हड़ताल का अधिकार मज़दूर वर्ग द्वारा वर्षों के संघर्ष से हासिल एक मूल्यवान अधिकार है!

आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 की निंदा करते हुए संयुक्त वक्तव्य

विभिन्न ट्रेडयूनियानों द्वारा जारी संयुक्त बयान में आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 की निंदा की गई है। यह हड़तालों पर रोक लगाने की ताकत देता है। वापस लेने की माँग के साथ इसे हाल के दिनों में देखे गए सबसे दमनकारी कानूनों में से एक बताया गया है।

10 मज़दूर संघों द्वारा जारी बयान-

नया आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 हाल के दिनों में देखे गए सबसे दमनकारी कानूनों में से एक है। यह केंद्र सरकार को “आवश्यक रक्षा सेवाओं” के रूप में परिभाषित कारखानों में हड़ताल पर रोक लगाने की ताकत देता है। हालाँकि इस कानून में “आवश्यक रक्षा सेवाओं” की परिभाषा लगभग किसी भी प्रतिष्ठान या उपक्रम को इस परिभाषा में लाने के लिए पर्याप्त है क्योंकि इसमें ऐसा कोई भी प्रतिष्ठान या उपक्रम शामिल है जो “रक्षा से जुड़े किसी भी उद्देश्य के लिए आवश्यक वस्तुओं या उपकरणों के उत्पादन से संबंधित है”। इसमें ऐसी कोई अन्य सेवा भी शामिल हो सकती है जिसे केंद्र सरकार एक आवश्यक रक्षा सेवा घोषित कर दे।

हम इस अध्यादेश की निंदा करते हैं और इसे तत्काल वापस लेने की माँग करते हैं। हम रक्षा कर्मियों और अन्य सभी ऐसे मज़दूरों के साथ खड़े हैं जो इस अध्यादेश से प्रभावित हो सकते हैं। हम पूरे मजदूर वर्ग का आह्वान करते हैं कि वह इस अध्यादेश के खिलाफ लड़ने के लिए सड़कों पर आएं।

हड़ताल का अधिकार मज़दूर वर्ग द्वारा वर्षों के संघर्ष के बाद हासिल किया गया एक मूल्यवान अधिकार है। इसकी सबसे बुनियादी बात यह है कि श्रम को अस्वीकार करने का अधिकार है। यह एक मौलिक मानव अधिकार है क्योंकि जबरन मज़दूरी गुलामी है। मज़दूर वर्ग के वैध कानूनी अधिकार के रूप में हड़ताल के अधिकार को बहाल करने का यह संघर्ष एक महत्वपूर्ण संघर्ष है जिसे आने वाले दिनों में इस देश के मज़दूर वर्ग को उठाना होगा।

साथियों, यह हमारा काम होना चाहिए कि हम अपनी पूरी ताकत के साथ इस बेहद दमनकारी कदम के खिलाफ़ लड़ें!

यह बयान एआईसीसीटीयू, इफ्टू, एनटीयूआई, टीयूसीआई, इफ्टू (सरवाहरा), ग्रामीण मज़दूर यूनियन (बिहार), इंकलाबी मज़दूर केंद्र, जन संघर्ष मंच हरियाणा, मज़दूर सहयोग केंद्र, मज़दूर समन्वय केंद्र की ओर से संयुक्त रूप से जारी हुआ है। कर्नाटक श्रमिक शक्ति ने भी समर्थन किया है।

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