रिजर्व बैंक का फरमान, बैंक अधिकारियों को अचानक भेजा जाएगा जबरिया छुट्‌टी पर

बैंकों में कथित गड़बड़ियों को रोकने के बहाने बनी है योजना

बैंकों में गड़बड़ियों को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक एक योजना बना रहा है। इसके तहत बैंक की सेंसिटिव जानकारी रखने वाले अधिकारियों को साल में एक बार अनिवार्य छुट्‌टी पर भेजा जा सकता है। यह फैसला भी अचानक ही होगा।

रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वे इस तरह की अनिवार्य छुट्‌टी को लागू करें। इसके मुताबिक, जो अधिकारी सेंसिटव पोजीशन पर हैं, उनके लिए यह लागू होगा। इसमें इस तरह के अधिकारियों को अचानक कम से कम 10 दिनों की छुट्‌टी पर भेजा जा सकता है। हालांकि यह साल में एक ही बार होगा। इसके लिए बैंक अधिकारियों को पहले कोई जानकारी नहीं दी जाएगी।

रिजर्व बैंक ने एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर में उसने कहा कि सेंसिटिव पोस्ट मतलब ट्रेजरी में सीनियर पोजीशन, करेंसी में सीनियर पोजीशन, रिस्क मॉडलिंग आदि सेक्शन में यह लागू होगा। रिजर्व बैंक ने यह भी सलाह दी है कि बैंक यह सुनिश्चित करें कि बैंक कर्मचारी जब अनिवार्य छुट्‌टी पर हों तो अपने काम से संबंधित वे बैंक में जाकर या ऑन लाइन किसी भी तरह से किसी भी चीज को एक्सेस न कर पाएं।

रिजर्व बैंक ने बैंकों को यह काम पूरा करने के लिए 6 महीने का समय दिया है। इस 6 महीने के दौरान सभी निजी और सरकारी बैंकों को यह नियम लागू करना होगा। वैसे बता दें कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में किसी-किसी कंपनी ने अपने स्तर पर इसे लागू किया है। इसका मतलब यह है कि वे उस दौरान निवेश से संबंधित या किसी भी तरह की जानकारी को हासिल न कर पाएं और उनकी अनुपस्थिति में उसकी जांच हो जाए।

इसके अलावा कई बैंकों में भी इसी तरह के नियम पहले से लागू हैं। कुछ निजी बैंकों में भी ऐसा नियम पहले से है। यह प्रैक्टिस वैश्विक लेवल पर है। इसीलिए रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वे अब इसे लागू करें। इसका मतलब होता है कि अगर कोई कर्मचारी कोई गड़बड़ी कर रहा है तो उसकी अनुपस्थिति में इन गड़बड़ियों का पता लगाया जा सकेगा।

दैनिक भास्कर से साभार

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