अनशन के 26 दिन : कारोलिया मज़दूरों का अस्पताल में स्वास्थ बिगड़ा, प्रशासन अभी भी मूकदर्शक

कार्यबहाली के लिए संघर्षरत करोलिया लाइटिंग के अनशनकारी श्रमिक देव सिंह, शैलेश, वीरेन्द्र व मिथिलेश का जिला अस्पताल में तो हरीश का धरना स्थल गाँधी पार्क में अनशन जारी है।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। कार्यबहाली के लिए लगातार संघर्षरत करोलिया लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड सिड़कुल, पंतनगर के जिला अस्पताल में भर्ती चार अनशनकारी मज़दूरों की हालत लगातार नाजुक बनी हुई है। आज सोमावर को अनशन के 26वें दिन दो अनशनकारी मज़दूरों की हालत बिगड़ गई। एक अनशनकारी साथी के सीने में दर्द के कारण रात में इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ा।

उधर स्थानीय प्रशासन इस मामले में मूक दर्शक बना हुआ है। बीच में वार्ताओं की खनापूर्ति हुई।

आज सहायक श्रमआयुक्त ऊधम सिंह नगर की मध्यस्तता में हुई वार्ता में प्रबंधन ने श्रमिकों की किस्तों में पुनर्नियुक्ति करने के साथ यूनियन खत्म करने, मज़दूरों को कभी भी निकाल देने, कथित नुकसान की भरपाई करने, कहीं भी ट्रांसफर करने, सभी श्रमिकों को अंडारटेकिंग भरने सहित तमाम शर्तें रख दी गईं। यूनियन उपाध्यक्ष को न लेने व अध्यक्ष व मंत्री को निलंबित रखने का भी प्रस्ताव दिया।

यूनियन ने इन शर्तों को मनाने से इनकार कर दिया तो एएलसी ने मामले को श्रम न्यायालय संदर्भित करने की पेशकश कर दी। एएलसी ने पूर्व में भी इसे कोर्ट के लिए संदर्भित कर दिया था, लेकिन दबाव के बाद श्रमयुक्त के निर्देश पर फिर से सुनवाई हुई और फिर वही हालत बन गई है।

उल्लेखनीय है कि करोलिया लाइटिंग के प्रबंधन ने यूनियन बनने से प्रतिशोधवश 11 श्रमिकों को अवैध रूप से बर्खास्त कर दिया था। जबकि यूनियन अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह और मंत्री अशोक सिंह मेहता को आंदोलन के लिए 28 अप्रैल से निलंबित कर दिया है।

इस शोषण व दमन के खिलाफ गांधी पार्क, रुद्रपुर में 31 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन व 26 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। चार श्रमिकों को प्रशासन जबरिया अस्पताल भेज चुका है, जहाँ उनकी हालत नाजुक होती जा रही है।

उधर इस अन्याय के खिलाफ और अनशनकारी साथियों के समर्थन में प्लांट में 15 अप्रैल से मज़दूरों का 3 घंटे का टूल डाउन आंदोलन जारी है।

ज्ञात हो कि 7 अप्रैल से जारी अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठे और अस्पताल में भर्ती देव सिंह का छब्बीसवाँ दिन, शैलेश का बाईसवाँ दिन, वीरेन्द्र सिंह का सत्रहवाँ दिन, मिथिलेश का पंद्रहवां दिन और धरना स्थल पर हरीश सिंह भंडारी का पांचवां दिन रहा।

मज़दूर समस्त श्रमिकों की कार्यबहाली व माँगपत्र पर समझौता होने और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने के प्रति दृढ़ हैं।

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