विविध रूपों में मना मई दिवस; क्रांतिकारी विरासत से प्रेरणा लें, मज़दूर संघर्षो को आगे बढ़ाएं!

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 मई को देश-दुनिया के मज़दूरों ने अपनी क्रांतिकारी विरासत और शहीदों को याद कर आज के मज़दूर विरोधी दौर में जुझारू और निर्णायक संघर्ष का आह्वान हुआ।

1 मई को दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह उत्तर भारत से लेकर पूर्व और दक्षिण भारत तक देश के विभिन्न हिस्सों में कहीं सभा हुई, तो कहीं रैली निकली, गोष्ठी और अन्य रूपों में मई दिवस की क्रांतिकारी परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प बंधा।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मई दिवस का संघर्ष उस परिस्थति में उत्पन्न हुआ था जबकि मजदूरों की कार्य परिस्थिति बेहद खराब थी। काम के घण्टे 14 से 16-18 घण्टे तक होते थे। वेतन, भत्ते आदि की हालत की अत्यंत दयनीय थी। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से मजदूरों ने 8 घण्टे काम, 8 घण्टे आराम 8 घण्टे मनोरंजन की मांग के साथ आंदोलन शुरु हुआ, जो 1 मई 1886 को शिकागो में बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया।

1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों ने हड़ताल की थी। हडताल के तीसरे दिन पूंजीपति वर्ग की सरकार ने शिकागो के मजदूरों की सभा में गोलियां चलवा कर आंदोलन खत्म करवाने की साजिश की जिसमें 6 मजदूर शहीद हो गए थे। अगले दिन 4 मई को हेमार्केट में मजदूर सभा पर बम गिरवाया गया। कई मजदूर शहीद हुए तो पुलिस के कुछ जवान भी मारे गए।

इसका झूठा आरोप मजदूर नेताओं पर लगाकर मुकदमे का ढोंग रचा गया। 1887 में चार मजदूर नेताओं अलबर्ट पार्सस, आगस्ट स्पाइस, एडॉल्फ फिशर व जार्ज एंजेल को फांसी की सजा हुई। लेकिन आंदोलन दबा नहीं, 1889 मे पेरिस में समाजवादियों की इंटरनेशनल में इन कुर्बानियों की याद में हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाने और मजदूरों के अधिकारों की मांग पर आंदोलन को आगे बढ़ाने तथा समाजवाद का निर्णायक लक्ष्य के लिए संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया गया।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार पूर्व की सरकारों से भी तीव्र तरीके से मजदूरों के अधिकारों में कटौती कर रही है। संघर्षों से हासिल श्रम क़ानूनी अधिकारों को खत्म कर 4 श्रमसंहिताओं में बदलकर मोदी सरकार की पक्षधरता देशी-विदेशी पूंजीपतियों के पक्ष में खुलेआम जारी है। इनाम संहिताओं से मजदूरों की हालात गुलामों जैसी हो जाएगी।

साथ ही खून पसीने से खड़े सरकारी-सार्वजनिक संपत्तियों-उद्योगों को व पूँजीपतियों को तेजी से बेचने में जुटी है। मज़दूरों का दमन तेज हो गया है। आरएसएस-भाजपा ने कॉर्पोरेट की सेवा के साथ जनता को बांटने के लिए सांप्रदायिक फसाद बेलगाम कर दिया है।

ऐसे हालत में आज मज़दूरों की व्यापक संग्रामी एकजुटता के साथ एक निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ने की जरूरत को सभी जगहों पर रेखांकित किया गया।

विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रमों की झलक-

उत्तराखंड

रुद्रपुर। श्रमिक संयुक्त मोर्चा, उधमसिंह नगर, के बैनर तले मई दिवस इंटरार्क मजदूरों के धरना स्थल, सिड़कुल, पंतनगर में सामूहिक रूप से मनाया गया। यह बात निकालकर आई कि मई दिवस के शहीदों और संघर्ष से ही मज़दूरों को तमाम अधिकार हासिल हुए थे। आज मज़दूर वर्ग पीछे हटा है और पूंजीपति वर्ग हमलावर है; मिले अधिकारों को भी छीन रहा है। धर्म-जाति-क्षेत्र और स्थाई-अस्थाई मज़दूरों में सजिशन बाँट रहा है।

सभा मे 260 दिनों से संघर्षरत इंटरार्क, 25 दिन से भूख हड़ताल कर रहे करोलिया लाइटिंग, सवा तीन साल से संघर्षरत भगवती-माइक्रोमैक्स के मज़दूर संघर्षों को मजबूत करने का संकल्प बंधा। साथ ही वोल्टास, गुजरात अम्बुज, एलजीबी, एरा, लुकास टीवीएस सहित तमाम मज़दूरों की कार्यबहली की मांग बुलंद हुई, व्यापक एकता बनाने और एक बड़े आंदोलन की तैयारी में जुटने का आह्वान हुआ।

कार्यक्रम में विभिन्न यूनियनों के साथ मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के घटक संगठन मज़दूर सहयोग केंद्र व इन्कलाबी मज़दूर केंद्र भी शामिल रहे।

हल्द्वानी मे मई दिवस संयुक्त आयोजन समिति के नेतृत्व में बुद्ध पार्क में कार्यक्रम हुआ।

रामनगर में मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले नगर में जुलूस निकाला गया एवं शहीद पार्क में सभा हुई, मोदी सरकार की कॉर्पोरेट परस्त नीतियों की आलोचना के साथ मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड रद्द करने की मांग हुई।

रामनगर में समाजवादी लोक मंच के तत्वाधान में पैंठपड़ाव स्थित मंच कार्यालय पर मजदूर आंदोलन के शहीदों को याद करते हुए झंडारोहण किया गया।

हरिद्वार में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार के बैनर तले विभिन्न सामाजिक संगठनों/ट्रेड यूनियनों द्वारा मई दिवस का आयोजन चिन्मय डिग्री कॉलेज के सामने किया गया। सभा के उपरांत मजदूर बस्ती रावली महदूद में जुलूस निकालते हुए वापस चिन्मय कॉलेज पर समापन किया गया।

देहरादून में संयुक्त मई दिवस समारोह समिति उत्तराखंड के तत्वावधान में गांधी पार्क से रैली निकाली गई।

पंतनगर। इंकलाबी मजदूर केन्द्र, ठेका मजदूर कल्याण समिति व प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा प्राइमरी स्कूल टा कालोनी मैदान पंतनगर में सभा की गई और टा कालोनी मैदान से झा कालोनी मजदूर बस्तियों से होते हुए शहीद स्मारक पंतनगर तक जुलूस निकाला गया।

ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा, पंतनगर द्वारा कार्यक्रम-

राजस्थान

जयपुर। क्रान्तिकारी नौजवान सभा और जयपुर सफ़ाई मज़दूर यूनियन द्वारा अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस की क्रान्तिकारी विरासत और मई दिवस के अमर शहीदों की याद में रैली और सभा का आयोजन किया गया।

साथियों ने वर्तमान समय के मज़दूर आन्दोलन की जटिलताओं और 4 नई श्रम संहिताओं और उसके दुष्परिणाम पर चर्चा की। बस्ती के साथियों ने सफ़ाई मजदूरों की हालत और उनकी मूलभूत मागों के बारे बात रखी, साथ ही महिला मजदूरों की भूमिका की महत्ता को बताया।

हरियाणा

कुरुक्षेत्र। निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन ने कुरुक्षेत्र के स्थानीय लेबर चौकों पर जाकर जनसभाएं की। जनसंघर्ष मंच हरियाणा सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने जनसभा को सम्बोधित किया। जनसभा के बाद मज़दूर चौक से पुराने बस अड्डे तक जुलूस निकाला गया।

जींद। मनरेगा मजदूर यूनियन, निर्माण कार्य मजदूर-मिस्त्री यूनियन व जन संघर्ष मंच हरियाणा ने जीन्द के डीआरडीए प्रांगण में संयुक्त रूप से सभा की।

गोहाना (सोनीपत)। जन संघर्ष मंच हरियाणा द्वारा शहीद ऊधम सिंह प्रेक्षागृह में मई दिवस आयोजन हुआ।

फरीदाबाद में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा सैक्टर-24, आजाद नगर, सामुदायिक भवन में सभा कर फैक्ट्री एरिया में जुलूस निकाला गया।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में SWCC की ओर से मुर्शिदाबाद, हावड़ा, कोलकाता सहित विभिन्न जिलों की मज़दूर बस्तियों में आयोजन का दृश्य-

कर्नाटक

बंगलुरु में विभिन्न संगठनों व BWSSB ठेका मज़दूरों द्वारा आयोजन हुआ-

उत्तरप्रदेश

गाजियाबाद। पहाड़पुर कूलिंग टावर मजदूर यूनियन द्वारा साहिबाबाद गाजियाबाद में मई दिवस व झंडारोहण कार्यक्रम हुआ।

मेरठ। मजदूर सहायता समिति ने यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटिड कम्पनी के बाहर धरने पर बैठे ठेका मजदूरों के बीच मई दिवस का कार्यक्रम किया। दिसम्बर 2020 से पहले इस कंपनी में लगभग 750 ठेका मजदूर और 150 स्थायी मजदूर काम करते थे। लेकिन कोरोड़ों का मुनाफ़ा होने के बावजूद भी अचानक कम्पनी में तालाबंदी ने सैकड़ों मजदूरों और उनके परिवारवालों को सड़क पर ला दिया।

बलिया। इन्कलाबी मजदूर केन्द्र द्वारा रसड़ा कस्बा में अन्तराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर जुलूस निकाल कर कस्बा में जगह-जगह पर नुक्कड़ सभा किया गया। क्रालोस व स्थानीय मजदूर साथियों की भागीदारी रही।

गुजरात

अहमदाबाद में जीएफटीयू, जेएसएम व जीएमएस द्वारा संयुक्त आयोजन के साथ रैली निकली गई।

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धन्यवाद,-संपादक 

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