वेंटिलेटर निकले खराब, हाईकोर्ट ने कहा- मोदी सरकार गुजराती कंपनी को बचा रही

पीएम केयर फंड के 150 वेंटिलेटर में से 113 के ख़राब होने का मामला

ख़राब वेंटिलेटर के मामले में बॉम्बे हाई कोर्टी की औरंगाबाद बेंच ने केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है लोगों की जान से ज्यादा गुजरात की कंपनी को बचाने में आपका ध्यान है। जज ने कहा कि कंपनी के दावों को जस का तस कैसे मान लिया गया। आपने यह तक नहीं कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।

अस्पतालों ने कोर्ट को बताया था कि पीएम केयर फंड से मिले 150 वेंटिलेटर में से 113 खडराब निकले। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि ख़राब वेंटिलेटर्स को लेकर क्या उपाय हैं? केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि इन वेंटिलेटर्स की सप्लाई पीएम केयर फंड से नहीं की गई थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने जवाब में कहा कि गुजरात की ज्योति सीएनसी नाम की कंपनी से वेंटिलेटर खरीदे गए हैं, उसने बताया कि इनमें कोई खराबी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि हो सकता है डॉक्टरों को वेंटिलेटर चलाने न आ रहे हों।

जज ने कहा, ‘अस्पताल के लोग जो कुछ कह रहे हैं उस मामले में क्या केंद्र सरकार ने कोई कदम उठाया? आप देश के आम नागरिकों के प्रति ज्यादा चिंतित हैं या फिर गुजरात की कंपनी के प्रति? हलफनामे में जो बातें कही गई हैं उनसे लगता है कि आपको मरीजों के जीवनी की परवाह नहीं है।’

पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार का रवैया बहुत ही ख़राब है और ऐसा लगता है कि इस मामले को हल्के में लिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि आप इस मामले को कमज़ोर समझ सकते हैं लेकिन इस गंभीर स्थिति में आंख नहीं बंद की जा सकती है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 जून को होगी।

बता दें कि जब ये वेंटिलेटर तैयार हुए थे तो गुजरात के सीएम विजय रूपानी ने भी कहा था, मुझे खुशी है कि राजकोट के एक उद्योगपति ने 10 दिन में वेंटिलेटर बना दिए। इनकी पूरी तरह से टेस्टिंग भी की जा चुकी है। शनिवार से मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा।

जनसत्ता से साभार

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