करोलिया लाइटिंग में कार्यबहाली व वेतन का समझौता सम्पन्न, अनशन व आंदोलन समाप्त

10 श्रमिकों की तत्काल व एक श्रमिक की 3 माह बाद पुनर्नियुक्ति पर तथा 15 दिन में निलंबित दो श्रमिकों की कार्यबहाली होगी। प्रबंधन की असंवैधानिक शर्तें निरस्त हुईं, वेतन वृद्धि भी होगी।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। संघर्षरत करोलिया लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड सिड़कुल, पंतनगर के श्रमिकों का आज 6 मई को हल्द्वानी में उप श्रमयुक्त की मध्यस्तता में लिखित समझौता सम्पन्न हो गया। इससे पूर्व 5 मई को उप जिलाधिकारी और सहायक श्रमआयुक्त की मध्यस्तता में मौखिक समझौता हो गया था।

जिसके बाद देर रात अनशन के 29वें दिन सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी में भर्ती चार श्रमिकों सहित पाँच श्रमिकों का अनशन जूस पिलाकर समाप्त किया गया था।

समझौते की शर्तें-

समझौते के तहत वर्तमान में बर्खास्त 10 श्रमिकों देव सिंह, मदन सिंह, शैलेश कुमार, वीरेन्द्र सिंह, दिनेश चन्द्र, मिथिलेश यादव, विनोद भट्ट, नीरज कुमार दुबे, हरीश भंडारी व सौरभ कुमार की तत्काल प्रभाव से पुनर्नियुक्ति पर कार्यबहाली हुई है लेकिन उनकी सेवा शर्तें वही रहेंगी और ग्रेजुटी की गणना पुरानी नियुक्ति के समय से ही बहाल रहेगी।

पूर्व में बर्खास्त सुनील कुमार यादव की इन्हीं शर्तों पर तीन माह बाद पुनर्नियुक्ति पर कार्यबहाली होगी। आंदोलन के दौरान निलंबित यूनियन अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह और मंत्री अशोक सिंह मेहता को 15 दिन में जांच पूरी करके कार्यबहाली होगी।

15 दिनों में निलंबित श्रमिकों की कार्यबहाली के बाद समझौता पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसी के साथ समस्त श्रमिकों की रुपए 850 की वेतन बढ़ोत्तरी होगी। बर्खास्त श्रमिकों की 200 रुपए अतिरिक्त वेतन वृद्धि होगी। किसी के साथ प्रबंधन प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई नहीं करेगा।

इस समझौते से यूनियन को मान्यता मिली है। इस दौरान प्रबंधन द्वारा यूनियन समाप्त करने सहित दी गई असंवैधानिक कठोर शर्तें और अंडरटेकिंग निरस्त हो गई है। सोमवार को एएलसी के समक्ष लिखित विवरण तैयार होगा।

दो साल से संघर्ष था जारी

कंपनी में करोलिया लाइटिंग इम्पालाइज यूनियन बनने के बाद से ही शोषण-दमन बढ़ गया था। प्रबंधन ने कोविड-19 जांच की माँग करने पर साल 2020 में यूनियन उपाध्यक्ष को फर्जी आरोप में निलंबित और फिर बर्खास्त कर दिया था। इसी आरोप में 23 दिसंबर को प्रबंधन ने 10 अन्य मजदूरों को भी गैरकानूनी रूप से बर्खास्त कर दिया था। आंदोलन के दौरान 28 अप्रैल को प्रबंधन ने यूनियन अध्यक्ष व मंत्री को निलंबित किया था।

इस शोषण व दमन के खिलाफ दिसंबर, 2021 से आंदोलन तेज हुआ, लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण 13 जनवरी को आंदोलन स्थगित हो गया था। चुनाव के बाद पुनः श्रम भवन में धरना शुरू हुआ था लेकिन प्रशासन ने वहाँ धरना पाबंद कर दिया था।

इसके बाद गांधी पार्क, रुद्रपुर में 31 मार्च से लगातार धरना-प्रदर्शन व 7 अप्रैल से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू हुआ था। उधर इस अन्याय के खिलाफ और अनशनकारी साथियों के समर्थन में प्लांट में 15 अप्रैल से मज़दूरों का वैधानिक टूल डाउन आंदोलन जारी रहा।

इस दौरान एक के बाद एक चार अनशनकारियों को प्रशासन जबरिया उठाकर जिला अस्पताल रुद्रपुर में भर्ती कर दिया था। जहाँ जबरिया ग्लूकोज चढ़ना शुरू हुआ लेकिन मज़दूर साथियों ने मुहँ से पानी के अलावा कुछ नहीं लिया।

इस बीच चारों अनशनकारी मज़दूरों का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अनशन के 27वें दिन रुद्रपुर से सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी स्थानांतरित कर दिया गया था। जबकि एक अन्य श्रमिक का अनशन धरना स्थल गाँधी पार्क में जारी रहा। जबकि प्लांट में टूल डाउन चलता रहा।

आंदोलन के समर्थन में सिड़कुल की तमाम यूनियनें भी उतार पड़ीं और सहयोग-समर्थन व आर्थिक मदद दिया। श्रमिक संयुक्त मोर्चा, ऊधम सिंह नगर ने पहलकारी भूमिका निभाई।

इस दबाव में प्रशासन व प्रबंधन दोनों थे। गुरुवार को दिन में राज्य के श्रमयुक्त की मध्यस्तता में वार्ता असफल रही, फिर शाम को एसडीएम की मध्यस्तता में मौखिक समझौता और शुक्रवार को डीएलसी की मध्यस्तता में लिखित समझौता सम्पन्न हुआ।

ज्ञात हो कि कंपनी में महज 33 स्थाई श्रमिक हैं, जिनमें 13 श्रमिक शोषण का शिकार होकर बाहर हो गए थे।

समझौते के बाद कंपनी में करोलिया लाइटिंग इम्पालाइज यूनियन ने सभी सहयोगकर्ताओं को धन्यवाद दिया है।

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