सरकार अहंकार छोड़े, कृषि मंत्री लीपापोती की जगह तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करें

हरियाणा सरकार के मंत्रियों को करना पड़ा किसानों के विरोध का सामना

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि अनुचित होने के बावजूद केंद्र सरकार हमारे अन्नदाता पर अवांछित किसान विरोधी कानून थोपने को आमादा है। किसान विरोधी कानूनों को निरस्त न करने का क्या कारण है? एसकेएम स्पष्ट किया कि किसान भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं का सामाजिक बहिष्कार और विरोध लगातार जारी रखेंगे।

हाल में घटित कुछ घटनाओं और उसके बाद मीडिया में बहस के बाद, एसकेएम ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में यह निर्णय सर्वसम्मति से दोहराया गया था कि वे केवल भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ अपना सामाजिक बहिष्कार और विरोध जारी रखेंगे। यह विरोध सभी राजनीतिक दलों पर लागू नहीं है।

दिल्ली पुलिस ने अपने पहले के आरोप को जारी रखते हुए कि 26 जनवरी 2021 को लाल किले की घटनाएं “लाल किले पर कब्जा करने की साजिश” का हिस्सा थीं और इसे तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए “आंदोलनकारी किसानों के लिए विरोध स्थल” बना दिया, 17 जून को पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। दिल्ली के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने शनिवार को इस पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया।

एसकेएम पूर्व में ही स्पष्ट कर चुका है कि लाल किले की घटनाएं स्पष्ट रूप से किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए खुद भाजपा सरकार द्वारा प्रायोजित साजिश का हिस्सा थीं। एसकेएम को विश्वास है कि किसानों के शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को अदालत द्वारा मान्यता दी जाएगी और असहमति को अपराधीकरण करने की शैतानी मंशा का पर्दाफाश किया जाएगा।

हरियाणा में, भाजपा और जजपा नेता स्थानीय किसानों के प्रतिरोध और सामाजिक बहिष्कार का खुलकर विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं, बजाय इसके कि वे उन किसानों के पक्ष में स्पष्ट रूप से राजनीतिक रुख अपनाएं, जिन्होंने उन्हें सत्ता में वोट दिया और उनकी जायज मांगें रखीं। कल, हरियाणा के खेल और युवा मंत्री संदीप सिंह को यमुनानगर में काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा; सैकड़ों किसान कई घंटों तक जिला प्रशासन मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते रहे। इसी तरह, हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को हिसार में विरोध का सामना करना पड़ा, जहां हवाई अड्डे पर किसानों ने काले झंडे लहराए और उनके, उनकी पार्टी और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। किसानों ने उस सेक्टर 13 का बहिष्कार किया जहां वह निजी दौरे पर गए थे।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का तीन केंद्रीय काले कानूनों की निरंतर रक्षा करना आश्चर्यजनक है। उनका यह लगातार बयान कि सरकार और वह किसानों की चिंताओं की एक बिंदुवार सूची को सुनने के लिए तैयार हैं, इस तथ्य को नकारते हैं जिसे एसकेएम नेताओं ने पहले ही जल्दबाजी में पारित अवांछित केंद्रीय कृषि कानूनों में सरकार की मूलभूत खामियों की ओर इशारा किया है। ये ऐसे कानून हैं जो किसानों को उन बाजारों की दया पर छोड़ देते हैं जिन्हें सरकार द्वारा बिना किसी सुरक्षा के बड़ी पूंजी और कॉरपोरेट्स द्वारा हेरफेर किया जाता है। ये ऐसे कानून हैं जहां सरकार देश के अन्नदाता के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है।

सरकार को बार-बार ऐसे कानूनों का बचाव क्यों करना चाहिए जिनमे मूलभूत कमियां हैं, जो नीतिगत दिशा में निहित हैं, जो किसानो के अहित में जाती है और कारपोरेट मुनाफाखोरी की रक्षा करने का प्रयास करती है? अपने अस्तित्व के लिए जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे किसानों को कानूनो को निरस्त न कर अन्य विकल्प पेश करने के लिए कहना सरकार का अनुचित कदम है। सरकार को कानूनों को निरस्त क्यों नहीं करना चाहिए? भाजपा सरकार के अहंकार के अलावा इस बात की कोई तर्कसंगत व्याख्या नहीं है कि सरकार आंदोलन की मांगों पर सहमत क्यों नहीं है।

टिकरी सीमा विरोध स्थलों के पास हरियाणा के कसरा गांव के मुकेश की हाल ही में हुई दुर्भाग्यपूर्ण मौत का इस्तेमाल भाजपा और प्रशासन द्वारा किसानों के आंदोलन को बदनाम करने और कुछ विरोध करने वाले किसानों को मामले में फंसाने के लिए किया गया था। शनिवार को टिकरी बार्डर पर किसान संघों द्वारा गठित कमेटी झज्जर जिले के पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल से मिलने गई। समिति के सदस्यों में विकास सीसर, जोगिंदर नैन, मनजीत सिंह धननेर, संतोक वकील, रवींद्र पटियाला, बलदेव सिंह सिरसा, अमित सांगवान, अमरीक सिंह और तेजिंदर सिंह शामिल थे।

घटना के ज्ञात तथ्यों को सबूत के तौर पर वीडियो क्लिप के साथ पुलिस अधिकारी के साथ साझा किया गया जहां पीड़ित को यह कहते हुए सुना गया कि उसने खुद को आग लगा ली थी और वास्तव में प्रदर्शनकारियों ने ही उसकी जान बचाने की कोशिश की थी। टिकरी बॉर्डर से समिति के सदस्यों ने प्रशासन से मामले में गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों को रिहा करने का अनुरोध किया।

विभिन्न राज्यों से और ज्यादा किसान मोर्चा में आ रहे हैं। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु ‘रोटेशन प्रणाली के अनुसार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के किसान गाजीपुर सीमा पर पहुंच गए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 205वें दिन, 19 जून को जारी प्रेस नोट; जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चारुनी, हन्नान मुल्ला, जगजीत

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