मज़दूर अरुण सैनी की याचिका पर हीरो मोटोकॉर्प हरिद्वार को नैनीताल हाई कोर्ट का नोटिस जारी

कथित बर्खास्तगी के खिलाफ चार वर्षों से संघर्षरत मज़दूर अरुण की याचिका पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 7 दिनों में जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए 1 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है।

हीरो मोटोकॉर्प, सिड़कुल, हरिद्वार (उत्तराखंड) स्थित हीरो मोटोकॉर्प प्रबंधन द्वारा चार साल पूर्व कथित आरोपों में बर्खास्त मज़दूर अरुण सैनी ने उच्च न्यायालय नैनीताल में याचिका लगाई है, जिसपर न्यायालय नें कंपनी प्रबंधन व अन्य के खिलाफ नोटिस जारी किया है।

उच्च न्यायालय की एकल पीठ की ओर से न्यायमूर्ति आरसी खुलबे ने 24 सितंबर को सुनवाई के बाद 7 दिनों में प्रतिवादी को जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए 1 अक्टूबर की अगली तिथि निर्धारित की है।

ज्ञात हो कि हीरो मोटोकॉर्प, सिडकुल हरिद्वार के मज़दूर अरुण कुमार सैनी प्रबंधन के दमन का शिकार बनकर चार वर्षों से कार्य बहाली के लिए संघर्षरत हैं।

आज जारी प्रेस विज्ञप्ति द्वारा अरुण सैनी ने बताया कि 4 साल पहले हीरो मोटोकॉर्प कंपनी ने मज़दूर अरुण सैनी को नियम विरुद्ध तरीके से काम से निकाल दिया था। क्योंकि अरुण सैनी कंपनी में कार्यरत श्रमिकों के साथ होने वाले अन्याय के विरुद्ध कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराता था। इसलिए कंपनी ने अपने दो खास कर्मचारी अमित कुमार व सुमित कुमार के साथ मिलकर एक षड्यंत्र रचा और अरुण सैनी के निवास स्थान ग्राम सलेमपुर राजपूताना रुड़की पहुंच कर एक आपराधिक वारदात को अंजाम दिया। जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना गंगनहर रुड़की में दर्ज हुई।

कहा कि कंपनी प्रभाव में आकर विवेचना अधिकारी ने निष्पक्ष विवेचना नहीं की, जिसके विरुद्ध अरुण सैनी के पिताजी स्वर्गीय श्री चंद्रपाल सैनी ने रुड़की न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तमाम तथ्यों एवं सबूतों को देखकर रुड़की न्यायालय ने पक्षपात पूर्ण की गई विवेचना को निरस्त कर अभियुक्त अमित कुमार व सुमित कुमार को न्यायालय में तलब किया।

श्रमिक अरुण ने बताया कि उनके द्वारा हीरो मोटोकॉर्प कंपनी सिडकुल हरिद्वार एवं अन्य आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड हाई कोर्ट नैनीताल में याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई के पश्चात अन्य आरोपी अमित कुमार आदि सहित सिडकुल हरिद्वार स्थित टू व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है जिससे पीड़ित मज़दूर अरुण सैनी को न्याय मिलने की उम्मीद जाग गई है और अन्य श्रमिकों में भी कानून के प्रति विश्वास मजबूत हुआ हैl उन्होंने कहा कि धन-बल के द्वारा श्रमिकों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।

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