बैंक निजीकरण के बाद अब बीमा निजीकरण बिल लाने को तैयार है मोदी सरकार

ड्रॉफ्ट बिल को यूनियन कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है

पिछले कुछ समय से बैंक प्राइवेटाइजेशन को लेकर लगातार खबरें आ रही हैं. अब ताजा खबर Insurance Privatisation को लेकर है. माना जा रहा है कि जारी मॉनसून सत्र में सरकार इंश्योरेंस लॉ अमेंडमेंट को पेश कर सकती है. इसके जरिए इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का रास्ता साफ होगा. सरकारी इस सेक्टर में केवल रणनीतिक रूप से बने रहना चाहती है.

वित्त मंत्री ने 1 फरवरी को बजट पेश करते हुए दो बैंकों और एक सरकारी इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का ऐलान किया था. इंश्योरेंस कंपनी का भी निजीकरण चालू वित्त वर्ष में ही किया जाएगा. सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश और निजीकरण का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए का रखा है. सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंश्योरेंस लॉ अमेंडमेंट के जरिए इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का रास्ता साफ होगा. सदन में अमेंडमेंट में पेश करने से पहले इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा, जहां इंटर मिनिस्ट्रियल डिस्कशन होगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सदन में पेश करने से पहले इंश्योरेंस लॉ में बदलाव को लेकर ड्रॉफ्ट बिल को यूनियन कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है. सरकार उस नियम में बदलाव करना चाहती है जिसके तहत सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं की जा सकती है. सूत्रों के मुताबिक फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टर्स कंपनी में 74 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीद सकते हैं, जबकि मैनेजमेंट और कंट्रोल भारत सरकार के पास ही रहेगा. सूत्रों ने उस खबर को भी नकारा है जिसमें कहा जा रहा है कि सरकार न्यू इंडिया एश्योरेंस या जनरल इंश्योरेंस कंपनी को बेचना चाहती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण अगले वित्त वर्ष (2022-23) में ही संभव हो पाएगा. जनरल इंश्योरेंस और न्यू इंडिया एश्योरेंस के निजीकरण की संभावना को नकारा जा रहा है. निजीकरण का चयन नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में किसी एक का किया जाएगा. माना जा रहा है कि संसद से एक्ट में बदलाव की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी के नाम को लेकर फैसला किया जाएगा. नाम का सुझाव सेक्रेट्रिएट और मिनिस्ट्रियल पैनल की तरफ से दिया जाएगा और उस नाम पर कैबिनेट को आखिरी फैसला लेना है.

जुलाई के पहले सप्ताह में रिपोर्ट आई थी कि सरकार इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण को लेकर जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन एक्ट (GIBNA) में बदलाव की तैयारी कर रही है. इस एक्ट को 1972 में लागू किया गया था. बता दें कि निजीकरण को लेकर दो सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस कंपनी के चयन की जिम्मेदारी नीति आयोग को सौंपी गई है. सूत्रों के मुताबिक, नीति आयोग यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस (United India Insurance) के बारे में विचार कर रहा है. दो सरकारी बैंकों में इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडया का नाम आ रहा है.

पिछले साल मोदी कैबिनेट ने देश की तीन सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैपिटल सपॉर्ट का ऐलान किया था. कैबिनेट बैठक में नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को कैपिटल सपॉर्ट दिया गया था. इसके अलावा इन तीन इंश्योरेंस कंपनियों के लिए ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को भी बढ़ाने का फैसला किया था. नेशनल इंश्योरेंस कंपनी का ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल बढ़ाकर 7500 करोड़ कर दिया गया है. इसके अलावा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस का 5000-5000 करोड़ कर दिया गया है. बजट 2020 में सरकार ने तीनों इंश्योरेंस कंपनियों के मर्जर का भी ऐलान किया था. कैबिनेट ने इस फैसले को भी बदल दिया था.

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: