मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल से 1 साल में रिकॉर्ड 3.35 लाख करोड़ रुपए कमाए

कच्चे तेल की कीमत गिरी, सरकार ने टैक्स लगाकर बढ़ाया

पिछले साल जब कोरोना महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई थी तब मोदी सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाकर 32.90 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 31.8 रुपए प्रति लीटर कर दिया था। जबकि पेट्रोल की कीमत 76 बार और डीजल की कीमत 73 बार बढ़ाई गई थी।

महंगे पेट्रोल-डीजल की मार से एक तरफ आम आदमी त्रस्त है तो दूसरी तरफ इससे सरकार की जेब भर रही है। सरकार ने लोकसभा में कहा है कि 31 मार्च 2021 को समाप्त हुए पिछले वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी से 3.35 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई है। यह अब तक का रिकॉर्ड है।

पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि सरकार ने पिछले साल पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ा दिया था। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 19.98 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 32.90 रुपए प्रति लीटर किया गया था। जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को 15.83 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 31.8 रुपए रुपए प्रति लीटर किया गया था। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई थी जब कोरोना महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई थी।

2019-20 के मुकाबले करीब दोगुना कलेक्शन: राज्यमंत्री ने कहा कि इस बढ़ोतरी के कारण अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के दौरान पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन 3.35 लाख करोड़ रुपए रहा। यह वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले करीब दोगुना कलेक्शन है। 2019-20 में पेट्रोल-डीजल से एक्साइज कलेक्शन 1.78 लाख करोड़ रुपए रहा था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि लॉकडाउन के कारण तेल की बिक्री में कमी ना होती तो यह कलेक्शन और ज्यादा हो सकता था। लॉकडाउन के कारण पूरे देश में आर्थिक गतिविधियां और परिवहन में कमी दर्ज की गई थी। वित्त वर्ष 2018-19 में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज कलेक्शन 2.13 लाख करोड़ रुपए रहा था।

बीते तीन महीनों में 94,181 करोड़ रुपए का कलेक्शन: एक अन्य सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों यानी अप्रैल से जून 2021 के दौरान एक्साइज कलेक्शन 94,181 करोड़ रुपए रहा है। हालांकि, इसमें पेट्रोल-डीजल के अलावा एटीएफ, नेचुरल गैस और क्रूड ऑयल पर लगाया जाने वाला एक्साइज भी शामिल है। वित्त वर्ष 2020-21 में कुल एक्साइज कलेक्शन 3.89 लाख करोड़ रुपए रहा है। तेली ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब बाजार पर निर्भर हैं और तेल विपणन कंपनियां इन्हें तय करती हैं।

कई राज्यों में 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंचे पेट्रोल-डीजल: पिछले साल जब पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाया गया था तो इसका असर खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ा था। इसका कारण यह था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिल रहे सस्ते क्रूड ऑयल से बढ़ोतरी को समाहित कर लिया गया था। लेकिन मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। अब इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। देश के आधे से ज्यादा राज्यों में पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है। जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा में डीजल भी 100 रुपए प्रति लीटर के पार मिल रहा है। तेली ने कहा कि भाड़ा किराया और स्थानीय वैट के कारण राज्यों में कीमतें अलग-अलग हैं।

चालू वित्त वर्ष में अब तक 39 बार महंगा हुआ पेट्रोल: तेली ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर होलसेल प्राइस इंडेक्स पर भी दिख रहा है। इस इंडेक्स में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का वेटेज क्रमश: 1.60%, 3.10% और 0.64% है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष यानी 2021-22 में अब तक पेट्रोल की कीमत में 39 बार और डीजल की कीमत में 36 बार बढ़ोतरी हुई है। जब पेट्रोल की कीमत में 1 बार और डीजल की कीमत में सिर्फ 2 बार कटौती हुई है। पिछले वित्त वर्ष में पेट्रोल की कीमतें 76 बार बढ़ी थीं और 10 बार घटी थीं। वहीं डीजल की कीमतें 73 बार बढ़ी थीं और 24 बार घटी थीं।

जनसत्ता से साभार

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