सत्यम ऑटो के मज़दूरों, महिलाओं, बच्चों की गिरफ़्तारी, दमन के विरोध में प्रदर्शन

विरोध में हरिद्वार प्रशासन व उत्तराखंड सरकार का पुतला दहन

हरिद्वार (उत्तराखंड)। सत्यम ऑटो कम्पनी के कार्यबहाली के लिए पिछले कई दिनों से धरनारत व संघर्षरत मजदूरों व महिलाओं-बच्चों को हरिद्वार पुलिस भारी पुलिस फोर्स के साथ धरनास्थल से जबरिया उठा ले गयी। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा ने इसके विरोध में हरिद्वार प्रशासन व उत्तराखंड सरकार का पुतला दहन किया।

आज 22 जुलाई की सुबह 5 बजे सत्यम ऑटो कंपोनेंट हरिद्वार में संघर्षरत मजदूरों को जिला प्रशासन की मौजूदगी में पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण तरीके से उठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया। महिलाओं और बच्चों के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की गई और जबरन बसों में ठूँसा गया।

सत्यम के मजदूरों को पुलिस लाइन में जहां पर रखा गया है वहां पर भी पुलिस द्वारा जबरदस्ती मजदूरों, महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट कर डरा धमका कर बांड भरवाय जा रहा है। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार शासन-प्रशासन द्वारा मजदूर विरोधी इस दंडात्मक कार्यवाही की घोर निन्दा की है।

सत्यम ऑटो कॉम्पोनेंट्स के मजदूरों के समर्थन में भेल मजदूर ट्रेड यूनियन से अवधेश, राजकिशोर, नीशु, सत्यवीर, बृजराज, अरविंद, रविन्द्र इंकलाबी मजदूर केंद्र से पंकज, हरीश, संतोष, नित्यानंद, राजू, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से निशा, रंजना फूड्स श्रमिक यूनियन (आईटीसी) से गोविंद, देवेन्द्र यूथ कांग्रेस से वरूण वालियान कर्मचारियों कल्याण यूनियन (ITC) से फरविंदर एवं सत्यम ऑटो कॉम्पोनेंट्स कार्यकर्ता ने प्रदर्शन में शामिल रहे।

संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन  मोर्चा हरिद्वार सभी मजदूर यूनियनों एवं न्याय न्याय पसंद मजदूर मेहनतकशों एवं सामाजिक संगठनों से आह्वान किया है कि सत्यम ऑटो के मजदूरों के पुलिस द्वारा दमन के विरोध मे मुख्यमंत्री को ज्ञापन एवं विरोध प्रदर्शन करें।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल माह में डीएम हरिद्वार की मध्यस्थता में करीब एक माह पूर्व हुई वार्ता में यह सहमति बनी थी और मौखिक समझौता हुआ था कि मजदूर कंपनी गेट छोड़ दें और 2 दिनों के भीतर सभी मजदूरों की कार्यबहाली कर दी जायेगी। डीएम व एएलसी की बातों पर भरोसा कर मजदूरों ने कंपनी गेट छोड़ दिया था।

परन्तु बाद में कंपनी प्रबन्धक उक्त समझौते से मुकर गया और मजदूरों की कार्यबहाली नहीं की गई और डीएम व एएलसी भी अपनी जुबान व आश्वासन से मुकर गये। कंपनी प्रबंधन को उक्त समझौते के तहत मजदूरों की कार्यबहाली करने को बाध्य करने के स्थान पर जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, सरकार सभी कंपनी मालिक के गुलाम बन गए हैं और पीड़ित लाचार मजदूरों व उनके बच्चों का दमन कर अपनी बहादुरी का ‘शानदार ‘ प्रदर्शन कर रहे हैं।

दरअसल हीरो की वेंडर सत्यम ऑटो के 300 मज़दूर गैर कानूनी तरीके से कंपनी से बाहर कर दी गए थे। मज़दूर लगातार 4 वर्षों से अपनी कार्यबहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सत्यम के निष्कासित श्रमिकों ने परिवार सहित इंदिरा अम्मा भोजनालय डीएम कार्यालय के सामने लगातार धरने के बाद 8 जुलाई फैक्ट्री गेट को दोबारा धरना शुरू किया। पुलिस ने मजदूरों को चारों ओर से घेर लिया था और किसी भी अन्य समर्थकों को उनके पास जाने नहीं दे रहा था।

और आज सुबह उसने एक और दमन का सहारा लेकर मजदूरों, महिलाओं, यहाँ तक कि बच्चों को भी जबरिया उठा लिया।

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