किसान संसद चौथा दिन : आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 निरस्त करो!

पंजाब में सैकड़ों मोर्चों ने लगातार विरोध प्रदर्शन के 300 दिन पूरे किए

किसान संसद के चौथे दिन आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 पर बहस हुई। 1955 अधिनियम में लाए गए संशोधन स्पष्ट रूप से किसान-विरोधी और उपभोक्ता-विरोधी हैं जिसका उद्देश्य खाद्य आपूर्ति को बड़े कॉरपोरेट और व्यापारियों के नियंत्रण में देना है, और इसे निरस्त करने की आवश्यकता है। एसकेएम ने कल रात टिकरी सीमा पर किसान मोर्चे पर हमले की निंदा की।

उलरखनिय है कि संसद में जारी मॉनसून सत्र के साथ- ‘किसान संसद’ की शुरुआत 22 जुलाई से हुई है जो 13 अगस्त को संसद के मानसून सत्र तक चलेगी। इस बीच 26 जुलाई को महिला किसान संसद हुआ और पुनः 9 अगस्त को भी महिलाओं के हाथों में किसान संसद की कमान होगी।

जनविरोधी है आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम

मंगलवार को जंतर-मंतर पर ऐतिहासिक किसान संसद का चौथा दिन था। इस संसद ने सोमवार को महिला किसान संसद द्वारा शुरू की गई चर्चा को जारी रखते हुए आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 पर बहस की। किसान संसद ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति अस्वीकार्य रूप से ख़राब है और लगातार बिगड़ रही है।

उन्होंने इस बात को संज्ञान में लिया कि पिछले साल 1955 के अधिनियम में लाए गए संशोधनों ने खाद्य सामग्री के जमाखोरी और कालाबाजारी को कानूनी मंजूरी प्रदान की है, और यह आम उपभोक्ताओं और किसानों की कीमत पर कृषि व्यवसाय कंपनियों और बड़े व्यापारियों के फायदे के लिए बनाया गया है। किसान संसद ने आगे कहा कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के डिरेगुलशन (अविनियमन) से बड़े कॉर्पोरेट और वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण और व्यापर कंपनियों का वर्चस्व बढ़ेगा।

जैसा कि महिला किसान संसद ने कल भी जोर दिया था, किसान संसद ने सभी के लिए सस्ती कीमतों पर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से संज्ञान लिया, जबकि अधिनियम में संशोधन सरकार को केवल “असाधारण मूल्य वृद्धि” के मामले में भण्डारण सीमा लागू करने की अनुमति देता है। इससे भी बदतर, सरकार के विनियमन की सीमित शक्तियों में भी प्रदान किए गए अपवादों के कारण, कई संस्थाओं को आपात स्थिति के मामले में भी भण्डारण सीमाओं का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।

किसान संसद ने संकल्प लिया कि आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 को संसद द्वारा निरस्त किया जाना चाहिए। आज की किसान संसद में साठ वक्ता थे – आज की बहस में भाग लेने वाले सदस्यों में से एक बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री बीजी कोलसे पाटिल थें।

मिशन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की योजना प्रेस विज्ञप्ति के अनुरूप

एसकेएम ने स्पष्ट किया कि मिशन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की योजना कल जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार होगी। लखनऊ तक मार्च करना या शहर की घेराबंदी करना एसकेएम का एजेंडा नहीं है, और ऐसी कोई कार्रवाई एसकेएम के मिशन यूपी का हिस्सा नहीं है। श्री राकेश टिकैत ने इस बारे में कल शाम को स्वयं स्पष्ट किया, कि उनके कुछ बयान उनके व्यक्तिगत विचार थे, न कि एसकेएम के योजनाओं का हिस्सा। एसकेएम ने मीडिया से अनुरोध किया कि 26 जुलाई की लखनऊ प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार एसकेएम की मिशन यूपी और उत्तराखंड योजनाओं को कवर करें।

विरोध प्रदर्शनों के 300 दिन, भाजपा नेताओं का विरोध जारी

पंजाब के विभिन्न स्थानों पर दर्जनों स्थायी मोर्चों ने लगातार विरोध प्रदर्शन के 300 दिन पूरे किये।

पंजाब के होशियारपुर के मुकेरियां में बड़ी संख्या में किसानों ने भाजपा के एक कार्यक्रम का काले झंडों के साथ विरोध किया। एक मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा और केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश जैसे बीजेपी नेताओं को हिस्सा लेना था।  इसकी सूचना मिलते ही विभिन्न संगठनों के किसान तुरंत काले झंडे का विरोध करने के लिए एकत्र हो गए और शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध प्रदर्शित किया।

किसान शिविरों पर हमला और मीडिया का दुष्प्रचार निंदनीय

एसकेएम ने कल रात टिकरी बॉर्डर में किसानों के शिविर पर कुछ बदमाशों द्वारा किए गए हमले, जिसमें एक युवक गुरविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, की निंदा की। हमलावरों का संभावित निशाना किसान नेता रुलदू सिंह मनसा थे जो उस कैंप में रहता थे। मांग है कि पुलिस हत्या की मंशा व प्रयास का मामला दर्ज कर हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार करे।

एसकेएम एक किसान नेता हरिंदर लखोवाल को एक किसान विरोधी मीडिया हाउस द्वारा खालिस्तानी समर्थक के रूप में अपमानजनक और पूरी तरह से आपत्तिजनक चित्रण की भी निंदा करता है।

किसान विरोधी फैसलों की निंदा

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के नाम पर किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार के कई दावों के विपरीत, अमेरिका के अलावा अन्य देशों से आयात किए गए मसूर/दाल पर आयात शुल्क को 10% से घटाकर 0% कर दिया गया है, और संयुक्त राज्य अमेरिका से आयात के लिए 30% से 20% कर दिया गया है। इसके अलावा, कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC) जिसका उद्देश्य कृषि-बुनियादी ढांचे को विकसित करना है, को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। एसकेएम ने सरकार के इन किसान-विरोधी फैसलों की निंदा की।

केन्द्रीय कृषि मंत्री का बयान निरर्थक

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसान संसद को ‘निरर्थक’ बताकर उसका उपहास किया था। उनके और भारत सरकार का रवैया कि किसानों का विश्लेषण और स्पष्टीकरण “निरर्थक” है, के कारण ही किसान आंदोलन ने राजमार्गों पर 8 महीने से अधिक समय बिता दिया है, और 540 से अधिक साथियों को खोया है। मंत्री जी ने आज विपक्षी सांसदों से यह भी कहा कि अगर उन्हें किसानों की चिंता है तो उन्हें सदन को चलने देना चाहिए।

मंत्री जी ने इस बात को नज़रअंदाज़ करना चाहा कि विपक्षी सांसद ठीक वही कर रहे हैं जो किसानों ने उन्हें “पीपुल्स व्हिप” के माध्यम से करने के लिए कहा है। जब आम नागरिकों द्वारा जीवन और मृत्यु का संघर्ष लड़ा जा रहा हो, वह भी जो खुद मोदी सरकार द्वारा थोपी गया हो, तब सरकार “हमेशा की तरह व्यवसाय” की उम्मीद नहीं कर सकती है।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (243वां दिन, 27 जुलाई 2021)

जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव।

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