कितने रूपों में बढ़ रहे हैं ऑनलाइन ठगी के धंधे; कैसे बन रहे हैं आप इसके शिकार?

तेजीसे बढ़ते इंटरनेट के बीच लाखों की तादाद में लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं और बिना तैयारी के डिजिटल इंडिया बनाने में लगी सरकार इनकी तरफ से आँखेँ मूँदे हुए है।

  • अजित श्रीवास्तव

भारत में तेजी से इन्टरनेट और स्मार्टफोन उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकताहै कि ट्राई (TRAI) के अनुसार भारत में ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की कुल संख्या जनवरी 2020 में 67.34 करोड़ थी जो जुलाई 2021 तक बढ़ कर 80 करोड़ के पार जा चुकी है।

भारत में स्मार्टफोन उपभोक्ताओं की कुल संख्या 60 करोड़ से ज्यादा है और प्रति व्यक्ति प्रतिमाह डाटा खपत 12 जीबी तक पहुँच चुकी है।

लेकिन इसके साथ ही इन्टरनेट आधारित ठगी के मामले भी बड़ी तेजी के साथ बढ़े हैं और डिजिटल भारत में अपराध भी तेजी से डिजिटल होते जा रहे हैं।

इन डिजिटल अपराधों के लिए न तो अभी तक कोई प्रभावशाली कानून हैं और न ही सरकारों की मंशा इनकी रोकथाम की दिखाई देती है, बल्कि आंकड़े बताते हैं कि सरकारें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इन अपराधों को बढ़ावा देने में लगी हैं। लाखों की तादाद में लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं और बिना तैयारी के डिजिटल इंडिया बनाने में लगी सरकार इनकी तरफ से आँखेँ मूँदे हुए है।

हालिया जारी भारत में अपराध (CII) रिपोर्ट – 2020 के अनुसार 2020 में पहली बार साइबर अपराधो की संख्या 50 हजार  से ज्यादा दर्ज की गई। यदि इस आंकड़े की तुलना 2010 से की जाये तो यह आंकड़ा 2010 मे दर्ज किए गए मामलों का 38 गुना है और 2014 की तुलना में 5 गुना है।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के इन आंकड़ों में सिर्फ वही मामले दर्ज होते हैं जिनमें पुलिस ने विधिवत एफ़आईआर दर्ज की होती है, अर्थात साइबर अपराधों की वास्तविक संख्या इनसे कई गुनी ज्यादा ही होगी।

इन दर्ज मामलों में से 2017 में 61.7%, 2018 में 65.10%, 2019 में 69% और 2020 में 71.3% मामले पुलिस के पास लंबित बने रहे अर्थात इनमें चार्जशीट भी  फाइल नहीं हो सकी। दिल्ली पुलिस के बयान के मुताबिक साइबर अपराधों के 62% से ज्यादा मामले वित्तीय धोखाधड़ी के मामले होते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्यमंत्री श्री संजय धोत्रे ने फरवरी 2021 में राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में संसद में बताया था कि डिजिटल बैंकिंग से संबन्धित साइबर सुरक्षा  मामलों की संख्या 2020 में 2.90 लाख तक पहुँच गई जो कि 2018 में 1.59 लाख और 2019 में 2.47 लाख थी। अर्थात डिजिटल बैंकिंग पर साइबर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होने यह भी बताया कि भारत में कुल डिजिटल लेन देन की संख्या 2018-19 में 3,134 करोड़ से बढ़कर 2020 में 4,572 करोड़ तक पहुँच गई है। वहीं ब्लॉक किए गए वेबसाइट/वेबपेज/एकाउंट की संख्या 2020 में 9,849 रही जो कि 2019 में 3,635 और 2018 में 2,799 थी।

More Than 60% Of Cyberfraud Is Originated Through Cellular Phones - Doral  Family Journal

प्रचलित डिजिटल ठगी की बानगी

भारत में इन दिनों जिस प्रकार के डिजिटल फ़्राड आम तौर पर देखने में आ रहे हैं, वे मुख्यतः ये हैं:

फिशिंग :

इस प्रकार की ठगी में आपको ईमेल या व्हाट्स ऐप पर फर्जी लिंक भेजे जाते हैं और जिन पर क्लिक करने से आपकी गोपनीय सूचनाएँ जैसे कि कार्ड की जानकारी, खाते की जानकारी, यूपीआई आईडी, ओटीपी आदि हासिल कर ली जाती है और फिर उनका प्रयोग करके आपका खाता खाली कर दिया जाता है। इसके अलावा इनका प्रयोग करके आपके फोन या कंप्यूटर में वाइरस भी डाला जा सकता है या आपके कंप्यूटर का इस्तेमाल क्रिप्टो माइनिंग के लिए बिना आपकी जानकारी के लिए किया जा सकता है।

ऑनलाइन शॉपिंग फ़्राड:

ये वर्तमान में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला फ़्राड का तरीका है। इसमें फर्जी वेबसाइट बना कर उसपर बड़े ही आकर्षक और मनमोहक ऑफर दिये जाते हैं और उनका विज्ञापन ईमेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाता है। आप लालच में आकर समान ऑर्डर करते हैं और उसके बाद या तो कोई फर्जी सामान आपके पते पर भेज दिया जाता है या फिर ज़्यादातर मामलों में वेबसाइट बंद कर दी जाती है और आपके ढूँढने से भी उनका पता नहीं मिलता।

251 रुपये में मोबाइल फोन देने वाला घोटाला हम सबने देखा ही था जिसमें भारत सरकार के मंत्री और अधिकारी भी शामिल कर लिए गए थे।

पहचान चोरी (Identity Theft):

इसमें आपका निजी डाटा चोरी करके उसका इस्तेमाल आपके नाम से लेन देन करने, आपके नाम लोन लेने, या सोशल मीडिया पर आपके नाम से पैसा मांगने के लिए किया जाता है।

The Top 5 Identity Theft Pitfalls and How to Avoid Them - Debt.com

वर्क फ्रम होम घोटाला :

इसके तहत लालच दिया जाता है कि घर बैठे कुछ घंटे सर्वे, डाटा इंट्री जैसे काम करके आप अपनी कमाई कर सकते हैं और शुरुआत करने के लिए आपको कुछ पैसे जमा करने होंगे। एक बार पैसा जमा करने के बाद फर्जी नियोक्ता आपकी गाढ़ी कमाई की रकम लेकर गायब हो जाता है।

लॉटरी घोटाला :

इसमें आपको ईमेल या मैसेज में आपकी लॉटरी या इनाम जीतने की सूचना दी जाती है और आपसे आपके गोपनीय विवरण मांगे जाते हैं या फिर पैसे आपको भेजने के लिए खर्चे या कमीशन की मांग की जाती है। यह सर्वाधिक प्रचलित घोटालों में से एक है।

चंदा घोटाला :

इसमें आपको फोन करके या संदेश भेज करके आपसे किसी बहुत बीमार बच्चे या व्यक्ति के नाम पर आपसे चंदे की मांग की जाती है और आपकी भावनाओं का फायदा उठा कर आपसे पैसा ले लिया जाता है।

टैक्स रिफ़ंड घोटाला:

इसमें आपको टैक्स छूट या टैक्स वापसी का झांसा ईमेल या मैसेज के द्वारा दिया जाता है और आपसे इसके बदले पैसों की मांग की जाती है।

ओएलएक्स घोटाला:

आजकल इस प्रकार के फ़्राड भी खूब प्रचलन में हैं। इसमें अक्सर आकर्षक ऑफर वाले विज्ञापन ओएलएक्स जैसी वेबसाइटों पर डाले जाते हैं और कई बार प्रसिद्ध शख्सियत के नाम से भी विज्ञापन डाले जाते हैं और इनके झांसे में आकार एक बार पैसा दे देने के बाद ये लोग गायब हो जाते हैं। बहुत सारे लोग ओएलएक्स जैसी साइटों पर इस फर्जी खरीद बिक्री के चक्कर में आकार फ़्राड के शिकार हो चुके हैं।

हेडकांस्टेबल हुआ साइबर ठगी का शिकार, डेबिट कार्ड का क्लोन बनाकर खाते से  निकाल लिए 70 हजार | Police Media News

क़ानूनी रूप से मान्य घोटाले

उपरोक्त वर्णित घोटाले सरकार और कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आते हैं, हालांकि इन पर कोई प्रभावशाली कानून नहीं हैं और न ही इन पर कोई सख्त कार्रवाई हो पाती है।

इनके अतिरिक्त कुछ ऐसे घोटाले भी हैं, जिन्हें सरकार कानूनन गलत भी नहीं मानती और जिन्हें बड़े पैमाने पर सरकारी संरक्षण में कानूनी तौर पर देश भर में चलाया जा रहा है।

आइये एक नजर ऐसी ठगी और घोटालों पर डालते हैं।

Cyber Crime In Mobile Message Link And Otp To Information Big Fraud -  सावधान! साइबर क्राइम में अब मोबाइल से मैसेज लिंक भेजकर और ओटीपी पूछकर हो  रही बड़ी ठगी | Patrika News

ऑनलाइन सट्टेबाजी:

भारत में सट्टेबाजी या जुआ सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 के अंतर्गत प्रतिबंधहीत है। किन्तु यह कानून काफी लंबे समय से संशोधित नहीं किया गया है और खास तौर से ऑनलाइन जुआ या सट्टेबाजी शब्द का प्रयोग इस अधिनियम में नहीं होने की वजह से तकनीकी तौर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी भारत में अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

इससे भी बढ़कर यदि ऑनलाइन बेटिंग साइट भारत से बाहर की है तो उसे किसी भी प्रकार की कानूनी दाँवपेंच का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।

मौजूदा सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान ने हर आदमी को ऑनलाइन या डिजिटल लेन देन के लिए मजबूर कर दिया है। शायद इन्हीं विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए मोबाइल वालेट और यूपीआई को जमकर प्रचारित प्रसारित किया गया है।

असल में भारत में पिछले तीन चार वर्षों में बेहतरीन  इंटेग्रटेड पेमेंट गेटवे स्थापित किया गया है और हर किसी को पेटियम (Paytm), फोनपे (Phonepe), गूगलपे (googlepay) आदि से लैस कर दिया गया है, और यहाँ तक कि ट्रूकालर और व्हाट्सऐप (whatspp) जैसे ऐप भी ऑनलाइन पेमेंट के बाजार में उतार चुके हैं, अर्थात सरकार ने वह जमीन तैयार कर दी है जहां ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियाँ सुचारु रूप से अपना कारोबार फैला सकती हैं।

ड्रीम 11 (dream11) जैसा सट्टेबाजी ऐप भारतीय क्रिकेट में प्रयोजक की हैसियत से काम कर रहा है।

सट्टेबाजी खुलेआम मोबाइल ऐप्स के जरिए हो रही

क्रिकेट का हर छोटे से बड़ा स्टार किसी न किसी सट्टेबाजी ऐप का विज्ञापन कर रहा है।  नतीजे के तौर पर हर मोबाइल और हर टीवी सेट पर इन कंपनियों के लुभावने विज्ञापन हैं और आम लोग इनके जाल में फंस कर अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे इनके हाथों गंवा रहे हैं।

भारत में इनका जाल किस कदर तेजी से फैला है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि विश्व के कुल ऑनलाइन सट्टेबाजी का 15% भारत में खेला जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2024 तक यह 41% तक पहुँच जाएगा। भारत में खेलों के कुल बाजार का 85% क्रिकेट का बाजार है और क्रिकेट का खेल सट्टेबाजी के बिलकुल अनुकूल है और यही वजह है कि बड़ी तेजी से सट्टेबाजी का बाजार भारत में अपने पैर पसार रहा है।

भारत में सट्टेबाजी का बाजार 2022 के अंत तक लगभग 2.8 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

स्टेट्स न्यूज जर्नल के एक आकलन के मुताबिक भारत में इन्टरनेट का प्रयोग करने वाले लोगों में से कम से कम 40% लोग साल में कम से कम एक बार किसी न किसी प्रकार की ऑनलाइन सट्टेबाजी में हिस्सा ले चुके हैं। अब यदि भारत में इन्टरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 60 करोड़ मनी जाय तो लगभग 24 करोड़ लोग ऑनलाइन सट्टेबाजी के दायरे में आ चुके हैं और इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।  

ऑनलाइन बाइनरी ट्रेडिंग:

कोविड महामारी के बाद से भारत में तेजी से लोगों का रुझान शेयर मार्केट की तरफ बढ़ा है। अकेले वित्तीय वर्ष 2021 में भारत में शेयर मार्केट में रिकार्ड 1.42 करोड़ नए लोग जुड़े हैं। 2016 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 33% खुदरा निवेशक थे जो कि 2021 में बढ़कर 45% हो गए। इंडेक्स फ्यूचर मार्केट में खुदरा निवेशक 39% हैं जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक महज 15% हैं।

निजी निवेशकों की इस बढ़ती हुई तादाद का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि इनमें से ज़्यादातर छोटे या मझोले शहरों से आते हैं। निजी निवेशकों कि इस बढ़ती हुई तादाद के पीछे सरकार द्वारा निवेश के अवसरों को कम करके तथा ब्याज दरों में भारी कटौती करके उन्हें शेयर बाजार की तरफ धकेलने की योजना का ही हाथ है।

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हम सभी जानते हैं की शेयर बाज़ार एक तरह का जुआघर है जहां वास्तविक निवेश होने की जगह शेयरों के माध्यम से जुआ खेला जाता है और बड़े निवेशक खास तौर से विदेशी संस्थागत निवेशक छोटे छोटे निवेशकों को होने वाले नुकसान से अपना भारी मुनाफा बनाते हैं।

लेकिन इस सबसे भी ऊपर ऑनलाइन बाइनरी ट्रेडिंग नाम की जिस ठगी ने पैर पसारने शुरू किए हैं उसका किस्सा काफी भयावह है।

शेयर मार्केट में होने वाली ठगी एक हद तक सेबी जैसी संस्थाओं से नियंत्रित और नियमित होती है और काफी कड़े कानून शेयर मार्केट पर लागू होते हैं लेकिन ऑनलाइन बाइनरी ट्रेडिंग पूरी तरह अनियंत्रित ठगी है जिस पर भारत सरकार के कोई नियम नहीं लागू होते और जिसका मुनाफा पूरी तरह विदेशी ठगों के हाथ में जाता है।

ऑनलाइन बाइनरी ट्रेडिंग में ट्रेडिंग ऐप आपको किसी वस्तु या मुद्रा के दाम में हो रहे उतार चढ़ाव के ऊपर दांव लगाने का ऑप्शन देते हैं, जैसे की सोने या क्रूड ऑयल की कीमतों पर डॉलर के मुक़ाबले पाउंड की कीमत पर। आपको दाम ऊपर या नीचे जाने के ऊपर दांव लगाना होता है और सही दांव लगने पर आपको 110 प्रतिशत से लेकर  190-195 प्रतिशत का मुनाफा होता है और दांव सही न लगने पर पूरे  रुपए डूब जाते हैं।

यहीं पर असली खेल शुरू होता है। दांव लगाने के बाद नतीजा आने का समय 5 सेकंड से लेकर 5 घंटे तक का होता है और आपके पास ये जानने का कोई तरीका नहीं होता कि तयशुदा नतीजे के समय सही कीमत क्या थी। असल में यदि एक ही समय अलग अलग ऐप या साइट पर अलग अलग कीमतें दिख रही होती हैं।

जल्दी मुनाफा कमाने, रातो रात अमीर बनने के चक्कर में लोग इनमें अपना पैसा लगाते हैं और इन ऐप या साइटों का algorithm ऐसा होता है कि शुरुआती कुछ दांव जीतने के बाद हार का सिलसिला शुरू होता है और फिर ठीक ठाक रकम हारने के बाद जब नशा उतरता है तभी यह सिलसिला रुकता है।

इसका बाजार कितनी तेजी से फैला है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑनलाइन बाइनरी ऑप्शन के केवल तीन ऐप OlympTrade, IQOption और Binomo के मिलकर कुल उपभोक्ता 16 करोड़ से ज्यादा हैं।  

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी विदेशी मुद्रा की खरीद फरोख्त पर रोक लगा रखी है, लेकिन इन कंपनियों के कोई भी दफ्तर या सर्वर भारत में नहीं होने की वजह से इनपर कोई रोकथाम नहीं होती। इन कंपनियों ने भारत स्थित बहुत सी फर्जी संस्थाओं से गठजोड़ कर रखी है, जिनके बैंक खातों का प्रयोग करके निवेशकों का धन इन कंपनियों के खाते तक पहुंचाया जाता है।

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कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आँख मूँद कर डिजिटल इंडिया बनाने में लगी सरकार जानबूझ कर करोड़ों लोगों, खासकर युवा वर्ग को तबाही की ओर धकेल रही है। जब तक सरकार इनकी तरफ ध्यान दे और जब तक इनके रोकथाम का कोई उपाय अस्तित्व में आए, हमारे आपके पास सचेत रहने और इस ठगी के जाल से खुद ही बचे रहने के सिवा कोई विकल्प नहीं है।

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