किसान आंदोलन का एक साल : अधूरी जीत को मुकम्मल जीत में बदलने का देशव्यापी संकल्प

देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों के साथ किसान आंदोलन ने अपने ऐतिहासिक संघर्ष का एक वर्ष पूरा किया। दिल्ली मोर्चों के साथ लाखों किसानों ने विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए।

विभिन्न ट्रेड यूनियन, छात्र और युवा संगठन, महिला संगठन, नागरिक समाज संगठन और अन्य संगठन देश के अन्नदाता के समर्थन में एक साथ आए। कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने आंदोलन को अपना समर्थन और एकजुटता दी।

किसानों के हक़ में देश-दुनिया से उठी आवाज़

26 नवंबर 2020 को दिल्ली की सीमाओं पर शुरू हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर टिकरी, सिंघू, ग़ाज़ीपुर और शाहजहांपुर मोर्चों पर दसियों हजार किसान पहुंचे और आंदोलन को अन्य मांगों के साथ जारी रखने का अहम संदेश दिया।

देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों के साथ दिल्ली मोर्चों के साथ लाखों किसान कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में आयोजित सभाओं, रैलियों, मार्च, चक्का जाम आदि में लाखों किसानों ने हिस्सा लिया।

कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने आंदोलन को अपना समर्थन और एकजुटता दी। यूके, यूएस आदि में एकजुटता कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

अधूरी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने की इच्छा और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन

26 नवंबर, 2021 को किसान आंदोलन ने अपने ऐतिहासिक संघर्ष का एक साल पूरा किया, जिसमें देश भर के कार्यक्रमों में लाखों किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। यह दिन इतिहास में लोगों के संघर्ष के सबसे महान क्षणों में से एक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

किसानों की अधूरी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने की इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ, यह दिन किसानों के संघर्ष के बारह लंबे महीनों को चिह्नित करता है, जिसमें कई जीतें हासिल हुईं जो एक समय असंभव लगती थीं।

किसान आंदोलन एक निर्मम सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए आम लोगों की शक्ति को साथ लेकर खड़ा है और लंबे समय तक, महात्मा गांधी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित शांतिपूर्ण सत्याग्रह के उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा।

केंद्र के तीन जनविरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का ये आंदोलन पिछले साल 26-27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ कार्यक्रम के साथ शुरू हुआ था।

विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में लाखों किसान एकसाथ

आज के दिन को दिल्ली मोर्चा, राज्य की राजधानियों और जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। विभिन्न ट्रेड यूनियन, छात्र और युवा संगठन, महिला संगठन, नागरिक समाज संगठन और अन्य संगठन राष्ट्र के अन्नदाताओं के समर्थन में एक साथ आए। सिंघू, टिकरी, गाजीपुर और शाहजहाँपुर मोर्चों पर बड़ी सभाएँ आयोजित हिन, जिनमें एसकेएम के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में लाखों किसान आंदोलन के समर्थन में एक साथ आए। कर्नाटक में, किसानों और श्रमिकों ने चक्का जाम आयोजित किया, और बैंगलोर, श्रीरंगपटना, चिकबल्लापुर, बेलगाम, विजयपुरा, भगवाड़ी में राज्य राजमार्गों को जाम किया। चिकबल्लापुर में वाहन रैली का भी आयोजन किया गया। कर्नाटक के मैसूर, कोलार, देवनगेरे में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कर्नाटक के श्रीरंग पट्टनम का दृश्य

पश्चिम बंगाल में, एसकेएम पश्चिम बंगाल ने वाई चैनल, धर्मतल्ला, कोलकाता में एक विशाल सार्वजनिक रैली की, जिसके बाद धर्मतल्ला से सियालदह स्टेशन तक एक विशाल जुलूस निकाला गया। पटना में बुद्ध स्मृति पार्क से समाहरणालय तक किसानों और श्रमिकों का संयुक्त जुलूस निकाला गया, जिसने जिलाधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा। बिहार के सीतामढ़ी, रोहतास, भोजपुर, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, अरवल, नालंदा, शेखपुरा और अन्य जिलों में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

रायपुर में एक विशाल ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ के बस्तर के बीजापुर जिले में आदिवासी किसानों ने सिलगर और गंगालोर में धरने के साथ किसान आंदोलन की वर्षगांठ मनाई। दोनों जगहों पर आदिवासी अडानी और अन्य कॉर्पोरेट का और 16 मई, 2021 को पुलिस फायरिंग में चार आदिवासियों की मौत का विरोध कर रहे हैं। गुंटुरु, विजयनगरम और आंध्र प्रदेश के अन्य स्थानों पर किसानों के द्वारा विरोध प्रदर्शन हुए। तमिलनाडु, झारखंड, तेलंगाना, ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए।

जीत का जश्न, बाकी माँगों के लिए संघर्ष का जज्बा

देश भर के किसानों ने किसान आंदोलन की लंबित मांगों को उठाते हुए तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने की प्रधानमंत्री की घोषणा के रूप में अपनी जीत का जश्न मनाया। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 21 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में, छह मांगें उठाई थीं, सी 2+ 50% फॉर्मूला के आधार पर सभी उत्पादों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, “विद्युत संशोधन विधेयक, 2020/2021” के मसौदे को वापस लेना, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम 2021” में किसानों पर दंडात्मक प्रावधानों को हटाना, आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ झूठे मामलों की वापसी, राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी, किसान आंदोलन के शहीदों के परिवारों को मुआवजा एवं पुनर्वास तथा उनकी स्मृति में सिंघू मोर्चा पर स्मारक निर्माण के लिए भूमि आवंटन।

प्रदर्शनों की झलक-

टिकरी मोर्चा पर पंजाब और हरियाणा के किसानों का बड़े बड़े जत्थे पहुंचे। आंदोलनकारी किसानों में ख़ुशी और राहत का माहौल था।

kisan andolan

सिंघू मोर्चा पर मौजूद किसानों ने भी आंदोलन के एक साल और आंशिक जीत का जश्न मनाया। किसानों का यही कहना था कि उन्होंने अपने सब्र से दिल्ली में बैठी सरकार को फिर से हरा दिया।

ग़ाज़ीपुर मोर्चा पर भी आंदोलन के एक साल पूरे होने पर सैकड़ों की संख्या में किसान जमा हुए। यह किसान विशेष तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरखंड के हैं। ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों ने पंचायत की। 

कर्नाटक

कर्नाटक के किसान संघ और अन्य संबद्ध संगठन ऐतिहासिक किसान आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए संयुक्ता होराता-कर्नाटक के बैनर तले एकजुट हुए। ज्य में प्रमुख राजमार्गों को अवरुद्ध किया।

कर्नाटक के किसान न केवल संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा केंद्र सरकार से की गई मांगों के लिए दबाव डाल रहे थे, बल्कि कर्नाटक सरकार को संशोधित भूमि सुधार अधिनियम, एपीएमसी अधिनियम और कर्नाटक वध रोकथाम व मवेशी संरक्षण अध्यादेश, 2020 जैसे किसान विरोधी अध्यादेशों और कानूनों को निरस्त करने की भी माँग उठाई।

बिहार

किसान आन्दोलन के समर्थक कार्यकर्ताओं का पटना के बुद्ध स्मृति पार्क से विरोध-प्रदर्शन जुलूस निकला जो डाक बंगला चौराहे को पार करते हुए हिन्दी भवन में अवस्थित जिला समाहरणालय कार्यालय के समक्ष पहुंचा। राष्ट्रपति को सम्बोधित स्मार पत्र को पटना के जिलाधिकारी को सौंपा।

हरियाणा

जन संघर्ष मंच हरियाणा और समतामूलक महिला संगठन ने राजधानी दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आन्दोलनरत किसानों की मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया और धरने में शामिल हुए।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन

कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने आंदोलन को अपना समर्थन और एकजुटता दी। अंतर्राष्ट्रीय किसान संगठन ला वाया कैम्पेसिना द्वारा समर्थन पत्र जारी किया गया।

संगठन ने अपने समर्थन पत्र में कहा- “भारत के किसानों ने अपने जुझारूपन से दुनिया को प्रेरित किया है। उन्होंने हमें दिखाया है कि सभी विपरीत परिस्थितियों में भी मजदूर वर्ग और किसान वर्ग का संयुक्त संघर्ष क्या हासिल कर सकता है। पिछले एक साल में, इस विरोध ने श्रमिक संगठनों और अन्य सामाजिक आंदोलनों के साथ गठजोड़ किया और ग्रामीण समाजों के बीच एकजुटता, सांप्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रेरक संदेश जारी किए हैं”।

संयुक्त बयान में ला वाया कैम्पेसिना (LVC), वर्ल्ड एलायंस ऑफ मोबाइल इंडिजिनस पीपल्स (WAMIP), इंटरनेशनल इंडियन ट्रीटी काउंसिल (IITC), इंटरनेशनल नेटवर्क फॉर कम्युनिटी सपोर्टेड एग्रीकल्चर (URGENCI), वर्ल्ड वूमेन मार्च (WWM) सहित वैश्विक सामाजिक आंदोलन जारी किए गए। हैबिटेट इंटरनेशनल कोएलिशन (HIC), FIAN इंटरनेशनल, फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ इंटरनेशनल (FOEI) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एडल्ट रूरल कैथोलिक मूवमेंट्स (FIMARC) भारतीय किसानों को सलाम पेश किया। वैश्विक सामाजिक आंदोलनों ने भी भारतीय किसानों को समर्थन देने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से शांतिपूर्ण एकजुटता के कार्यों को अंजाम दिया है।

विभिन्न देशों में एकजुटता के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ब्रिटेन में आज लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने किसान प्रदर्शन की योजना है। कल उसी स्थान पर “एक साल की रैली और जलूस” की योजना है। कल लेचवर्थ सिटी में “किसान स्लीप आउट” भी आयोजित किया जाएगा।

न्‍यूयॉर्क में कल “एक साल की महा किसान विजय कार रैली” का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह का कार और ट्रक रैली का आयोजन 4 दिसंबर को कैलिफोर्निया में होगा। 5 दिसंबर को, कैलिफोर्निया में “कृषि कानूनों को वापस लेने और बलिदान और प्रतिबद्धता के 1 वर्ष का जश्न” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ब्रिटिश कोलंबिया में आज “दिल्ली चलो से 1 साल का स्लीप आउट” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

किसान आंदोलन को अंतर्राष्ट्रीय समर्थन

किसान आंदोलन को निम्नलिखित संगठनों द्वारा भी समर्थन दिया गया, All Africa Women’s Group (UK);  Architects and Planners for Justice in Palestine (UK); Assembly of the Poor (Thailand); Bakers Food and Allied Workers Union (UK); Campaign for Public Policy on Mineral Resources (Thailand); Chemical Workers Union Alliance of Thailand (Thailand); Community Resource Centre (UK); Community Rights Protection Association of Khao Khuha – opposing limestone mining, Songkhla Province (Thailand); Community Women Human Rights Defenders Collective (Thailand); Decolonise Queen Mary University of London (UK); Empower Foundation (Thailand); Confederación General de Trabajadores del Perú-Callao (Peru); Duay Jai Rak Group – Lahu Indigenous group (Thailand); Ecological and Cultural Study Group (Thailand); English Collective of Prostitutes (UK); Federación Nacional de Trabajadoras y Trabajadores del Hogar Perú (Peru); Federación Nacional de Trabajadores de las Universidades del Perú (Peru); Haiti Action Committee (USA); Global Justice Bloc (UK); Global Women Against Deportations (UK); Global Women’s Strike (Ireland); Global Women’s Strike (USA); Group Rak Wanonniwat District – against potash exploration and drilling, Sakon Nakhon province (Thailand); House of Shango (UK); Huelga Mundial de Mujeres (Peru); International Jewish Anti-Zionist Network (UK); International IJAN; International Wages for Housework Campaign; Khao Lao Yai-Pha Chan Dai Community Forest Conservation Group, Dong Ma Fai (Thailand); Khon Rak Baan Kerd Group – six villages opposing gold mining, Loei Province (Thailand); Lao Hai Ngam Group Refusing Mining, Kalasin Province (Thailand); LILAK – Purple Action for Indigenous Women’s Rights (The Philippines); Khon Rak Baan Kerd Bamnet Narong Conservation Group – opposing potash mines & coal power plants, Chaiyaphum Province (Thailand); Legal Action for Women (UK); London Mexico Solidarity (UK); Malaysians Against Death Penalty & Torture (Malaysia);  Marikana [S. Africa] Solidarity Campaign (UK); members of York University Faculty Association Indigenous Caucus, Toronto (Canada); Milk of Human Kindness – breastfeeding group (UK); Naked Punch (Pakistan); National Family Farm Coalition (USA); National Lawyers Guild – International Committee (USA); National Lawyers Guild – San Francisco Bay Area (USA); National Union of Rail, Maritime & Transport Workers Black Solidarity Committee (UK); Network of Action for Migrants in Malaysia (Malaysia); Núcleo Anticapitalista en Movimiento (Peru); Palestine Institute for Biodiversity and Sustainability (Palestine); Payday men’s network (UK/US); Phulbari Solidarity Campaign (Bangladesh);  Queen Mary University of London Rent Strike (UK); Queer Strike (UK/US); Rak Banhang Group – opposing lignite mining, Lampang Province (Thailand); Rak Lam Kho Hong Group – opposing potash mining, Nakhon Ratchasima Province (Thailand); Rak Nam Sap Kham Pa Lai – opposing sandstone mining, Mukdahan Province (Thailand); Red Square Movement (UK); Sindicato de Trabajadoras y Trabajadores del Hogar de la Provincia de Trujillo (Peru); Single Mothers’ Self-Defence (UK); South Asia Solidarity (UK); RESISTers’ DIALOGUE; South Asian Faculty at York University, Toronto (Canada); Southern Peasant Federation of Thailand (Thailand); Thai Network of People Who Own Mineral Resources (Thailand); US PROStitutes Collective (USA); WinVisible, women with visible and invisible disabilities (UK/US); Women Against Rape (UK); Worker Hub for Change (Malaysia).

26 नवंबर संविधान दिवस भी

26 नवंबर को भारत के संविधान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। आज ही के दिन 1949 में संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को अपनाया गया था। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एक दमनकारी ब्रितानी शासन के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ी, जिसने एक कंपनी के लाभ के लिए भारत, उसके लोगों और उनकी आजीविका को नष्ट करने की कोशिश की थी, भारत को गुलाम बनाया था।

26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को आत्मार्पित किया, जो लाखों लोगों के सभी प्रकार के उत्पीड़न से मुक्ति का एक दस्तावेज भी है। बहत्तर वर्ष बाद फिर से, एक और ऐतिहासिक आंदोलन के साथ भारत एक क्रांति के मोड़ पर खड़ा है, और बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा परिकल्पित सामाजिक लोकतंत्र के लक्ष्य की पूर्ति की ओर अग्रसर है।

संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस विज्ञप्ति के साथ

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