श्रमिक समस्याओं को लेकर मज़दूरों-किसानों की महिलाओं-बच्चों संग जोरदार पदयात्रा

संघर्ष: पीड़ित मजदूरों को न्याय नहीं मिला तो 24 मई को इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल सिडकुल पन्तनगर में सामुहिक भूख हड़ताल और कलेक्ट्रेट रुद्रपुर तक मार्च कर निर्णायक आंदोलन होगा।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। शहीद सुखदेव के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आज 14 मई को इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल सिडकुल पंतनगर से कलेक्ट्रेट, रुद्रपुर तक मजदूरों-किसानों ने महिलाओं और बच्चों संग मिलकर विशाल पदयात्रा निकाली और जिला प्रशासन के माध्यम से श्रम सचिव उत्तराखंड को ज्ञापन भेजा।

इससे पूर्व इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल पर क्रांतिकारी शहीद सुखदेव को याद करते हुए सभा हुई जिसमें न्याय मिलने तक संघर्ष तेज करने का आह्वान हुआ।

सभा में पश्चिमी दिल्ली के मुंडका में असमय मारे गये मजदूरों की याद में मज़दूरों, महिलाओं, बच्चों ने मौन धारण कर शोक व्यक्त किया। सभी ने इस घटना को मुनाफे के भेड़िया पूंजीपतियों औऱ पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा मजदूरों की हत्या करना घोषित किया।

उल्लेखनीय है कि श्रमिक समस्याओं को लेकर 26 अप्रैल 2022 इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल निकट पारले चौक सिडकुल पंतनगर में हुई मजदूर-किसान महापंचायत में पारित प्रस्ताव के अनुसार आज अपराह्न 2 बजे इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल पर बड़ी संख्या में सिडकुल पंतनगर की अन्य कंपनियों की यूनियनों के नेतृत्व में मजदूर शिफ्टों के साथ पहुंचे। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और किसान भी शामिल हुए।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सिडकुल पंतनगर, हरिद्वार और सितारगंज समेत उत्तराखंड में अवस्थित उद्योगों में कंपनी मालिकों, प्रबन्धको एवं ठेकेदारों द्वारा श्रम कानूनों का घोर उल्लंघन कर श्रमिकों का घोर शोषण किया जा रहा है।

ठेका, कैजुअल, नीम ट्रेनिंग, फिक्स टर्म, वाइएसएफ, अप्रेन्टिस आदि के नाम पर भर्ती किये मजदूरों से मुख्य उत्पादन क्षेत्रों एवं खतरनाक मशीनों पर स्थाई प्रकृति के उन्हीं कामों को कराया जा रहा है जिन्हें स्थाई व कुशल मजदूर करते हैं। जो कि गैरकानूनी कृत्य है। उक्त मजदूरों को स्थाई श्रमिकों के ही समान वेत, ,बोनस, न्यूनतम वेतन और ओवर टाइम का डबल भुगतान कराया जाना अनिवार्य है। इन्हें स्थाई किया जाना अति आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि श्रम अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भारतीय कानूनों को उक्त कंपनियों में लागू कराने के स्थान पर कंपनी मालिकों, प्रबन्धकों एवं ठेकेदारों की ही भाषा बोल रहे हैं। जो कि भारतीय संविधान और भारतीय कानूनों की घोर अवहेलना है। हम इसलिए संघर्ष कर रहे हैं कि सिडकुल में भारतीय संविधान और भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित हो। मजदूरों के उक्त शोषण पर रोक लगे।

वक्ताओं ने कहा कि उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा इंटरार्क कंपनी सिडकुल पंतनगर की तालाबन्दी के संदर्भ में अपने आदेश दिनांक 01/04/2022 में 6 सप्ताह के भीतर कार्यवाही करने को उत्तराखंड शासन को निर्देशित किया है परन्तु उक्त अवधि समाप्त हो जाने पर भी अब तक कोई कार्यवाही न करना अति चिंताजनक है।

शासन प्रशासन की इस लापरवाही और असंवेदनशीलता के कारण करीब 500 मजदूर पिछले 2 माह से बेरोजगार हैं। इंटरार्क कंपनी किच्छा में कंपनी के प्रमाणित स्थाई आदेशों का उल्लंघन कर कैजुअल मजदूरों को गैरकानूनी रूप से मुख्य उत्पादन क्षेत्रों में स्थाई प्रकृति के कार्यों में नियोजित किया गया है। किंतु सहायक श्रमायुक्त और श्रमायुक्त महोदय से अनगिनत बार शिकायत करने पर भी वो मौन हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश के पश्चात भी भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स) कंपनी के मजदूरों की कार्यबहाली नहीं की जा रही है। यही हाल गुजरात अम्बुजा, वोल्टास, एलजीबी, एचपी, शिरड़ी, असाल, बीसीएच, सत्यम, ऐरा, रिचा, पारले आदि अनगिनत कंपनियों का है। मालिकों द्वारा मजदूरों की पंजीकृत यूनियनों को मान्यता न देना और यूनियन नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर नौकरी से निकाल देना आम बात बन चुकी है। इस अनुचित श्रम ब्यवहार को श्रम अधिकारी संज्ञान में ही नहीं ले रहे हैं।                    

वक्ताओं ने कहा कि उक्त सभी मांगें भारतीय संविधान और भारतीय श्रम कानूनों के हिसाब से बहुत ही सामान्य मांगें हैं। बल्कि यह कहना उचित होगा कि ये मांगें भी नहीं बल्कि भारतीय कानूनों को कंपनियों में लागू कराने का मसला है। जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी श्रम अधिकारियों की ही है। किन्तु श्रम अधिकारी और शासन-प्रशासन कानूनों और भारतीय संविधान को कंपनियों में लागू कराने के स्थान पर स्वयं ही कानूनों का उल्लंघन कराने का वाहक बन गये हैं। जिससे दिन प्रतिदिन औद्योगिक अशांति बढ़ती ही जा रही है।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड में कंपनियों के भीतर भारतीय संविधान और भारतीय कानूनों के उक्त उल्लंघन पर यथाशीघ्र रोक लगाकर पीड़ित मजदूरों को न्याय मिलना चाहिए। अन्यथा 26 अप्रैल 2022 की मजदूर किसान महापंचायत में पारित प्रस्ताव के अनुरूप 24 मई 2022 को इंटरार्क मजदूरों के धरनास्थल निकट पारले चौक सिडकुल पन्तनगर में सामुहिक भूख हड़ताल करने और कलेक्ट्रेट रुद्रपुर तक मार्च कर निर्णायक आंदोलन करने को विवश होंगे। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी कंपनी मालिकों, ठेकेदारों और शासन प्रशासन की होगी।

कार्यक्रम के तहत कलेक्ट्रेट रुद्रपुर तक विशाल मार्च निकाला गया औऱ जिलाधिकारी के माध्यम से श्रम सचिव उत्तराखंड को ज्ञापन प्रेषित किया गया।

कार्यक्रम में इंटरार्क मजदूर संगठन सिडकुल पंतनगर, इंटरार्क मजदूर संगठन किच्छा, इंकलाबी मजदूर केंद्र, श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर, मजदूर सहयोग केन्द्र, ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, एरा श्रमिक संगठन, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन, राकेट रिद्धि-सिद्धि कर्मचारी संघ, शिरडी श्रमिक संगठन, थाइ सूमित नील आटो कामगार संगठन, एजाकि वर्कर्स यूनियन, भगवती माइक्रोमैक्स, आटोलाइन एम्पलाइज यूनियन आदि से जुड़े मज़दूरों व नेताओं ने भागीदारी निभाई।

साथ ही भारतीय किसान यूनियन से कर्म सिंह पड्डा, प्रताप सिंह, मनजिंदर सिंह बाजवा आदि; जन एकता मंच से सुब्रत कुमार विश्वास; बैंक कर्मचारी पूर्व मैनेजर शंकर चक्रवर्ती आदि समेत भारी संख्या में मजदूर, महिलाएं, बच्चे और किसान शमिल हुए।

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