महँगाई सरकारों की जनविरोधी नीतियों और पूँजीपतियों की मुनाफ़े की अंतहीन भूख की देन है

कमरतोड़ महँगाई के ख़िलाफ़ लुधियाना में रोष प्रदर्शन

वैश्वीकरण, उदारीकरण, निजीकरण की सरकारों द्वारा लगातार तेज़ी से लागू की जा रही नीतियों से पूँजीपतियों को फायदा हुआ है और जनता का कचूमर निकला है।

लुधियाना (पंजाब)। आज (4 अगस्त) लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर दफ़तर पर मज़दूर नौजवान संगठनों द्वारा रोष प्रदर्शन करके केंद्र और पंजाब सरकार से भारी महँगाई को लगाम कसने की माँग की गई। करीब 200 लोगों के नए राशन कार्ड बनाने के लिए अर्जियाँ भी सौंपी गईं। रोष प्रदर्शन को कारख़ाना मज़दूर यूनियन, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, और नौजवान भारत सभा द्वारा संयुक्त तौर पर किया गया।

संगठनों द्वारा डीसी लुधियाना के जरिए केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की कैप्टन सरकार को भेजे गए माँग पत्र में माँग की गई कि सरकार द्वारा सभी गरीबों को खाने-पीने की सभी चीजें सस्ती मुहैया करवाई जाएँ। सभी ग़रीबों के राशन कार्ड बनाए जाएँ। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस की क़ीमतें तुरंत कम की जाएँ। रेल, बस किराये, बिजली बिल दरें कम की जाएँ। सारी मेहनतकश जनता को सरकारी तौर पर मुफ़्त और पुख्ता स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुवाधाएँ दी जाएँ। मज़दूरों के वेतन, दिहाड़ी, पीस रेट बढ़ाए जाएँ। सभी बेरोज़गारों को रोज़गार मिले। रोज़गार न मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता मिले।

सभी वक्ताओं ने लोगों को महँगाई की मार से बचने के लिए सरकारों और पूँजीपति वर्ग के ख़िलाफ़ एकजुट होकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।

रोष प्रदर्शन को कारखाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविंदर, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविंदर, नौजवान भारत सभा की नेत्री बिन्नी और नवजोत, लोक एकता संगठन के अध्यक्ष गल्लर चौहान ने रोष प्रदर्शन को संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि मेहनतकश जनता पर महँगाई की मार कितनी तीखी है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस महँगाई के चलते खाते-पीते मध्य वर्ग तक की आह निकल गई है। इस महँगाई का कारण साफ़ तौर पर केंद्र और राज्य सरकारों की देशी-विदेशी पूँजीपतियों के पक्ष में लागू की जा रही घोर जनविरोधी नीतियाँ हैं और पूँजीपति वर्ग की मुनाफ़े की अंतहीन भूख है।

वैश्वीकरण, उदारीकरण, निजीकरण की सरकारों द्वारा लगातार तेज़ी से लागू की जा रही नीतियों से पूँजीपतियों को फायदा हुआ है और जनता का कचूमर निकला है। जनता पर भारी टैक्सों का बोझ लादा गया है जबकि जरूरत देशी-विदेशी पूँजीपतियों पर भारी टैक्स लगाने की है। कृषि कानून भी पूँजीपति वर्ग द्वारा मेहनतकशों के ख़िलाफ़ जारी आर्थिक हमले के तहत ही लाए गए हैं जो और अधिक महँगाई का कारण बनेंगे।

वक्ताओं ने कहा कि सरकारी खज़ाने में से लोगों को मिलने वाली सहूलतों, सब्सिडियों पर लगातार भारी कटौती की जा रही है। दूसरी तरफ पूँजीपतियों को आर्थिक पैकेज, ओद्योगिक और कृषि क्षेत्र के पूँजीपति वर्ग को सस्ती और मुफ्त बिजली, कर्ज माफ़ी, कौड़ियों के दाम सरकारी संस्थान, जमीनें और अन्य बड़े लाभ पहुँचाए जा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि अगर पूँजीपति वर्ग को सरकारी खज़ाने में से खुली छूट देना बंद हो और उन पर भारी टैक्स लगाए जाएँ, मेहनतकश जनता पर लगाए जाने वाले सभी टैक्स रद्द किए जाएँ, सरकार द्वारा जनता की सारी बुनियादी जरूरतें पूरी की जाएँ तो जनता को महँगाई की मार से बचाया जा सकता है।

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