कृषि क्षेत्र को एक लाख करोड़ का पैकेज महज़ जुमला, किसानों को मूर्ख न समझे सरकार -एसकेएम

किसानों के जत्थे लगातार पहुंच रहे हैं मोर्चों पर

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि कृषि अवसंरचना निधि और मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद के बारे में सरकार के दावे अतिरंजित हैं और ये मजबूत किसान आंदोलन के प्रति सरकार के घबराहट-पूर्ण प्रतिक्रियाएं हैं।

मोर्चा के बयान में कहा गया है कि सरकार झूठे दावों और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जुमलों के जाल के लिए कुख्यात है, जो दिन की सुर्खियां बटोरती है और जनता को गुमराह करती है। संयुक्त किसान मोर्चा इन झूठे आख्यान के पीछे छिपे तथ्यों को प्रकाशित करने के लिए मीडिया से आग्रह करता है। योजना में कुछ मामूली और महत्वहीन निर्णय में बदलाव को (जो एपीएमसी को एआईएफ के तहत एक वित्तपोषण सुविधा लेने की अनुमति देता है) मीडिया के सामने “एपीएमसी को एक लाख करोड़ आवंटन”, “एपीएमसी को एक लाख करोड़ फंड का उपयोग करने के लिए” आदि के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

पहली बात, एक लाख करोड़ के कृषि अवसंरचना निधि का जिक्र करना बेहद भ्रामक है क्योंकि सरकार की ओर से एक हजार करोड़ का भी आवंटन नहीं किया गया है — केवल एक नया बजट लाइन बना दिया गया है जिसके तहत बैंकों से ऋण प्राप्त किया जा सकता है। वास्तविक वित्त-पोषण नियमित वाणिज्यिक बैंकों पर निर्भर है, और बैंकिंग क्षेत्र के कुप्रबंधन और बड़े पूंजीपतियों के साथ मिली-भगत की कहानी सर्वविदित है। सरकार की भूमिका केवल 3% का ब्याज की आर्थिक सहायता और कुछ क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करने की है। 2020-21 के संशोधित बजट में एआईएफ के लिए सिर्फ 208 करोड़ रुपये और 2021-22 के बजट में 900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

इसके अलावा, ऋण के मामले में भी, मार्च 2021 तक एआईएफ से केवल 3241 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे (कुछ बाद की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 4300 करोड़ रुपये), जबकि एआईएफ को कोविड-19 पैकेज के रूप में घोषित किया गया था, जैसे कि कृषि में तुरंत 1 लाख करोड़ का निवेश किया जा रहा हो। ऐसा इसलिए है ताकि मोदी सरकार 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की धोखेबाजी की घोषणा से अपना पाला छुड़ा पाए, कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मंदी में है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा निलंबित किए जाने से पहले, 6 महीनों के दौरान जब 3 कृषि कानून लागू थे, अधिकांश एपीएमसी मंडी में व्यापार लगभग आधा हो गया और उनके राजस्व में भारी गिरावट आई। केंद्र सरकार ने दिखा दिया है कि छोटे किसानों के लाभ के लिए सार्वजनिक बाजार और भंडारण के बुनियादी ढांचे के निर्माण और विस्तार के लिए उसकी कोई प्रतिबद्धता नहीं है, और निजी बाजार, भंडारण और प्रसंस्करण के निर्माण के लिए अदानी, वॉलमार्ट और रिलायंस को छूट देने के लिए तैयार है।

संयुक्त किसान मोर्चा स्पष्ट करता है कि कृषि अवसंरचना निधि वास्तव में 3 कानूनी “सुधारों” का अगुआ था। 15 मई 2020 को ही वित्त मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने “आत्मनिर्भर भारत” पैकेज के हिस्से के रूप में “एक लाख करोड़ रुपये के फंड” के एआईएफ की घोषणा की थी, और यह ध्यान देने योग्य है कि उन्होंने गोदामों और कोल्ड चेन सहित कृषि कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में “एग्रीगेटर्स और स्टार्ट-अप्स” के लिए इसकी घोषणा की। मई 2020 में वित्त मंत्री की एआईएफ की घोषणा के साथ बयानों में संकेत दिया गया था कि तीन कानूनी सुधार लाए जाने वाले थे, जो तीन किसान विरोधी कानून ही थे जो लाए गए थे।

जुलाई और अगस्त 2020 तक, 5 जून 2020 को लाए गए 3 अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक अध्यादेशों के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में पहले से ही किसान आंदोलन शुरू हो गया था। परिचालन दिशानिर्देश 17 जून को जारी किए गए थे, और पीएम ने 9 अगस्त 2020 को इस योजना का उद्घाटन किया। इस योजना में एआईएफ योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक सरकार द्वारा वहन की गई 7 वर्षों के लिए 3% की ब्याज सहायता शामिल है, और इसके अलावा कुछ क्रेडिट गारंटी कवरेज है। संसद में एक उत्तर के अनुसार, बैंकों द्वारा पीएसीएस के अलावा अन्य संस्थाओं को वितरित ऋण (संवितरित, स्वीकृत के विपरीत) फरवरी 2021 तक केवल 58.9 करोड़ थे।

केंद्र सरकार और कृषि मंत्री को विरोध कर रहे किसानों को मूर्ख नहीं समझना चाहिए। वे सरकार के जुमले और किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी को साफ देख सकते हैं। वे जानते हैं कि सरकार का एपीएमसी बाइपास अधिनियम, एपीएमसी को केंद्रीय काले कानून द्वारा बनाए गए नए “व्यापार क्षेत्रों” के खिलाफ एक असमान और कमजोर जमीन पर खड़ा करता है। वे समझते हैं कि जब व्यापार विनियमित स्थानों से बाहर निकलेगा तो मंडियों का राजस्व कम हो जाएगा। संक्षेप में कहें तो किसान मोदी सरकार के जुमला चक्रों को काटने में सक्षम हैं।

किसानों या उनके समूह को और अधिक कर्ज की जरूरत नहीं है, बल्कि कर्ज से मुक्ति की जरूरत है। और उन्हें अपने बाजार अंतरा-फलक के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत लाभकारी मूल्य की आवश्यकता है। संयुक्त किसान मोर्चा की मांग है कि मोदी सरकार लाए गए 3 किसान विरोधी कानूनों के जुमले बंद करे और उसे तुरंत निरस्त करे, और सभी वस्तुओं और किसानों के लिए लाभकारी एमएसपी की गारंटी के लिए एक नया कानून बनाए।

भारत भर से कल आयोजित विरोध प्रदर्शनों की खबरें अभी भी आ रही हैं। ये हाल के दिनों में देश में हुए ईंधन की कीमतों में अन्यायपूर्ण और असहनीय वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन थे, और इस मांग के साथ कि सरकार तुरंत पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को आधा करे। विरोध नए तरीकों से हुआ और बताया गया कि सिर्फ पंजाब में ही 1800 से अधिक स्थलों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

कल, हरियाणा के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश धनखड़ का सामना विभिन्न मार्गों पर विरोध कर रहे किसानों से हुआ जहाँ से वे भाग गए। हिसार में रामायण टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों से बचने के बाद आंतरिक सड़कों पर भी उन्हें काले झंडों के साथ किसानों का सामना करना पड़ा। अंबाला में भाजपा के एक विधायक के साथ भी यही हुआ।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (225वां दिन, 9 जुलाई 2021)

जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चारुनी, हन्नान मुल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव।

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