करनाल में उमड़ा किसानों का सैलाब, नाकेबन्दियाँ तोड़ मिनी सचिवालय पर डाला डेरा

एसडीएम पर कार्रवाई आदि माँगों को लेकर करनाल में भारी नाकेबंदी के बावजूद महापंचायत हुई, इस बीच प्रशासन से वार्ता बेनतीजा रही, तब किसानों ने मिनी सचिवालय को घेरने का निर्णय लिया।

जब तक माँगे नहीं मानी जाती, सचिवालय का घेराव जारी रखेंगे -एसकेएम

हरियाणा के करनाल में किसानों ने जिला प्रशासन से बातचीत विफल होने के बाद जिला सचिवालय के बाहर डेरा डाल लिया है। रात साढ़े 10 बजे तक किसानों ने सचिवालय के गेट के बाहर सड़क पर सोने के लिए दरियां बिछा लीं। उधर गुरुद्वारों से आंदोलनकारियों के लिए लंगर की व्यवस्था हुई।

दिन में प्रशासन से तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही जिसके बाद किसानों ने अनाज मंडी से मिनी सचिवालय को घेरने का निर्णय लिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ़ किया कि जब तक उनकी माँगे नहीं मानी जाती, वे सचिवालय का घेराव जारी रखेंगे।

इससे पहले किसानों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालांकि इसके बाद भी किसान सचिवालय के सामने ही जमा हो गए। किसान नेताओं ने सचिवालय के बाहर ही मोर्चा लगाने का फैसला किया।

धरने पर राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, योगेंद्र यादव, गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत तमाम नेता मौजूद हैं। करनाल के दो गुरुद्वारों निर्मल कुटिया और डेरा कारसेवा की ओर से प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस जवानों को लंगर पहुंचाया गया। दोनों गुरुद्वारों से लगभग 20 हजार लोगों को लंगर बांटा गया।

किसानों के आसपास तैनात पुलिसवालों और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों ने सड़क से लगे डिवाइडर पर खुद के आराम करने के लिए मैट वगैरह बिछा लिए हैं।

एसडीएम द्वारा सिर फोड़ने के फरमान के विरोध में महापंचायत

28 अगस्त को करनाल में एसडीएम द्वारा सिर फोड़ने के फरमान, लाठीचार्ज व एक किसान की मौत के विरोध में किसानों ने अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन किया। हजारों की संख्या में किसान महापंचायत में जुटे तो वहीं प्रशासनिक अमला भी बड़ी संख्या में तैनात रहा।

प्रशासन के अड़ियलपन से तीन दौर की वार्ता विफल

तमाम बाधाओं के बावजूद पंचायत में किसानों की भारी उपस्थिति के बाद प्रशासन ने नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। लघु सचिवालय (जिला मुख्यालय) में दो घंटे तक किसान नेताओं और प्रशासनिक अफसरों के बीच तीन दौर की बातचीत चली लेकिन बेनतीजा रही।

किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव

लघु सचिवालय कूच करने और घेराव का एलान

वार्ता विफल होने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, डॉ. दर्शनपाल सिंह, जोगेंद्र सिंह उगराहां, बलबीर सिंह राजेवाल समेत अन्य किसान नेता नई अनाज मंडी में चल रही किसान महापंचायत में पहुंचे और वहां हजारों की संख्या में मौजूद किसानों के समक्ष वार्ता के विफल होने की जानकारी दी।

इसके बाद किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने मंच से ही लघु सचिवालय कूच करने और घेराव का एलान कर दिया। उधर, प्रशासन ने भी किसानों को रोकने के लिए अर्धसैनिक बल की 40 कंपनियों तैनात की हुई थी। मगर किसानों ने अपना शांतिपूर्वक मार्च शुरू किया और सचिवालय की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। 

पुलिसिया नाकेबंदी तोड़कर किसानों का जत्था पहुँचा सचिवालय

विभिन्न चौराहों पर लगाए गए पुलिस नाकों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया गया। मगर किसानों का काफिला तमाम नाके पार कर निर्मल कुटिया चौराहे से करनाल शहर में दाखिल हो गया और लघु सचिवालय चौराहे पर पहुंच गया।

नमस्ते चौक पर लगे चौथे नाके पर प्रशासन ने 40 रोडवेज बसें बुला लीं। किसान गिरफ्तारी के लिए तैयार हो गए। वहीं, आधे से ज्यादा किसान फ्लाईओवर से होकर नमस्ते चौक से आगे निकल गए।

करनाल के DC और SP किसानों को हिरासत में लेने के बाद उनसे भरी बसों को बाहर भेजने के आदेश दे रहे थे। उसी दौरान किसान सड़क के बीच बैठ गए। हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई।

उधर पुलिस ने किसानों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की बौछारें भी किसानों को रोक नहीं पाई और किसान लघु सचिवालय का नाका भी पार करते हुए लघु सचिवालय के मुख्य गेट तक पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारी किसानों पर पानी की बौछार

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार और प्रशासन ने उनकी बात नहीं। इसलिए किसानों ने अब लघु सचिवालय को घेर लिया है, इस पर अब किसानों का कब्जा हो गया है। हमें कोई जल्दी नहीं है, पहले हम आराप करेंगे, सरकार जब चाहे तब हमसे बात कर सकती है, मगर हम अपनी मांगे मनवाएं बिना यहां से नहीं जाएंगे। रात तक किसान लघु सचिवालय के समक्ष डटे रहे।

किसानों की मुख्य माँगें और अल्टिमेटम

किसानों का सर फोड़ने का आदेश देने वाले तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्जकर बर्खास्त करने और लाठीचार्ज में शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई के साथ ही रायपुर जटान गांव के मृतक किसान सुशील काजल के आश्रितों को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी व घायल किसानों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की किसानों ने माँग की।

करनाल में किसानों के मार्च में शामिल भाकियू नेता राकेश टिकैत।

इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने 6 सितंबर तक का सरकार को समय दिया था। सरकार की हठधर्मिता और एसडीएम को पदोन्नति के बाद किसानों ने एसकेएम के आह्वान पर इस महापंचायत का आह्वान किया। सरकार ने जबरदस्त नाकेबंदी की, निकटवर्ती 5 जिलों में इंटरनेट बंद किया, लेकिन किसानों के हौसले के सामने सब ध्वस्त हो गया।

सभी फ़ोटो मीडिया और सोशल मीडिया से साभार

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