जयंती पर याद किये गए मज़दूर आंदोलन के प्रतीक कॉमरेड ए के राय

जिन्होंने खदान मज़दूर आंदोलन को नई राह दिखलाई

मज़दूर आंदोलन को नई राह दिखलाने वाले कॉमरेड एके राय को उनकी 86वीं जयंती पर मंगलवार को पूरे क्षेत्र में याद किया गया। मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के संस्थापक कॉमरेड राय ने खदान मज़दूरों के साथ आदिवासियों को संगठित किया था और जुझारू आंदोलनों को नेतृत्व दिया। उनको भारत के मज़दूर आन्दोलन के ईमानदार नेताओं के एक प्रतीक के रूप में माना जाता हैं।

मज़दूर आंदोलन को कॉमरेड एके राय ने नई दिशा दी

कॉमरेड एके राय का जन्म पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के राजशाही जिला अंतर्गत सपुरा गांव में 15 जून 1935 में हुआ था। वह केमिकल इंजीनियर बनकर धनबाद आए थे। 2 साल तक एक निजी कंपनी में काम किया। 1961 में वे प्रॉजेक्ट्स ऐंड डिवेलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) सिंदरी में भर्ती हो गए।

उन्होंने 9 अगस्त 1966 को बिहार बंद आंदोलन में भाग लिया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तत्कालीन सरकार का विरोध करने के कारण पीडीआईएल प्रबंधन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

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कॉमरेड राय श्रमिक संघ में शामिल हुए और उन्होंने सिंदरी फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) और निजी कोयला खान मालिकों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। वे कोयला मजदूरों के शोषण व दमन के खिलाफ जुझारू नेता बने। लाल झंडा थाम वे सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय हो गए।

कॉमरेड राय गांव के आदिवासी किसान-मजदूरों के साथ खदानों के मेहनतकशों को जोड़ने में सफल रहे। शाषक वर्ग के खिलाफ लड़ाई के साथ साथ माफियायों के बढ़ते प्रभावों के खिलाफ संघर्ष किया। 1960 के दशक से धनवाद सहित झारखण्ड (उस समय का बिहार) के खदान क्षेत्र के व्यापक इलाके में जबरदस्त मज़दूर आन्दोलन शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्व कॉमरेड ए के राय ने किया था।

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1967 में उन्होंने सीपीएम  के टिकट पर बिहार की सिंदरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए। हालांकि, उन्होंने सीपीएम से इस्तीफा दे दिया और अपनी मार्क्सवादी समन्वय समिति बनाई। वह तीन बार धनबाद के सांसद और तीन बार सिंदरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। 

वे झारखंड अगल राज्य आंदोलन में सक्रिय रहे। झामुमो के संस्थापकों में भी राय दा शामिल थे।

वर्ष 2008-09 में वे आंशिक पैरालायसिस के शिकार हो गए। 21 जुलाई, 2019 को 90 साल की उम्र में कॉमरेड रॉय का निधन हो गया। रॉय को उनके साथी और समर्थक ‘राजनीतिक संत’ बुलाते थे क्योंकि अंतिम सांस लेने तक उनका बैंक खाता ‘शून्य बैलेंस’ ही दिखाता रहा।

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चारो तरफ मज़दूर आन्दोलन में जब समझौतापरस्त नेताओं का बोलबाला है, ऐसा समय में भी ‘मासस’ के नेताओं को पूरे क्षेत्र में ईमानदार, साहसी और जुझारु नेताओं के रूप में माना जाता हैं।

देश में बड़े-बड़े स्थापित मजदूर यूनियन जब समझौतापरस्त मजदूर संगठन में तबदील हो गए हैं, तब कॉमरेड आनंद माहातो, कॉमरेड हलधर माहतो, कॉमरेड अरूप चटर्जी के नेतृत्व में नए रूप से झारखण्ड सहित देश के पैमाने पर सच्चे और जुझारू मज़दूर संगठन का प्रयास जारी है।

कॉमरेड राय के नेतृत्व में खदान मज़दूर आन्दोलन के ‘जमींन’ से जिन नेताओं का जन्म हुआ था –वे साथी कॉमरेड ए के राय की क्रन्तिकारी विरासत को आगे ले जाने में जुटे हुआ हैं।

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जयंती पर विविध कार्यक्रम

बोकारो। मंगलवार, 15 जून को मार्क्सवादी समन्वय समिति के पुराना बाजार, टेंपल रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में एक सादे समारोह में कार्यकर्ताओं ने कॉमरेड एके राय की जयंती संकल्प दिवस के रूप में मनाई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने स्वनिर्भरता, जनक्रांति व समाजवाद के रास्ते पर चलते हुए बिरसा से लेनिन तक का सफर तय करने का संकल्प लिया।

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इस मौके पर मासस के जिला सचिव बसंत कुमार ने कहा कि एके राय आजीवन मजदूरों के हित के लिए लड़ते रहे। उन्होंने 1972 में मासस का गठन किया था। बिहार से झारखंड को अलग करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। श्री राय ने चार फरवरी 1973 को विनोद बिहारी महतो और शिबू सोरेन को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया था।

वह देश के पहले सांसद थे जिन्होंने सांसदों के लिए 1989 में भत्ते और पेंशन बढ़ाने वाले प्रस्ताव का विरोध किया था। हालांकि उनका प्रस्ताव गिर गया था। वे खुद कभी भी सरकारी सुविधा और पेंशन नहीं लिया। वर्तमान राजनीति और जनप्रतिनिधियों के लिए एके राय का विचार एक दर्पण है। 

इसके अलावा बीसीकेयू के सभी कोलियरी व क्षेत्रीय कार्यालयों व मासस के सभी कार्यालयों में भी एके राय की जयंती संकल्प दिवस के रूप में मनाई गई।

चासनाला। नुनूडीह स्थित एके राय स्मृति भवन में मनाई गई। नुनूडीह चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी, टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो, पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, सिदरी के पूर्व विधायक आनंद महतो, निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने एके राय की प्रतिमा का अनावरण किया व श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान निश्शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगा। सैकड़ों लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। हजारों गरीब भोज में शामिल हुए। कोरोना वारियर्स स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मी आदि को सम्मानित किया गया। गरीब बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री का वितरण किया गया।

सुदामडीह रिवर साइड लाल मैदान में बीसीकेयू की ओर से एके राय की जयंती मनाई गई। श्रमिक उच्च विद्यालय प्रागंण मे पौधारोपण किया गया।

तिसरा। गोलकडीह में असंगठित मजदूरों ने मासस के तत्वावधान में एके राय की जयंती संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर लोगों ने श्रद्धांजलि दी। संकल्प सभा में असंगठित मजदूर के केंद्रीय सचिव बिदा पासवान ने कहा कि कोयला मजदूरों का शोषण अभी भी जारी है। एके राय के बताए मार्ग पर चलकर हमें फिर आंदोलन करना होगा।

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लोदना। यमुना सहाय स्मृति भवन लोदना बाजार में पूर्व सांसद एके राय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। लोगों ने कहा कि एके राय शोषित, पीड़ित, गरीबों के हक के लिए हमेशा आंदोलनरत रहे।

सिदरी। सिदरी में वामपंथी संगठन के लोगों ने श्रद्धांजलि दी। मासस सिदरी नगर कमेटी ने पीडीआइएल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एके राय चौक पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

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धनबाद। झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति ने मनईटांड़ में पूर्व सांसद एके राय का 86वीं जयंती मनाई। वक्ताओं ने कहा कि राय साहब के विचार और सिद्धांत हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। आजीवन उन्होंने निस्वार्थ गरीब मजदूर शोषित लोगों के उत्थान में लगा दिया। 

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