करोलिया लाइटिंग में मजदूरों की अवैध गेटबंदी, मजदूरों में आक्रोश, 5 जनवरी से हड़ताल की तैयारी

प्रबंधन ने संराधन कार्यवाही के दौरान 10 मज़दूरों की गेटबंदी की थी। आज प्रबंधन ने काम पर पहुँचे अन्य मज़दूरों का गेट भी बंद कर दिया, जो बाद में एएलसी के आदेश पर खुला।

पंतनगर (उत्तराखंड)। सिडकुल पंतनगर स्थित करोलिया लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधन ने गैरकानूनी रूप से 10 मजदूरों की गेट बंदी कर दी, जिससे मजदूरों में काफी आक्रोश है और उन्होंने 5 जनवरी से सामूहिक हड़ताल करने की घोषणा कर दी है।

दरअसल करोलिया लाइटिंग में जब से यूनियन बनी है, तब से ही दमन चल रहा है। डेढ़ साल पहले कोविड-19 जांच की अपील करने पर यूनियन के उपाध्यक्ष सुनील कुमार यादव को कंपनी ने निलंबित किया और बाद में बर्खास्त कर दिया था। उसी मामले में प्रबंधन कथित रूप से जांच चलाता रहा और यूनियन पर तरह तरह के दबाव बनाता रहा।

यूनियन ने प्रबंधन को अपना एक मांग पत्र दिया था। प्रबंधन उसे भी दरकिनार करता रहा। मामला सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष लंबित है। इसी दौरान 23 दिसंबर को अचानक प्रबंधन ने 10 मजदूरों मदन सिंह, विनोद भट्ट, शैलेश कुमार, नीरज कुमार दुबे, हरीश भंडारी, वीरेन्द्र सिंह, देव सिंह, दिनेश चन्द्र, मिथिलेश यादव, सौरभ कुमार की गैरकानूनी गेटबंदी कर दी। तब से मजदूर श्रम भवन रुद्रपुर में धरनारत हैं।

मज़दूर आज 28 दिसंबर से हड़ताल पर जाने वाले थे, जिसकी वैधानिक नोटिस यूनियन ने पहले से दे रखी थी, लेकिन 29 दिसंबर को सहायक श्रम आयुक्त द्वारा कंपनी के एमडी को वार्ता के लिए बुलाया गया है जिसको देखते हुए मजदूरों ने अपने हड़ताल को स्थगित कर दिया।

इसके बावजूद आज सुबह मजदूर जब कंपनी गेट पहुंचे तो पहले से ही कंपनी का गेट बंद था और बाकी मजदूरों को जबरिया हड़ताल में ढकेलने की प्रबंधन ने नाकाम कोशिश की। यूनियन नेताओं ने तत्काल एएलसी महोदय से फोन पर बात की, उसके बाद किसी तरीके से गेट खुला और 15-20 मिनट के बाद मजदूर अपने कार्य पर जा सके।

ज्ञात हो कि प्लांट में महज 32 स्थाई श्रमिक हैं, उनमे से अबतक 11 मज़दूर बाहर हैं।  शेष मज़दूरों पर भी कथित आरोप पत्र देकर प्रबंधन मज़दूरों पर दबाव बढ़ाता रहा है। पिछले 11 अक्टूबर को भी प्रबंधन ने यही हरकत की थी।

इन सारे हालात में मजदूरों के भीतर काफी आक्रोश व्याप्त है और मजदूरों ने 5 जनवरी से हड़ताल का ऐलान कर दिया है।

करोलिया लाइटिंग इम्पालाइज यूनियन का कहना है कि प्रबंधन पूर्व में बर्खास्त किए गए यूनियन उपाध्यक्ष सुनील यादव की सवेतन कार्यबहाली करे, जिन 10 श्रमिकों की संराधन कार्यवाही के दौरान गेट बंदी की गई है, उनकी तत्काल कार्यबहाली करें, सारे आरोप पत्र निरस्त करे और मांग पत्र पर समझौता करें। नहीं तो मजदूरों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

उल्लेखनीय है कि आईआर वार्ता के दौरान प्रबंधन द्वारा किया गया यह कृत्य गैरकानूनी है, क्योंकि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 6ई के तहत प्रबंधन ऐसी कोई कार्यवाही नहीं कर सकता जिससे औद्योगिक अशांति बने। इसलिए यह गेट बंदी अवैध है।

अब ऐसे में 29 दिसंबर को सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष होने वाली वार्ता में क्या निष्कर्ष निकलता है, इस पर मजदूरों की निगाहें टिकी हुई है और मजदूर बड़े आंदोलन के मूड में हैं।

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: