देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी दिखा जज्बा, बंद और प्रदर्शनों में रही एकता की ताक़त

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देश भर में जहां कहीं भी यूनियनों ने सक्रियता दिखलाई, वहां हड़ताल को लागू करने के लिए कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। साफ है कि सचेत प्रयास से ही आर-पार की लड़ाई निर्णायक बनेगी।

ट्रेड यूनियनों संगठनों द्वारा 28 और 29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल के आह्वान तहत देश भर के मज़दूरों ने जगह-जगह पर इकठ्ठा होकर अपने माँग-मसलों के लिए आवाज़ उठाई व प्रदर्शन किए। देशभर के करोड़ों मज़दूरों और कर्मचारियों ने आम हड़ताल में भागीदारी की। इस हड़ताल का असर कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे भारत में दिखा है।

हड़ताल से बैंकों, वित्तीय सेवाओं, विभिन्न सरकारी सेवाओं, परिवहन, इस्पात इकाइयों, बंदरगाह और गोदी, दूरसंचार सेवाओं, खेती-बाड़ी, बिजली उत्पादन इकाइयों, कोयला और अन्य खदानों, तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन इकाइयों, और लाखों दूसरे अलग-अलग उद्योगों के काम-काज ठप पड़ गये।

इफ्टू की राष्ट्रीय कमेटी ने बयान जारी कर बताया कि श्रमिकों की प्रतिक्रिया का दूसरा दिन नौकरियों और अधिकारों पर हमलों के खिलाफ गुस्से को रेखांकित करता है। देश भर में जहां कहीं भी यूनियनों ने कार्यक्रम आयोजित किए, वहां वहां हड़ताल को लागू करने के लिए कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।

सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई 2 दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल के दूसरे दिन न केवल 10 ट्रेड य़ूनियम केंद्रों के समूह, बल्कि इफ्टू सहित अखिल भारतीय जुझारू ट्रेड यूनियन केंद्रों, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) आदि ने सक्रिय भागीदारी निभाई, वहीं भाजपा समर्थित बीएमएस इस हड़ताल का हिस्सा नहीं रही।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे भारत में असर

हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और रेहड़ी-पटरी वालों ने संसद भवन के पास जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में दिल्ली जल बोर्ड, डीबीसी, बैंक, एलआईसी, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, रेहड़ी पटरी के साथ ही घरेलू कामगारों ने शिरकत की।

रुद्रपुर में मज़दूरों ने जोरदार रैली निकालकर उप श्रमयुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। लुधियाना में विभिन्न मज़दूर संगठनों द्वारा रोष-प्रदर्शन हुआ। बिहार में ग्रामीण मज़दूरों ने प्रदर्शन किया। हरियाणा में राज्य कर्मचारी व परिवहन कर्मी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे, जिसमें मनरेगा व निर्माणकार्य मज़दूरों ने भी भागीदारी निभाई। हड़ताल का समर्थन किसान संगठनों समेत कई छात्र-युवा संगठनों ने भी किया था।

तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, त्रिपुरा, असम, हरियाणा, झारखंड और अन्य राज्यों के कई जिलों में भी संपूर्ण बंद जैसी स्थिति रही है। गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त रूप से हड़ताल का असर दिखा। सिक्किम में भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे।

दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताल की सूचना है। डाक, आयकर ऑडिट, जीएसआई आदि केंद्र सरकार के कर्मचारी भी बड़े पैमाने पर हड़ताल में शामिल हुए हैं। मछुआरे भी हड़ताल के दौरान समुद्र में नहीं गए। घरेलू कामगारों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। देश के विभिन्न हिस्सों में स्कीम कर्मचारियों, ऑटो और निर्माण मजदूरों के बड़े प्रदर्शनों की खबरें हैं।

केरल सरकार के आदेश के बावजूद राज्य के सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति कम रही। हड़ताल से सरकारी उपक्रमों- सेल, आरआईएनएल और एनएमडीसी संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ।

दक्षिण भारत के दूसरे शहरों की सड़कें भी खाली रहीं। सरकारी बसें पूरी तरह से दूर रहीं. इसके अलावा टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी रोड पर नहीं उतरीं।

सार्वजनिक स्वामित्व वाले उपक्रमों सेल, आरआईएनएल और एनएमडीसी के करीब 35,000 कर्मचारियों के देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी मंगलवार को काम पर नहीं आने से इनके संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।

Bharat Bandh

खुली लूट के खिलाफ एकजुट होकर आर-पार के संघर्ष की जरूरत

हड़ताल व प्रदर्शनों के दौरान वक्तों ने कहा कि सत्ताधारियों ने वर्ष 1990 में नई आर्थिक व औद्योगिक नीति उदारीकरण, निजीकरण, भूमंडलीकरण के जरिए देश को कारपोरेट घरानों व साम्राज्यवादी देशों को लूट के लिए खूली छूट दे दी।

जहाँ लंबे संघर्षों से हासिल श्रम क़ानूनी अधिकार छिनते गए, वहीं जनता के खून पसीने से खड़े बैंक, बीमा, परिवहन, गैस-पेट्रोल-डीजल, कोयला सहित खनन, बिजली, रेल, सेल, संचार, आयुध, एयर इंडिया, बंदरगाह समेत स्कूलों-कालेजों, अस्पतालों, को औने-पौने दामों में सरकार की ओर से निजी हाथों में सौपने या बंद करने का जो खेल शुरू हुआ था, वह आज मोदी युग में बेलगाम हो चुका है।

मोदी सरकार ने कारपोरेट घराने को लूट और ज्यादा मुनाफा के लिए मजदूरों के संघर्ष और बलिदान के बल पर बने 44 श्रम कानून को समाप्त कर उसे चार लेबर कोड में तब्दील कर दिया है। इससे मजदूरों के काम घंटे बढ़ाने, स्थाई की जगह फिक्स्ड टर्म नौकरी, नीम ट्रेनी जैसे फोकट की मजदूरी कराने, यूनियन व हड़ताल के अधिकारों पर अंकुश आदि द्वारा श्रम क़ानूनी अधिकारों को समाप्त करके मालिकों को मनमर्जी रखने व निकालने की खुली छूट दी जा रही है।

वक्ताओं ने कहा कि कोरोना आपदा को पूँजीपतियों के अवसर में बदलकर मोदी सरकार ने मुनाफे की लूट को बेलगाम बना दिया है। देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई ने मेहनतकश अवाम का जीना दूभर कर दिया है। वहीं अदानियों-अंबनियों की पूँजी तेजी से बढ़ रही हैं। इस खुली लूट के खिलाफ सभी जुझारू यूनियनों को एकजुट होकर आर-पार के संघर्ष में उतरना होगा!

देशभर में प्रदर्शन की कुछ झलकियां

दिल्ली

दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और रेहड़ी-पटरी वालों ने संसद भवन के पास जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के अधीन आने वाले लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के ठेका कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शिरकत की।

इस प्रदर्शन में दिल्ली जल बोर्ड, डीबीसी, बैंक, एलआईसी, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, रेहड़ी पटरी के साथ ही घरेलू कामगार यूनियन के कर्मचारी, सदस्यों ने सैकड़ों की तादाद में शिरकत की। 

नारायणा औद्योगिक क्षेत्र और ओखला औद्योगिक क्षेत्र फेस 2 में इफ्टू ने क्षेत्रीय रैलियों के माध्यम से हड़ताल की, जिसमें अन्य ट्रेड यूनियन भी शामिल हुए। इफ्टू दिल्ली कमेटी के सदस्यों के साथ अन्य कार्यकर्ता आज दोपहर जंतर-मंतर पर एक केंद्रीय अखिल ट्रेड यूनियन प्रदर्शन में शामिल हुए।

जन्तर-मन्तर पर विभिन मजदूर संगठनों के प्रदर्शन में मज़दूर सहायता समिति ने भागीदारी निभाई। गार्गी प्रकाशन दिल्ली ने यहाँ अपना स्टॉल लगाया। मजदूर सहायता समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तिका ‘मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएँ’ भी यहाँ उपलब्ध थी। विकल्प मंच, दिल्ली तथा अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पर्चे-पुस्तिका का प्रचार-वितरण किया।

जंतर-मंतर दिल्ली प्रदर्शन में मजदूर सहायता समिति

पंजाब

लुधियाना। लुधियाना के मज़दूर संगठनों ने अपनी माँगों को लेकर समराला चौक पर रोष-प्रदर्शन और पैदल मार्च किया। इस अवसर पर टेक्सटाइल हौज़री कामगार यूनियन, मोल्डर एंड स्टील वर्कर्स यूनियन, इंकलाबी मज़दूर केंद्र पंजाब, कारखाना मज़दूर यूनियन, लोक एकता संगठन के साथ नौजवान भारत सभा, भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां), मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन पंजाब भागीदारी निभाई।

रोष-प्रदर्शन के बाद इलाके में पैदल मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने लंबी में नरमा ख़राबी के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे मज़दूरों और किसानों पर भगवंत मान सरकार की पुलिस द्वारा किए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इस अवसर पर नईं सवेर पाठशाला की छात्राओं, साथी रामलखन और हरचरण ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुति किए।

पंजाब में, इफ्टू के नेतृत्व में निर्माण श्रमिकों ने मंगलवार को पठानकोट और फाजिल्का में बड़े प्रदर्शन किए। सोमवार को नवाशहर में इसी प्रकार के बड़े प्रदर्शन के अलावा मुक्तसर, मलहोट में निर्माण मजदूरों की रैली विशाल हुई थी। गुरदासपुर, रोपड़ और गढ़ शंकर में भी निर्माण मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था। रोपड़ के प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ता भी शामिल हुईं।

उत्तराखंड

रुद्रपुर। दो दिवसीय मज़दूर हड़ताल के समर्थन में दूसरे दिन मंगलवार को श्रमिक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र से श्रम भवन तक जोरदार रैली, श्रम भवन पर प्रदर्शन व केंद्रीय मांगों पर राष्ट्रपति तथा स्थानीय माँगों पर उप श्रमायुक्त के नाम ज्ञापन दिया गया। इसमें मासा के घटक संगठनों मज़दूर सहयोग केंद्र व इंक़लाबी मज़दूर केंद्र और उनसे जुड़ी यूनियनों की प्रमुख भागीदारी रही।

हरियाणा

हड़ताल के दूसरे दिन हरियाणा में पूरे प्रदेश में राज्यकर्मी हड़ताल पर रहे। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। हरियाणा रोडवेज़ के कई डिपो पर बस सेवाएं निलंबित रहीं। रोडवेज़ कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी हड़ताल के तहत राज्य के कई डिपो पर प्रदर्शन किया।

सोनीपत बस स्टेंड से बस को बाहर निकालने से रोकते रोडवेज यूनियन के सद्स्य

कुरुक्षेत्र। 29 मार्च हडताल के दूसरे दिन जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा) ,मनरेगा मजदूर यूनियन व निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन ने नये बस स्टैण्ड से पिपली रोड कुरुक्षेत्र तक जोरदार प्रदर्शन किया। बाद में प्रदर्शनकारी रोडवेज के हडताली कर्मचारियों के नये बस स्टैंड पर धरने में और ताज पार्क में सर्वकर्मचारी संघ व अन्य कर्मचारियों द्वारा दिये गये धरन-प्रदर्शन में शामिल हुए।

नीलोखेड़ी। जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक-मासा) तथा मनरेगा मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने हड़ताल के समर्थन में शहर में प्रदर्शन किया। नगरपालिका, अग्निशमन, जन स्वास्थ्य विभाग के हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में धरना पर बैठे। बीडीपीओ कार्यालय नीलोखेड़ी पर भी प्रदर्शन किया।

गोहाना। जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक-मासा) ने गोहाना में हड़ताली कर्मचारियों के प्रदर्शन व आम सभा में शिरकत की।

कैथल। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को जन संघर्ष मंच हरियाणा, मनरेगा मजदूर यूनियन व निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन ने संयुक्त रूप से कैथल की हनुमान वाटिका पार्क में मजदूरों की एक सभा आयोजित की जिसमें कैथल, ढांड व पुण्डरी ब्लॉक के सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।

बिहार

एन॰टी॰पी॰सी कहलगांव (बिहार) के अधिकतर ठेका कर्मचारियों के साथ स्थायी कर्मचारियों ने भी दूसरे दिन भी हड़ताल की। तड़के सुबह से ही अपने 6 गेटों पर हड़ताल को असफल करने के प्रशासन के प्रयासों को विफल करने के लिए मोर्चाबंदी शुरु कर दी। बिहार में अन्य जगह, इफ्टू ने AIKMS के साथ सासाराम शहर में हड़ताल के समर्थन में धरना दिया।

रोहतास। अखिल भारतीय मजदूर हड़ताल के दूसरा दिन भी ग्रामीण मजदूर यूनियन, बिहार (घटक मासा) ने रोहतास जिले के करगहर और काराकाट प्रखंड मुख्यालय पर रोषपूर्ण प्रर्दशन और सभा किया।

तेलंगाना

तेलंगाना में सभी भूमिगत खदानें पूरी तरह बंद रही। कुछ खुली खदानों (ओपन कास्ट) को छोड़कर कोठागुडम में भी ओपन कास्ट खदानें बंद रही। यह हड़ताल इफ्टू सहित सिंगरेनी क्षेत्र में कार्यरत सभी ट्रेड यूनियनों की JAC द्वारा आयोजित की गई है।

गोदावरी खानी में, इफ्टू ने कोयला श्रमिकों की एक बड़ी लामबंदी की। इफ्टू सदस्यों ने निजामाबाद जिले में मुख्य रूप से बीड़ी मजदूरों की एक विशाल रैली का आयोजन किया।

बंगाल

बंगाल में, विभिन्न संघर्षशील यूनियनों ने साझे प्रदर्शन किए। इफ्टू से संबद्ध यूनियनों के कार्यकर्ता आज शाम को रिशरा में एक जनसभा की।

बंगलुरु में प्रदर्शन का दृश्य

ओडिशा

ओडिशा में इफ्टू के तहत आयोजित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बरहामपुर के आउटसोर्सिंग मेडिकल कर्मचारियों ने अखिल भारतीय आम हड़ताल के समर्थन आकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

आंध्र प्रदेश

चित्तूर जिले के नागरी शहर में इफ्टू के बैनर तले आंगनवाड़ी कर्मियों का एक विशाल प्रदशन हुआ। बाद में हड़तालियों ने विरोध के हिस्से के रूप में मानव श्रृंखला बनाई। चित्तूर में ही, आशा कार्यकर्ताओं का एक विशाल विरोध भी इफ्टू द्वारा आयोजित किया गया था। चित्तूर जिले के श्रीकालहस्ती में इफ्टू द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया था। तिरुपति में इफ्टू के बैनर तले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का एक विशाल जुलूस निकाला गया।

कुरनूल में इफ्टू द्वारा रोड ब्लॉक और विरोध प्रदर्शन किया गया और गुंथकल एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित हुआ। मदनपल्ली, जंगारेड्डीगुडम, निदादावोलु और गौरीपट्टनम में भी विरोध और प्रदर्शन आयोजित किए गए।

निजीकरण का सामना कर रहे विशाखा स्टील प्लांट के कर्मचारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे और शहर में “विशाखा स्टील बचाओ” नारे के साथ एक संयुक्त जन जुलूस निकाला। एलुरु में, इफ्टू ने एक विशाल विरोध जुलूस निकाला। कल भी इसी तरह का एक जुलूस आयोजित किया गया था।

अनंतपुरम में इफ्टू ने विरोध जुलूस का नेतृत्व किया और हड़ताल का आयोजन किया। यहाँ सोमवार को भी जुलूस निकला था।

पांडिचेरी में भी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हुआ. इस दौरान, दुकानें, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, सिनेमाघर बंद रहे. निजी बसें सड़कों से नदारद रहीं।

शिमला के DC ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते हुए विभिन्न संगठनों के लोग। - Dainik Bhaskar
हिमाचल प्रदेश के शिमला में डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन

हड़ताल की सफलता को सलाम, निर्णायक आंदोलन की जरूरत

दो दिवसीय हड़ताल के आह्वान पर मजदूर वर्ग की बेहतर प्रतिक्रिया रही। हालांकि निजी क्षेत्र में प्रचार की कमी से काफी कमजोर स्थिति रही। हड़ताल में सक्रिय मज़दूरों-कर्मचारियों को सलाम! यह भी रेखांकित करने की बात है कि हड़ताल और विभिन्न प्रदर्शनों की सफलता में महिलाओं, किसानों और जनवादी वर्गों के संगठनों और छात्रों के व्यापक समर्थन और भागीदारी की यहां भूमिका रही।

वर्तमान दौर में मोदी सरकार के नेतृत्व में पूंजीपति जमात की आक्रामकता और बेलगाम लूट के खिलाफ यह हड़ताल जरूरी थी। लेकिन कुछ एक सालाना जलसों के रूप में कुछ एक हड़तालें कोई कारगर समाधान नहीं निकालेंगी, बल्कि मज़दूरों में निराश को बढ़ाएंगी। अतीत इस बात का गवाह है।

आज मज़दूर वर्ग पर हमला जितना व्यापक है, वैसे में मज़दूर वर्ग की व्यापक एकता से एक बड़े, सतत आंदोलनों को आगे बढ़ाते हुए जुझारू और निर्णायक संघर्ष को मजबूत करना होगा! तभी इन हमलों और मुनाफे की इस आंधी लूट को खत्म किया जा सकता है।

मुख्य मांगें-

  1. जनहित में चारों श्रम संहिताएं निरस्त करते हुए मज़दूरों की राय से श्रमिक हित में श्रम क़ानून बनाया जाए!
  2. सरकारी/सार्वजनिक उद्यमों व संपत्तियों को बेचने; निजीकरण, निगमीकरण, पाईपलाइन मुद्रीकरण पर तत्काल रोक लगे!
  3. बिजली संशोधन विधेयक (2021) तत्काल निरस्त हो!
  4. आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 रद्द किया जाए!
  5. न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रुपए किया जाए!
  6. स्थायी और बारह मासी कामों के लिए ठेका प्रथा बन्द हो; सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए!
  7. समान काम पर समान वेतन व सुविधाएं दी जाए!
  8. आशा, अंगनबाड़ी, मिड डे मील, स्वास्थ्य मिशन जैसे स्कीम वर्कर को कर्मचारी का दर्ज देने सहित सभी मांग पूरी हों!
  9. कर्मचारी विरोधी नई पेंशन स्कीम समाप्त कर पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल किया जाए!
  10. मनरेगा दिहाड़ी ₹800 और साल में प्रत्येक ग्रामीण मजदूर को न्यूनतम 200 दिन की रोजगार गारंटी के साथ मनरेगा मजदूरों को पूरे साल काम मिले!
  11. रोज़गार न दे पाने की सूरत में ₹15000 मासिक बेरोज़गारी भत्ता दो!
  12. मज़दूरों के धरना-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों पर रोक लगाने की कूप्रथाएं तत्काल बंद हों!
  13. पेट्रोल, डीजल, सिलेण्डर व अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाई जाए! रेलवे किराया घटाया जाए और सभी रेलगाड़ियां चलाई जाएं!
  14. दमन तंत्र व फर्जी गिरफ्तारियों व मुकदमों पर रोक लगते हुए उसे निरस्त किया जाए!
  15. सभी मजदूर परिवारों को बीपीएल श्रेणी का लाभ, बेघर लोगों को आवासीय प्लाट व मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए!
  16. उदारीकरण-निजीकरण और वैश्वीकरण की मज़दूर विरोधी नीतियां रद्द हों!
  17. जनता को साम्प्रंदायिक आधार पर बाँटने, नफ़रत फैलाने की साज़ि‍श बंद करो।

भूली-बिसरी ख़बरे

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