा पीएफ की मांग को लेकर 13 मई को कंपनी के सामने ठिया आंदोलन किया। श्रमिकों ने आर-पार की लड़ाई का भी ऐलान किया।

ज्ञात हो कि मांडवा स्थित लैन्को थर्मल पॉवर कंपनी का काम वर्ष 2016 से बंद है। यह कई पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की होल्डिंग कंपनी है। इस थर्मल पावर कंपनी में लोकल मांडवा, बेलगांव फुले व परिसर के करीब 2 हजार श्रमिक काम करते थे। परंतु वर्ष 2016 में कंपनी बंद हो गई। यहाँ विभिन्न प्लांट में काम करनेवाले श्रमिकों को वेतन तथा पीएफ वर्ष 2016 से नहीं मिला है।

बीते वर्षों में कंपनी की बिक्री और दिवालिया घोषित करने की भी कार्यवाही चलती रही। अब इस कंपनी के स्क्रैप निकालने का काम शुरू है।

गत 2 मई को इस संदर्भ में चर्चा होकर श्रमिकों का वेतन व पीएफ देने की बात तय हुई थी और कंपनी ने इसका आश्वासन दिया था। लेकिन अबतक मांग पूर्ण नहीं करने से श्रमिकों ने कंपनी के समक्ष ठिया आंदोलन किया।

श्रमिकों ने चेतावनी दी कि 9 माह का वेतन व 20 माह का पीएफ कंपनी प्रबंधक प्रमोद गायकवाड़ तीन दिन के भीतर अदा करें अन्यथा बेलगांव, मांडवा, पुलई के श्रमिकों ने बॉयलर या टीजी के 200 फूट से 108 श्रमिक परिवार के साथ आत्मदहन करेंगे।

आंदोलन में रामटेके, सुनील व्यवहारे, नितीन बाराहाते, नितिन मुले, जसवंत बहादूरे, दीपक नेहारे, सचिन तामगाडगे, पुरुषोत्तम पचारे, गणेश ठाकरे, बाबाराव खैरकर, विनोद गायकी, संतोष कुरसंगे, नारायन डांगे, मनीष चौधरी, घुमे, कृष्णा धोपटे, कमलाकर मेश्राम, महेश बोचरे, अंकुश वाणी, शंकर गेडाम, संजय पोशटे, सुधीर परिमत, भूषण सावध, प्रदीप घोडे सहित अनेक श्रमिक सहभागी हुए।

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