राजस्थान: ऑटोनियम कंपनी बहरोड़ के यूनियन उपाध्यक्ष का पुलिसिया दमन

ऑटोनियम कम्पनी बहरोड़, के यूनियन उपाध्यक्ष योगेंद्र को बहरोड़ पुलिस ने थाने में बातचीत के बहाने बुलाकर धोके से गिरफ़्तार कर लिया। घटना 30 जुन की है। थाने में योगेंद्र का फ़ोन भी ले लिया गया और किसी को गिरफ़्तारी की सूचना भी नहीं देने दी गई। कानून के अनुसार गिरफ्तारी के बाद योगेंद्र को मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित भी नहीं किया गया।

यूनियन के अन्य साथियों को शक होने पर उन्होंने वकील से संपर्क किया और कोर्ट से 25 हज़ार के निजी मुचलके पर योगेंद्र की जमानत करवाई। ऑटोनियम कंपनी बहरोड़ रीको एरिया में स्थित है और मारुति, होंडा इत्यादि के ऑटो पार्ट्स बनाती है।

ज्ञात हो कि पिछले 1 मार्च को ऑटोनियम प्रबंधन ने यूनियन उपाध्यक्ष ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 384 के तहत रंगदारी मांगने का झूठा मुकदमा बहरोड़ पुलिस की मिलीभगत से दर्ज करा दिया था। 384 जैसे मामले में बिना किसी जांच के प्रबंधन के इशारे पर एफआईआर दर्ज की गई है। 1 मार्च को योगेंद्र अस्पताल में भर्ती था तो फिर उसके खिलाफ उस दिन रंगदारी मांगने का मामला कैसे दर्ज हो सकता है।

यूनियन के पदाधिकारियों में से ऑटोनियम प्रबंधन ने 7 श्रमिकों को सस्पेंड और 4 श्रमिकों को बर्खास्त कर दिया है। सस्पेंड श्रमिकों पर घरेलू जांच कार्रवाई बैठा दी गई है।

प्रशासन और श्रम विभाग के लगातार हस्तक्षेप के बावजूद ऑटोनियम प्रबंधन इस औद्योगिक विवाद को निपटाने से इंकार कर रहा है। दरअसल इस विवाद की आड़ में ऑटोनियम प्रबंधन श्रमिक यूनियन और श्रमिकों की जायज़ मांग को चलने में कुचलने में लगा हुआ है। प्लांट में बीएमएस की जेबी यूनियन भी है जो पूरे मामले में प्रबंधन के साथ है। प्लांट में श्रमिकों के साथ-साथ प्लांट हेड सहित प्रबंधन के कई लोगों को भी नौकरी से निकाल दिया गया है।

भाजपा हो या कांग्रेस किसी भी सरकार में मजदूरों के साथ पुलिस अपराधियों जैसा बर्ताव करती है। यह राजस्थान का वही बहरोड़ थाना है जहां से दिनदहाड़े गोलियां बरसा कर पपला गुर्जर जैसे अपराधी को उसके साथी भगा ले गए थे और जहां पहलू खान के साथ मॉब लिंचिंग घटना हुई थी।

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