जन विरोधी कृषि कानूनों के विरोध में 27 सितम्बर के भारत बंद को सफल बनाओ! -मासा

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) ने कहा-,मौजूदा किसान आंदोलन की कामयाबी का सीधा अर्थ है शोषण मूलक पूंजीवादी प्रणाली के खिलाफ मजदूर वर्ग की लड़ाई को एक कदम आगे बढ़ाना।

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) ने बयान जारी कर संयुक्त किसान मोर्चा के 27 सितंबर, 2021 के भारत बंद को सक्रिय समर्थन दिया है और देश के समस्त मेहनतकश मज़दूर आबादी से किसान-मज़दूर एकता को मजबूत करने का आह्वान किया है। मासा ने दिल्ली में 19 सितंबर के कन्वेन्शन में भी इसका प्रस्ताव पारित किया था।

मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा जारी बयान-

भाजपा सरकार द्वारा बनाये गए जन विरोधी काले कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के किसान मजबूती से संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने विभिन्न तरीके से आंदोलन को कमजोर और बदनाम करने की कोशिश की और पुलिस व अधिकारियों ने लाठीचार्ज व मुकदमे दर्ज करके दमन किया मगर किसान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख के नाम पर भाजपा-संघ परिवार की विभाजनकारी फासिस्ट राजनीति को विफल किया और जनता की एकता मजबूत की है। वे मजबूती से मोदी सरकार की तानाशाही पूर्ण जनविरोधी नीति के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए आंदोलनकारी किसान बधाई के पात्र हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आंदोलन की अगली कड़ी में 27 सितंबर 2021 को ‘भारत बंद’ का ऐलान किया है। मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) 27 सितम्बर के ‘भारत बंद’ का पुरजोर समर्थन करते हुए किसान, मज़दूर और जनविरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के साथ मजबूत एकजुटता के साथ खड़ा है और भारतीय और विदेशी कॉर्पोरेट पूंजी और फासीवादी ताकतों के नापाक गठजोड़ के हमलों के खिलाफ व्यापक मज़दूर-किसान एकता का आह्वान करता है। MASA भाजपा सरकार द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक 2021 सहित अन्य सभी जनविरोधी नीतियों का कड़ा विरोध करता है और इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग करता है।

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) मानता है कि भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बनाये तीनों कृषि कानून न केवल किसानों को उजाड़ने वाले हैं बल्कि वे मजदूरों के भी खिलाफ हैं। इन कृषि कानूनों के लागू हो जाने से कृषि क्षेत्र पर कारपोरेट का कब्जा हो जाएगा। इन कानूनों में देशी-विदेशी पूंजीपतियों को सरकारी मंडी के बाहर बिना टैक्स व बिना फीस फसलों की खरीद और भंडारण करने की छूट दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी, अनाज भंडार करने वाले एफसीआई जैसे विभाग बंद हो जाएंगे और इससे एक तरफ रोजगार छीना जाएगा और दूसरी तरफ पूंजीपति किसानों से मनमर्जी के दामों पर फसल खरीदेंगें और महंगा बेचेंगे। इससे किसान व आम जन तबाह हो जाएंगे और गरीब जनता के लिए जो खाद्य सुरक्षा है वह भी खत्म हो जाएगी।

अत: मजदूरों को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाई गई मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के खिलाफ संघर्ष करने के साथ साथ जन विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ भी मजबूती से खड़ा होकर विरोध करने की जरूरत है। देशी विदेशी कारपोरेट पूंजी और इनके पक्ष में काम करने वाली भाजपा सरकार के खिलाफ जहां किसान अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं वहीं हम मजदूरों को शोषण मूलक पूंजीवादी प्रणाली व इसके हितों का प्रबंध करने वाली सरकार को उखाड़ फेंकने का संघर्ष तेज करना होगा।

मौजूदा किसान आंदोलन की कामयाबी और 27 सितम्बर के ‘भारत बंद’ के सफल होने का सीधा अर्थ  शोषण मूलक पूंजीवादी प्रणाली के खिलाफ मजदूर वर्ग की लड़ाई को एक कदम आगे बढ़ाना होगा। इसलिए मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) समस्त मजदूर कर्मचारी वर्ग से अपील करता है कि वह काले कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का मजबूती से समर्थन करते हुए 27 सितम्बर के ‘भारत बंद’ को पूरी तरह सफल करने के लिए पुरजोर कोशिश करें और सक्रिय रूप से बढ़चढ़ कर भाग लें।

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