योगी राज : 7800 करोड़ के घोटाले का आरोपी जेल से बाहर, जाँच एजेंसी को ख़बर नहीं

कोरोना में पैरोल के लिए बनी कमेटी के निर्देश पर हुई जमानत

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक महकमे की लापरवाही का एक आजीबों गरीब मामला सामने आया है। जहां 7800 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोपी जेल से बाहर आ गया और किसी को खबर तक नहीं लगी। मामला कानपुर का है, फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के डायरेक्टर उदय देसाई बिना जांच एजेंसियों की जानकारी से जेल से बाहर आ गए। मामले का खुलासा करीब 15 दिन बीत जाने के बाद हुआ है, तो अब कागजात तलाशे जा रहे हैं।

जेल में बंद कैदियों को कोरोना काल में पेरोल पर छोड़े जाने के लिए बनाई गई हाई पावर कमेटी के दिशा-निर्देशों के तहत 22 जून को उदय देसाई को अंतरिम जमानत दे दी गई थी। यह आदेश 15 दिनों के बाद भी कंपनी मामलों की सुनवाई के लिए गठित कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया। मामले की जानकारी तब सामने आई जब देसाई ने सुप्रीम कोर्ट में रिहाई का जिक्र किया।

मामले के खुलासे के बाद जांच एजेंसी सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेश ऑफिस ने हाईकोर्ट में रिविजन दाखिल करने की तैयारी कर ली है। SFIO के वकील ने अपनी अर्जी में बताया कि उदय देसाई की जमानत याचिका 25 मार्च 2021 को खारिज की चुकी है। इसके अलावा कोविड के आधार पर दी गई जमानत याचिका को भी खारिज किया जा चुका है। वकील ने कोर्ट से आदेश की कॉपी की भी मांग की है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उदय देसाई पर कंपनी में हेराफेरी करके बैंकों के साथ 7 हजार 820 करोड़ रुपये की धोखधड़ी करने का आरोप लगा है। SFIO यानी कि सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेश ऑफिस ने पिछले साल 15 मई को मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें देसाई के बेटे सुजाय का नाम भी शामिल है।

इस मामले में ED भी जांच कर रही है, बताते चलें कि प्रवर्तन निदेशालय हीरा कारोबारी की 800 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्तियों पर निगाह जमा चुका है। इसके अलावा करीब 185 करोड़़ की संपत्ति अचल पाई गई है। जांच में सामने आया है कि देसाई ने अन्य कारोबारियों के साथ मिलकर कई फ्लैट बनवाए और उन्हें बेच दिया है।

देसाई के खिलाफ सीबीआई भी जांच में जुटी हुई है, उसके सहयोगियों का चिट्ठा भी खंगाला जा रहा है। ऐसे में इतने बड़े मामले के आरोपी का बिना जानकारी के बाहर आने अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है।

जनसत्ता से साभार

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