मारुति यूनियन ने दिवंगत साथी जियालाल के परिवार को दिया 20 लाख का आर्थिक सहयोग

अन्यायपूर्ण उम्रक़ैद के बीच दिवंगत साथी के परिवार को यह एक अहम सहयोग है। …उम्र कैद झेलते मारुति मजदूरों के साथ, 421 बर्खास्त मज़दूरों का संघर्ष कानूनी लड़ाई के साथ आज भी जारी है।

गुड़गाँव। मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन, मानेसर, द्वारा अन्यायपूर्ण सजायाफ्ता दिवंगत साथी जियालाल के परिवार को सहायतार्थ आज 22 सितंबर को यूनियन पॉलिसी के तहत जुटाए गए कुल 20,37,601 रुपये दिए गए। यह राशि 7 लाख यूनियन फंड से व इसके अतिरिक्त मारुति मनेसर के सभी मजदूरों के स्वेच्छा सहयोग से जुटाई गई थी।

ज्ञात होगा की, अन्यायपूर्ण उम्र कैद व कैंसर से जूझते जूझते 4 जून 2021 को संघर्षशील मारुति मज़दूर, साथी जियालाल का देहांत हो गया था। क़ैद झेलते 13 साथियों में अबतक दो साथियों की असमय दुखद निधन हो चुका है।

मारुति सुजुकी मानेसर प्लांट में 18 जुलाई 2012 को हुई साजिशपूर्ण घटना के बाद से जेल की कालकोठरी में कैद और अन्यायपूर्ण सजा झेलते 13 मज़दूर साथियों में से जियालाल भी एक थे। इनको दलित मज़दूर होने के कारण भी कंपनी प्रबंधन और बाद में पुलिस कस्टडी में टॉर्चर व अतिरिक्त प्रतारणा झेलनी पड़ी।

2500 मज़दूर परिवारों जैसे जियालाल के परिवार को भी काम चलें जाने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। और जेल में उमर कैद की वजह से परिवार को काफी यातनाएं झेलनी पड़ी। जियालाल का जेल के अंदर ही कैंसर हुआ था, और राज्य द्वारा उसका इलाज़ ठीक से न करने के कारण, लास्ट स्टेज में पता चला, और 4 जून को वो कैंसर बीमारी के शिकार हुए।

सजा व बेकारी व यातनाएँ झेलते मजदूरों का कसूर बस इतना था कि – कंपनी के मज़दूर विरोधी रवैये के खिलाफ आवाज़ उठाया, ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ और मज़दूर यूनियन व ताकत को आगे बढ़ने का संघर्ष किया।

इसी संघर्ष से निकली यूनियन ने पहले सहकर्मी जियालाल के इलाज़ में और अभी परिवार को आर्थिक मदद करने का अच्छा कदम उठाया हैं। कुल सहायता राशि 2037601 रुपये आज कार्यकारिणी ने जियालाल जी की माता जी, धर्मपत्नी को उनके भाई व परिवार के समक्ष सौंप दी।

यूनियन ने कहा कि “साथियों जैसाकि आप सभी को ज्ञात है की अपने जेल में बंद 13 साथियों में से कुछ दिन पहले श्री जियालाल जी का कैंसररूपी गम्भीर बीमारी के कारण निधन हो गया था। जो साथी जेल में बंद हैं, उनके अभूतपूर्व योगदान को व उनके द्वारा दिए गए बलिदान को हम और आप कभी भी नहीं भूल पाएंगे और ना ही कभी उनका यह कर्ज चुकता कर पाएंगे।”

यूनियन नेताओं ने कहा कि “हमें पता है कि यह मदद उनके द्वारा दिए गए बलिदान का कर्ज कभी नहीं चुका सकती और ना ही उनके परिवार का जीवन भर भरण पोषण कर सकती है, परंतु फिर भी हम आशा करते हैं कि यह छोटी सी मदद उनके परिवार के जीवनयापन में दोबारा से सुचारू रूप से जीवन व्यतीत करने के लिए थोड़ा सहारा देगी।”

उम्र कैद झेलते मारुति सुज़ुकी वर्कर्स यूनियन के मजदूर नेताओं के साथ, 421+ बर्खास्त मजदूरों का मुद्दा आज भी जीवित है, और कानूनी प्रक्रिया चल रही हैं। और मारुति सुजुकी प्रबंधन जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनी और हरियाणा व केंद्र सरकार के सामने मज़दूर आंदोलन की तरफ़ से तीखा सवाल बनकर मौजूद हैं।

उल्लेखनीय है कि मज़दूर संघर्ष के लंबे दौर, तमाम साथियों की कुर्बानियों, जेल, बर्खास्तगी के बाद आज कंपनी में कार्यरत मजदूरों की स्थिति पहले से बेहतर हो पायी है। लेकिन बर्खास्त साथियों की स्थिति अभी भी बेहद संकटपूर्ण है, जिनके लिए भी यूनियन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

बहरहाल, मारुति मज़दूर इस आंदोलन की ताकत पर खडा होकर एक दूसरे का सहयोग कर रहे है, जो उमीद हैं की आगे बढ़ेग, मारुति के सभी पीड़ित मजदूरों को भी न्याय मिलेगा।

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