झूठे मुक़दमें वापस लेने के लिए किसानों ने हरियाणा सरकार को दिया 24 जुलाई का अल्टिमेटम

नई कृषि राज्य मंत्री पुराने धुन पर गाना छोड़ें -एसकेएम

नई कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री, सुश्री शोभा करंदलाजे ने किसानों के विरोध और तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने की उनकी मांग के बारे में वही धुन गाना शुरू कर दिया है जो उनके पहले के अन्य लोगों ने गाया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान नहीं हैं, और यह भी कि किसानों को बेहतर तरीके से कानून समझाकर विरोध को संबोधित किया जा सकता है। साफ है कि इससे पहले कि वह और बयान दें, उन्हें इस आंदोलन पर खुद को अपडेट करने की जरूरत है, वहीं यह भी साफ है कि मोदी सरकार जो अहंकार के खेल खेल रही है उसमें सभी मंत्री एक ही धुन गाने को मजबूर होंगे।

ऐसा लगता है कि मंत्री को किसानों और उनके कल्याण की कोई चिता नहीं है। तीन काले कानूनों से किसानों को जिस गहरे संकट में डाला गया है, उसे समझने के बजाय, वह अपनी पार्टी की सरकार के कॉर्पोरेट आकाओं की सेवा कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य मंत्री किसानों को राजनीतिक एजेंट और किसानों के लंबे संघर्ष को “राजनीति से प्रेरित” के रूप में देखता है। यद्यपि वह एक किसान परिवार से होने का दावा करती है, ऐसा लगता है कि वह भूल गई है कि किसान देश के अन्नदाता हैं ।एसकेएम उनके क्रूर और असंवेदनशील शब्दों और मानसिकता की कडे शब्दो मे निंदा करता है।

हरियाणा में बीजेपी के खिलाफ़ हो रहा जबरदस्त प्रतिरोध

पूरे हरियाणा में बीजेपी के मंत्रियों और अन्य नेताओं के खिलाफ जमकर विरोध हो रहा है और इन नेताओं को जगह-जगह काले झंडे दिखाकर विरोध किया जा रहा है। शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में मंत्री कमलेश ढांडा का काले झंडों से स्वागत किया गया। मंत्री के सभा स्थल को स्थानांतरित किए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी किसान वहां पहुंचे और उन्हें काले झंडे दिखाए। कुछ किसानों को हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया।

शनिवार को जींद में भाजपा की बैठक का विरोध किया गया। हिसार में भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ को पार्टी की एक बैठक में शामिल होने के लिए काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा। यमुनानगर में भी आज स्थानीय किसानों द्वारा वहां भाजपा की एक बैठक का जमकर विरोध किया गया, जहां उन्होंने मंत्री मूलचंद शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

प्रशासन की हठधर्मित, 24 जुलाई का अल्टिमेटम

हिसार में जिला प्रशासन के साथ हुई बातचीत के एक और दौर में, 16 मई को 350 विरोध करने वाले किसानों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने के मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकला। दो घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में कई एसकेएम नेताओं ने भाग लिया, जहां उन्होंने प्रशासन को 24 मई के समझौते की याद दिलाई जहां सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी थी लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला था। प्रकरणों को वापस लेने के लिए प्रशासन को 24 जुलाई की समय सीमा दी गई थी, ऐसा न करने पर किसान संगठन अपना विरोध तेज करेंगे।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में किसान जत्था हो रहे शामिल

शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से किसानों का बड़ा दल आज सिंघू सीमा धरना स्थल पर पहुंचने के लिए रवाना हुआ है । बीती रात काफिला सहारनपुर टोल प्लाजा पर पहुंच गया। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर यमुनोत्री में बड़े काफिले के कारण ट्रैफिक जाम हो गया। इन किसानों का नेतृत्व बीकेयू-टिकैत कर रहे है ।

सद्भावना मिशन स्वास्थ्य शिविर शुरू

सिंघू बॉर्डर में शुरू किया गया सद्भावना मिशन स्वास्थ्य शिविर स्थानीय लोगों के साथ-साथ विरोध करने वाले किसानों की आँखों की समस्या से निवारण के लिए हर सप्ताह के गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को और रविवार को हृदय रोगों के लिए चालू है। रविवार को नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का नेतृत्व पद्म भूषण हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ टी एस क्लेर करेंगे। ये शिविर तब तक चलेंगे जब तक साप्ताहिक आधार पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (226वां दिन, 10 जुलाई 2021)

जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव।

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