पत्रकारों, एक्टिविस्टों के फोन की जासूसी करवा रही है मोदी सरकार

इजराइल के जासूसी पेगासस स्पाइवेयर के ज़रिए भारतीय पत्रकारों, एक्टिविस्टों, जजों की जासूसी की जा रही थी। द वायर, वाशिंगटन पोस्ट सहित दुनिया भर के 16 मीडिया संगठनों ने पहली बार इस बारे में कल शाम एक रिपोर्ट जारी की है।

फ्रांस की ग़ैरसरकारी संस्था ‘फ़ोरबिडेन स्टोरीज़’ और ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के टेक्निकल विंग द्वारा पेगासस स्पाइवेयर के लीक हुए दस्तावेज़ की फोरेंसिक जांच की गई और ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ नाम के इस रिपोर्ट को भारत से ‘द वायर’ सहित दुनिया की 15 दूसरी समाचार संस्थाओं के साथ साझा किया गया।

‘द गार्जियन’, ‘वाशिंगटन पोस्ट’, ‘ला मोंद’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया हाउस ने 10 देशों के लगभग 1,571 टेलीफ़ोन नंबरों के मालिकों का पता लगाया और उनकी छानबीन की। उसमें से कुछ की फ़ोरेंसिक जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि पेगासस स्पाइवेअर का इस्तेमाल कर उनके फोन को हैक करने की कोशिश गई थी । पूरी दुनिया में 50 हज़ार फोन को टारगेट किया गया था।

एनएसओ (NSO) इजरायल की एक कम्पनी है जिसने पेगासस नाम का एक जासूसी सॉफ्टवेयर (स्पायवेयर) बनाया है। यह छोटी सी फाइल है जो फोन में इंस्टॉल हो जाती है और फिर उस फोन की जासूसी हो सकती है। उस फ़ोन को हैक करने वाला कॉल रिकॉर्ड, बातचीत का ब्यौरा, फोटो, वीडियो, कैमरा सब कुछ देख सुन सकता है। फोन में कुछ भी डाटा डाला जा सकता है और निकाला जा सकता है। ये सिस्टम एक बार में 50 से ज्यादा लोगो के डाटा को कंट्रोल कर सकता है।

NSO की खास बात है कि यह सिर्फ सरकारी एजेंसियों के साथ ही काम करता है। पेगासस स्पाइवेयर सिर्फ गिनी चुने देश जैसे अज़रबैजान, कजाकिस्तान, बहरीन, सऊदी अरब, भारत, मेक्सिको, रवांडा,कनाडा, हंगरी आदि को बेचा गया है।

एनएसओ ग्रुप एक साइबर निगरानी कंपनी है जो दावा करती है कि उसके पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग केवल वैध आपराधिक और आतंकवाद विरोधी जांच के लिए किया जाता है।

पेगासस स्पाइवेयर अपने क्लाइंट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं देता है कि किसको बेचा है कौन सी सरकार है।

कल शाम जो रिपोर्ट आई उसके मुताबिक, भारत में बड़े पैमाने पर पेगासस से पत्रकारों के फोन हैक किए गए, यानी उनकी जासूसी हो रही थी।

जिनकी जासूसी हुई है उनकी लिस्ट लंबी है, लेकिन इसके कुछ हिस्से की जांच हुई। इसमें अभी 49 पत्रकार, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज, 3 विपक्षी नेताओं समेत कई लोगों के फोन हैक हुए।
एक अहम बात. NSO पेगासस वाली सर्विस देने के लिए अच्छा खासा पैसा लेती है।

क्योंकि NSO सिर्फ सरकारी एजेंसियों के साथ ही काम करती है, ऐसे में इसका पैसा भी सरकारी एजेंसियों के मार्फ़त ही दिया जाएगा। इसका मतलब है कि इसको खरीदने में लोगों के टैक्स का पैसा लगा है।

भारत जिन पत्रकार की जासूसी हुई या प्रयास हुए हैं

सिद्धार्थ वरदराजन
एम के वेणु
प्रेमशंकर झा
रोहिणी सिंह
शिशिर गुप्ता
स्वाति चतुर्वेदी
प्रशांत झा
विजेता सिंह
राहुल सिंह
ऋतिका चोपड़ा
औरंगजेब नक्शबंदी
जसपाल सिंह हेरन
संजय श्याम
संदीप उन्नीथन

यह एक छोटा हिस्सा है जिनके फोन की जासूसी हुई है। इनके फोनों की जासूसी 2018 से लेकर 2019 के बीच हुई है।

जब सरकारें तानाशाही नशे में चूर होकर मनमानी पर उतारू होती हैं खासकर जब वो सरकार एक फासीवादी नस्लवादी जातिवादी राजनीति करने वाली हो और जब भ्रष्टाचार और जनता के पैसे की लूट अपने चरम पर हो तो एक स्वतंत्र प्रेस रिपोर्टिंग से ऐसी सरकार और व्यवस्था को अपना नकाब उलटने का ख़तरा पैदा हो जाता है

सरकार को सवालों से डर लगता है और आंकड़े उनको परेशान करते हैं। ऐसे में सरकार और व्यवस्था की सामान्य आलोचना हुई नहीं कि राजनीतिक नेता और तानाशाह को अपनी अंधभक्तों की सेना के बीच लोकप्रियता खोने का भय सताने लगता है। इससे निबटने के लिए फासीवादी पूंजीवादी सरकारों का आसान तरीका यह है कि स्वतंत्र प्रेस, विरोध में उठने वाली आवाज़ को समाप्त कर दिया जाए। इस तरीक़े से कई देशों और अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर दिया गया है।

2019 में व्हाट्सअप ने यह स्वीकार किया था कि इज़रायली जासूसी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर भारत में पत्रकारों, एक्टिविस्टों की जासूसी की जा रही है।

भारत में जिन पत्रकारों की जासूसी हुई है उनमें से ज्यादातर वह लोग हैं जो राफेल विमान खरीद घोटाला अमित शाह के बेटे जय शाह की संपत्ति में अचानक हुई बढ़ोतरी और अन्य कारोबारियों के साथ संबंध, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जजों के राजनीतिक पार्टियों के साथ संबंध, पुलवामा हमले, सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों और संभावित घोटालों इत्यादि पर रिपोर्टिंग कर आलोचनात्मक टिप्पणी कर रहे थे।

सरकार को अपने मंत्रियों तक पर भरोसा नहीं है। न्यायपालिका में सिर्फ़ राजनीतिक नियंत्रण से काम नहीं चला तो जासूसी करवाई जा रही है। अपनी काली करतूतों को छुपाने और विरोधियों को चुप कराने और मुनाफा बरक़रार रखने के लिए सत्ता प्रतिष्ठान और पूंजीवाद नरसंहार करने से नहीं चूकते।वैसे भी आधार कार्ड के नाम पर षड्यंत्र रचकर भारत में जनता की आंखों की पुतलियों और फिंगरप्रिंट का डाटा लेकर निगरानी रखी जा रही है। यह सरकार जासूसी, पीछा करने, ब्लैकमेलिंग और हॉर्स ट्रेडिंग जैसी करतूतों पर चल रही है।
अब किसे बड़ी विडम्बना कहा जाए?

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: