रेलवे का निजीकरण नहीं होने देंगे : कर्मचारियों ने भरी हुंकार

यूनियन ने कहा कि केंद्र सरकार रेलवे का निजीकरण करने में लगी है। निजीकरण न ही यात्रियों के हित में और न ही कर्मचारियों के फायदे में है। इसको तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए, अन्यथा आंदोलन तेज होगा।

सहारनपुर। रेलवे के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने हुंकार भरी है। एलान किया कि किसी भी सूरत में रेलवे का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने अगर कर्मचारियों की बात न मानी तो बड़ा आंदोलन होगा, जिससे की जिम्मेेदारी सरकार की होगी।

शुक्रवार को उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन की बैठक का आयोजन रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में अंबाला से आए मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार और सचिव मनमीत सिंह शामिल हुए, जिनका पदाधिकारियों ने स्वागत किया। दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार रेलवे का निजीकरण करने में लगी है। इस कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।

निजीकरण न ही यात्रियों के हित में और न ही कर्मचारियों के फायदे में है। निजीकरण के बाद यात्रा के नाम पर लोगों से मनमाने दाम वसूले जाएंगे और यात्रा करना महंगा हो जाएगा। उन्होंने मांग की पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू कर रिक्त पड़े पदों पर भर्ती की जाए। उन्होंने कहा कि खानआलमपुरा यार्ड में कर्मचारियों की बेहद कमी है। इस वजह कार्य धीमा होता है। कई बार उचाधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसके अलावा रेलवे के अस्पताल में एमआरआई, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है, जिस वजह से कर्मचारियों और उनके परिजनों को परेशान होना पड़ता है। रेलवे के आवासों की स्थिति भी खराब है और कॉलोनियों की सड़कें भी टूटी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों की समस्या का समाधान न हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

इस दौरान शाखा अध्यक्ष एसएस वालिया, उपाध्यक्ष रामप्रीत, सचिव अश्वनी कुमार, शिवपाल, बाबूराम, रवि कुमार, अजय सिंह, मुकेश कुमार, विजय कश्यप, भगवान गिरी, राजेश कुमार सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे।

अमर उजाला से साभार

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