किसान आंदोलन : गाजीपुर बार्डर पर परिचर्चा आयोजित

देश में फासीवादी मंसूबे साफ झलक रहे हैं

24 जुलाई को गाजीपुर बॉर्डर स्थित इंकलाबी मज़दूर केंद्र के कैंप में “वर्तमान किसान आंदोलन की चुनौतियां एवं आगे की दिशा” विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन हुआ। परिचर्चा में विभिन्न किसान- मज़दूर एवं युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहन विचार विमर्श किया।

परिचर्चा में किसान आंदोलन के पूंजीवादी और फासीवाद विरोधी व्यापक जन आंदोलन के रुप विकसित होने में मज़दूर वर्ग की निर्णायक भूमिका को सभी ने रेखांकित किया। साथ ही वक्ताओं ने इसे प्रमुख रुप से संज्ञान में लिया कि फासीवादी मोदी सरकार अपने विघटनकारी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को, जिसे कि किसान आंदोलन ने वक्ती तौर पर एक हद तक पीछे धकेल दिया था, को पुन: परवान चढ़ा रही है।

हरियाणा के गांवों में की जा रही धर्म रक्षा पंचायतें एवं लव जिहाद के मुद्दे को उछालने की कोशिशें हों या फिर  जनसंख्या नियंत्रण कानून का मामला उछालकर समाज के चर्चा- विमर्श को बदलने के प्रयास एवं उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनज़र की जा रही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें जो कि कभी भी सांप्रदायिक दंगों का रुप भी ले सकती हैं.. .इत्यादि फ़ासीवादियों के खतरनाक मंसूबों को ही दिखा रही हैं।

किसान आंदोलन को इस फासीवादी एजेंडे को आगे बढ़ने से रोकने हेतु गंभीर विचारधारात्मक संघर्ष के साथ स्वयं को अधिक व्यापक बनाना होगा। मुसलमानों, दलितों, महिलाओं, छात्रों सभी को अपने आंदोलन के दायरे में समेटना होगा। 

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