26 जून को पूरे भारत में मनेगा ‘कृषि बचाओ, लोकतंत्र बचाओ दिवस’, राजभवन होगा कूच

किसानों की लूट खुलेआम जारी और सरकार मूकदर्शक

भारत के विभिन्न राज्यों में, 26 जून 2021 को ‘कृषि बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ दिवस के रूप में चिह्नित करने की योजना चल रही है। इस दिन किसान राजभवनों तक मार्च करेंगे और राज्यपालों को भारत के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। किसानों की लूट खुलेआम जारी है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है – यह स्वीकार्य नहीं है, और जब तक किसानों को लाभकारी मूल्य की कानूनी गारंटी नहीं मिल जाती, हम आंदोलन जारी रखेंगे।

पंजाब और हरियाणा में लगभग 60-65% भूमि पर धान की रोपाई का कार्य पूरा हो गया है, और प्रतिदिन काफी किसान विरोध स्थलों में शामिल हो रहे हैं। बीकेयू असली के नेतृत्व में किसानों का एक बड़ा दल कल गाजीपुर बार्डर पहुंचा। स्थानीय ग्रामीण विभिन्न मोर्चा स्थलों को दूध और सब्जियों जैसी खाद्य सामग्री की आपूर्ति कर पूरा समर्थन दे रहे हैं। कल की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत के खरखोदा और उसके आसपास ग्रामीणों द्वारा लगभग 50 ट्राली गेहूं दान किया गया था जिसका नेतृत्व आरकेएमएस ने किया।

कल हरियाणा भाजपा और जजपा नेताओं को कई जगह किसानों के विरोध का कोपभाजन बनना पड़ा। सिरसा में,श्री देवीलाल की प्रतिमा का अनावरण करने गए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को भी नहीं बख्शा गया जहा उन्हें किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा।दुष्यंत चौटाला ने इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए कि किसान प्रतिमा के अनावरण के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वे दुष्यंत चौटाला जैसे किसान विरोधी नेताओ का विरोध कर रहे हैं, कहा कि प्रदर्शनकारी किसान नहीं हो सकते हैं यदि वे स्वर्गीय श्री देवीलाल की प्रतिमा के अनावरण का विरोध कर रहे हैं।

कल चंडीगढ़ पुलिस ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे बुजुर्ग निहंग सिख प्रदर्शनकारी लाभ सिंह को उठा लिया था ।कुछ किसान नेताओं के सोशल मीडिया संदेशों के बाद बहुत सारे समर्थक उस थाने में जमा हो गए जहां उन्हें हिरासत में लिया गया था; बाद में मटका चौक पर अपना विरोध जारी रखने के लिए उन्हें बिना शर्त रिहा करना पड़ा।

पूरे भारत से नियमित रूप से ऐसी खबरें आती रहती हैं कि किसानों को विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए खून -पसीना बहाने के बाद भी उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पंजाब में, जहां फसल विविधीकरण की सख्त जरूरत है, मक्का उत्पादकों को दी जा रही कीमतें सरकार द्वारा कुछ हद तक व्यर्थ घोषित एमएसपी का लगभग एक-तिहाई है। आंध्र प्रदेश के किसान आम की बेहतर कीमतों के लिए सड़कों पर हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में दूध उत्पादक भी विरोध कर रहे हैं। तेलंगाना में कपास बीज उत्पादकों के साथ भी ऐसा ही है। तेलंगाना में ज्वार के किसान जिन्हें उच्च न्यायालय के आदेशों के कारण सरकार द्वारा खरीद शुरू करने से पहले एमएसपी से नीचे बेचना पड़ा था, वे मुआवजे के लिए विरोध कर रहे हैं। ओडिशा में किसान धान खरीद में कमी का विरोध कर रहे हैं। यह वही कहानी है जो भारत के अधिकांश किसानों के लिए सभी मौसमों में, राज्यों में, विभिन्न जिंसों में दोहराई जाती है।

इस दुर्भाग्यपूर्ण कहानी में, सरकार ने घोषित-एमएसपी को C2+50% पर भी तय नहीं किया! अब समय आ गया है कि भारत सरकार को किसानों की आय पर इस तरह के प्रतिकूल मूल्यों के प्रभाव का एहसास हो; सरकार ने इस दिशा में कुछ भी ठोस किए बिना किसानों की आय को दोगुना करने’ के उद्देश्य की घोषणा की है, और गारंटीकृत लाभकारी मूल्य कृषि आय हासिल करने का सबसे अच्छा मार्ग है। तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने के अलावा, सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए कानूनी गारंटी लागू होने तक वर्तमान आंदोलन जारी रहेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 208वें दिन, 22 जून को जारी प्रेस नोट; जारी कर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चारुनी, हन्नान मुल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव।

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