स्टेन स्वामी की मौत के बाद खुलासा; कंप्यूटर में डाले गए थे फर्जी दस्तावेज

इन्हीं दस्तावेजों से कई मानवाधिकार कार्यकर्ता हुए थे गिरफ्तार

सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्टेन स्वामी की तरह ही भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद सुरेंद्र गाडलिंग के कंप्यूटर में जानबूझ कर फर्जी दस्तावेज डाले गए थे। इससे पहले इसी मामले में रोना विल्सन के कंप्यूटर हैक का खुलासा हो चुका है।

ज्ञात हो कि वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग को भी भीमा कोरेगांव मामले में यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 महीनों तक गाडलिंग का कंप्यूटर हैक किया गया था और उसमें उन्हें आरोपी ठहराने वाले दस्तावेज प्लांट किए गए।

गाडलिंग एल्गार परिषद (भीमा कोरेगांव) मामले में हिरासत में लिए गए स्टेन स्वामी सहित 16 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों में से एक हैं।

सबूतों से छेड़छाड़ का सबसे गंभीर मामला

अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित डिजिटल फॉरेंसिक्स कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग की रिपोर्ट पर आधारित एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार गाडलिंग के कंप्यूटर से 16 फरवरी 2016 से नवंबर 2017 के बीच छेड़छाड़ की गई थी और उसी हमलावर द्वारा कंप्यूटर में कम से कम 14 आपत्तिजनक दस्तावेज रखे गए जिसने रोना विल्सन के सिस्टम को निशाना बनाया और वहां 30 फाइलें रखी।

जिसके आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें 6 अप्रैल, 2018 को गिरफ्तार किया। वे करीब तीन साल से जेल में हैं, जबकि ये दस्तावेज मालवेयर नेटवायर के जरिये उनके कंप्यूटर में प्लांट किए गए थे।

आर्सेनल कंसल्टिंग की जून 2021 की रिपोर्ट के अनुसार जब सुरेन्द्र गाडलिंग के हार्ड ड्राइव का विश्लेषण किया गया तो इसके पर्याप्त सबूत मिले कि कंप्यूटर में जानबूझ कर फर्जी दस्तावेज डाले गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्सेनल कंसल्टिंग के सामने आए मामलों में यह सबूतों के साथ छेड़छाड़ का सबसे गंभीर मामला है।

ऐसे हुई थी कंप्यूटर से छेड़छाड़

रिपोर्ट के अनुसार हमलावर ने ईमेल के जरिये गाडलिंग के कंप्यूटर से छेड़छाड़ करने के तीन प्रयास किए थे। ईमेल गाडलिंग के पहचान वाले हर्षल लिंगायत (गाडलिंग के लीगल जूनियर), अरुण फरेरा (मामले में सहआरोपी) और प्रशांत राही (यूएपीए के अन्य मामले में दोषी) की आईडी से भेजे गए थे।

फॉरेंसिक टीम के मुताबिक, हैकर ने गाडलिंग के कंप्टूटर में नेटवायर से इतर कई तरह के टूल्स का इस्तेमाल किया है, इनमें से एक विनएससीपी था, जिसका काम गाडलिंग की फाइलों को उनके कंप्यूटर से हैकर के सी2 सर्वर पर सिंक्रोनाइज करना था।

फर्जीवाड़ा : कई मानवाधिकार कार्यकर्ता बने निशाना

आर्सेनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ईमेल विभिन्न स्पूफिंग सेवाओं के जरिये भेजे गए थे। रिपोर्ट में कहा गया, ‘मालवेयर का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत बड़ा है और यह नेटवायर और डार्ककॉमेट जैसे मालवेयर का इस्तेमाल करता है।’

ये ईमेल विशेष तौर पर तैयार किए गए थे, जिसे h.lingayat@gmail.com आईडी से भेज गया था, जो हर्षल लिंगायत की है। इस ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में लिखा गया, आईएपीएल के मिनट्स 13 फरवरी 2013।

यहां आईएपीएल का मतलब इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीपुल्स लॉयर्स से हैं, जो वकीलों का एक समूह है, जिसका गाडलिंग और फरेरा दोनों हिस्सा हैं.

प्रशांत राही के कथित ईमेल आईडी से भेजे गए ईमेल में दो अन्य सह आरोपियों- सुधा भारद्वाज और स्टेन स्वामी सहित कुछ लोगों को चिह्नित किया गया था। अभी तक स्पष्ट नहीं है कि क्या स्वामी और भारद्वाज ने यह ईमेल खोला था या नहीं।

राही की ईमेल आईडी से भेजे गए ईमेल में स्टेन स्वामी की तबियत और उन्हें तत्काल मेडिकल केयर दिए जाने की जरूरत पर बात की गई थी।

टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब और बर्लिन में एमनेस्टी इंटरनेशनल की टेक टीम द्वारा की गई जांच के साथ इस रिपोर्ट के निष्कर्षों से पता चलता है कि देशभर के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया।

सिटिजन लैब की रिपोर्ट इजरायली सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप पर केंद्रित थी, जिसके मालवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर कई वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में भी ईमेल के जरिये हैकिंग के समान प्रयास का पता चला।

रोना विल्सन के कंप्यूटर में भी छेड़छाड़ का हुआ था खुलासा

यह इस फॉरेंसिक फर्म की तीसरी रिपोर्ट है। इससे पहले की दो रिपोर्टें आठ फरवरी, 2021 और 27 मार्च, 2021 को प्रकाशित हुई थीं, जो एल्गार परिषद मामले में गाडलिंग के साथ गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के लैपटॉप से जुड़ी थीं।

रोना विल्सन के कंप्यूटर में भी छेड़छाड़ का खुलासा अमेरिकी अख़बार द वाशिंगटन पोस्ट ने किया था। अख़बार ने लिखा था कि एक अज्ञात हैकर ने रोना विल्सन के कंप्यूटर में आपत्तिजनक दस्तावेज डाले थे जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

स्टेन स्वामी के भी कंप्यूटर से छेड़छाड़ संभव

हालिया रिपोर्ट में आर्सेनल कंसल्टिंग के अध्यक्ष मार्क स्पेंसर का निष्कर्ष है कि गाडलिंग और विल्सन के मामले में हमलावर में समानताएं हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिस ईमेल के आधार पर गाडलिंग को गिरफ्तार किया गया था उसे स्टेन स्वामी समेत कई लोगों को भी भेजा गया था। इसलिए यह संभव है कि फादर स्टेन स्वामी सहित भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद लोगों के कंप्यूटर के साथ भी छेड़छाड़ किया गया होगा। गौरतलब है कि सुरेंद्र गाडलिंग के कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव को पुलिस ने जब्त कर लिया था। 

उल्लेखनीय है कि 2018 के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरएसएस से जुड़े असल दोषियों को बचाकर उलटे स्टेन स्वामी सहित तमाम मानवाधिकार कर्मियों को गिरफ्तार किया गया। स्वामी पर हिंसा भड़काने का मामला चल रहा था। उन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराएं लगा कर एनआईए ने हिरासत में लिया था।

स्टेन स्वामी 84 साल के थे और स्वास्थ्य की बुरी स्थितियों के बावजूद उन्हें जमानत तक नहीं मिली। कुछ दिन से वे मुंबई के एक अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर थे। जहां सोमवार को उनका दुखद निधन हो गया।

बता दें कि आर्सेनल कंसल्टिंग 2009 में स्थापित एक डिजिटल फॉरेंसिक कंसल्टिंग कंपनी है और 2009 से ही यह कई फॉरेंसिक जांच में शामिल रही है।

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