उत्तराखंड : 12 साल से संघर्षरत एएलपी के मज़दूरों ने कार्यबहाली के लिए तेज की आवाज

2009 से संघर्ष जारी है। हाई कोर्ट से जीते, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कोरोना के प्रकोप से मज़दूरों का मामला लंबित है। 12 साल में कई सरकारें बदल गईं, लेकिन मज़दूरों को न्याय नहीं मिला।

रुद्रपुर। एएलपी ओवरसीज के मज़दूरों ने स्थानीय झा कॉलेज के मैदान में अपनी आम सभा करके प्रबंधन, प्रशासन व सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और तत्काल कार्यबहाली की मांग की।

आनंद निशिकावा कंपनी इम्प्लाइज यूनियन के महामंत्री नरेश सक्सेना ने कहा कि सन 2009 में एक साजिश के तहत एएलपी ओवरसीज कंपनी के प्रबंधन ने 101 श्रमिकों को गैरकानूनी रूप से निकाल दिया था। तबसे मज़दूरों का संघर्ष जमीनी के साथ कानूनी रूप से भी जारी है। उच्च न्यायालय नैनीताल से जीत के बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में विचाराधीन है।

यूनियन नेता अमरीक सिंह ने कहा कि नैनीताल उच्च न्यायालय से जीत मिलने के बावजूद प्रबंधन की मनमानी जारी है। इस बीच राज्य में सरकारें बदलती रहीं, लेकिन मज़दूरों की कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई। दूसरी ओर कोरना महामारी के बहाने उच्चतम न्यायालय में भी सुनवाई बंद है।

कोषाध्यक्ष गंगा सिंह ने कहा कि पिछले 12 साल से हम मज़दूर दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। इन 12 सालों में सारे मज़दूरों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। इस बीच प्रबंधन गैरकानूनी रूप से मशीनें भी राज्य से दूसरे राज्य शिफ्ट कर रही है।

श्रम विभाग में कई बार आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद श्रम अधिकारी भी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं और प्रबंधन की गैर कानूनी कार्यवाही पर कोई रोक भी नहीं लगा रहे हैं। ऐसी स्थिति में मज़दूरों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

सभा में रमेश, आनंद पांडे, गोविंद, कुलवन्त सिंह, अमर सिंह, काबुल सिंह, राम यादव, ओम प्रकाश यादव आदि मौजूद थे।

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