कोयला संकट से रनिंग स्टाफ पर बढ़ा काम का बोझ; रेल रोको आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी 3-3 दिनों तक घर से बाहर रहकर लगातार काम कर रहे हैं। श्रमिक संगठन का कहना है कि अगर इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा तो मजबूरी में रेल रोको आंदोलन बुलाना पड़ेगा।

भिलाई. देश इस वक्त कोल क्राइसिस से जूझ रहा है। ऐसे समय में अधिकारियों ने रनिंग स्टाफ पर काम का बोझ बढ़ा दिया है। कर्मचारी 3-3 दिनों तक घर से बाहर रहकर काम कर रहे हैं। परिवार से दूरी और काम से आराम नहीं मिलने की वजह से रनिंग स्टाफ परेशान है। श्रमिक संगठन का कहना है कि अगर इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा तो मजबूरी में रेल रोको आंदोलन बुलाना पड़ेगा। इसके लिए रेलवे के अधिकारी जवाबदार होंगे जो इस तरह के आदेश दे रहे हैं। रेलवे पायलट इस विषय को लेकर संगठन के माध्यम से रेलवे के महाप्रबंधक से मिलकर गुरुवार को अपना दर्द बता चुके हैं।

रेलवे के नए ऑपरेटिंग मेनुअल में रनिंग स्टाफ को पहले अगर डोंगरगढ़ से नागपुर भेजते हैं, तो उसके बाद सीधे भिलाई रवाना किया जाता है। इस तरह से उनका हेड क्वाटर डोगरगढ़ को बायपास करते हैं। भिलाई के रनिंग रूम में 8 घंटे रेस्ट करवाने के बाद पुन: रनिंग स्टाफ को रेक वापस डोंगरगढ़ लेकर जाने थमा दिया जाता है। रनिंग स्टाफ का कहना है कि 36 घंटे बाहर रहने के बाद लौटने पर 16 घंटे रेस्ट दिया जाता है। वहीं अगर रनिंग रूम में पायलट रुकता है तो उसे सिर्फ 8 घंटे रेस्ट मिलता है।

रेलवे के अधिकारी हेड क्वाटर बायपास करते हुए पायलट को सीधे अगले स्टेशन के रनिंग रूम में आराम करवा रहा है, जिससे जो पायलट 16 घंटे बाद काम करने आता, उसे 8 घंटे के भीतर उपयोग में ले रहे हैं। इस तरह से जो चालक 36 घंटे में घर लौट जाता था, वह अब 72 घंटे बाद परिवार के पास लौट रहा है। इस तरह पायलट परिवार से 3 दिनों तक दूर रहता है, घर में राशन से लेकर सब्जी तक की जिम्मेदारी कैसे पूरा किया जा सकेगा। इसे सबसे पहले डोंगरगढ़ में लागू किया गया है। जिसको देखते हुए रायपुर और बिलासपुर में विरोध शुरू कर दिया गया है। भिलाई से रनिंग स्टाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

रेलवे ने रनिंग स्टाफ की पोस्टिंग खोमसरा और कोराड़ीमल स्टेशन में कर दी है। रनिंग स्टाफ का कहना है कि जहां मकान ही नहीं है, वहां वे कहां जाकर रहेंगे। वहां न मार्केट है और न घर। इसके बाद भी वहां क्रू पाइंट शुरू कर दिया गया है। रेलवे के अधिकारी पहले वहां की व्यवस्था देखे, इसके बाद कर्मियों की पोस्टिंग करे। इसका श्रमिक संगठन ने खुलकर विरोध किया है।

रेलवे ने ऑपरेंिटंग मेनुअल में शुद्धी पत्र लाया है, जिसमें हेड क्वाटर को बायपास करना है। इसे डोंगरगढ़ में लागू किया गया है। जैसे वहां के रनिंग स्टाफ को रेक लेकर पहले भेजा जाता है नागपुर, वहां से सीधे भिलाई। इसके बाद भिलाई से वापस डोंगरगढ़। इससे रेलवे को जहां फायदा हो रहा है, वहीं कर्मचारियों को बराबर आराम नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से रनिंग स्टाफ इसका विरोध शुरू कर दिया है।

रेलवे बोर्ड अब 2 या 3 रेक को जोड़कर लॉगहॉल मालगाड़ी चलवा रहा है। दो रेक को जोडऩे के बाद सीएनडब्ल्यू स्टाफ या टीएक्सआर स्टाफ लॉगहॉल मालगाड़ी के रेक का जायजा लेता है। जिसके बाद पायलट के सुपुर्द किया जाता है। रेलवे के अधिकारी अब मालगाड़ी के रेक की जांच का काम भी पॉयलट से करवाना चाहते हैं। इसका रनिंग स्टाफ विरोध कर रहा है। वे चाहते हैं कि जिस तरह से पहले टीएक्सआर स्टाफ या सीएनडब्ल्यू स्टाफ इस काम को अंजाम देता था, वैसे ही स्थिति जारी रहे।

रेलवे बोर्ड ने पायलट को टूल किट साथ में लेकर चलने एक लेटर जारी किया था। इसका विरोध हुआ, लेकिन मामला अब तक सुलझा नहीं है। पायलट चाहते हैं कि इस मामले में व्यवस्था किस तरह की रहेगी साफ हो जाए। रेलवे का रनिंग स्टाफ चाहता है कि टूल किट को इंजन में उपलब्ध करवाया जाए या पहले की तरह व्यवस्था को जारी रखे रेलवे।

रनिंग स्टाफ का कहना है कि 9 घंटे की ड्यूटी करना है, कोल क्राइसेस के नाम पर अधिकारी 12 से 15 घंटे काम करवा रहे हैं। इसी तरह से बिना गार्ड के ही रेक को लेकर जाने पायलट को मौखिक आदेश दिया जा रहा है। श्रमिक संगठन का कहना है कि जो काम करवाना है उसका लिखित आदेश दिया जाए। मौखिक आदेश के भरोसे या लॉबी में आदेश जारी करने वाले के बिना नाम का आदेश चस्पा करने से काम नहीं चलेगा।

जयशंकर शर्मा, मंडल सचिव, एलारसा, रायपुर मंडल ने बताया कि हमें आशा है कि रेलवे हमारी बात को समझेगा, लेकिन रेलवे अपनी बात पर अडिग रहता है तो रेल के सुरक्षित संचालन व कर्मचारी की भलाई के लिए अगर रेल रोको आंदोलन भी करना पड़ा तो हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

वीके तिवारी, एलारसा, एसईसीआर ने बताया कि पांच मजदूर संगठन ने मिलकर रनिंग स्टाफ की 12 सूत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त रूप से बिलापुर लॉबी में प्रदर्शन किया। इस रनिंग स्टाफ की संयुक्त एक्शन कमेटी ने अपनी बातों को रेलवे के आला अधिकारियों के सामने रख दिया है।

पत्रिका से साभार

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