दिल्ली नगर निगम के 49 सफाई कर्मियों सहित 94 कर्मियों की कोरोना से मौत

जातिवादी मानसिकता व ठेका प्रथा शोषण का मुख्य कारण

कोरोना महामारी के बीच सबसे अधिक जान जोखिम में डालकर काम करने वालों में शामिल सफाईकर्मियों के हाल बेहाल हैं। मार्च में शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली नगर निगम के कुल 94 कर्मचारियों की अब तक कोरोना के कारण मौत हुई है, इनमें से 49 सफाईकर्मी थे। सफाई कर्मचारी यूनियनों का कहना है ये मौतें सरकारी लापरवाही से हुई हैं।

दिल्ली के उत्तर, दक्षिण और पूर्व नगर निगमों दहला देने वाला यह तथ्य इंगित करता है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में कोरोना महामारी से सबसे अधिक त्रस्त सफाई कर्मी ही रहे हैं। इसीलिए जान गंवाने वालों में सफाई कर्मचारियों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है। मृतक 49 सफाई सफाईकर्मियों में नालों की सफाई में लगे नाला बेलदार भी हैं।

जोखिम भरे काम में लगे हैं फ्रंटलाइन सफाईकर्मी

मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 29 में से 16, उत्तरी दिल्ली नगर निगम में 49 में से 25 और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 16 में से 8 मौतें सफाई कर्मचारियों की हुई हैं, जो कोरोना के दौरान काम कर रहे थे।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि तीन निगमों में लगभग 52 हजार स्थाई व अस्थाई सफाई कर्मचारी हैं। दिल्ली में कोरोना महामारी फैलने के बाद से ही ये फ्रंटलाइन वर्कर सफाईकर्मी लगातर शहर में सफ़ाई व कचरा उठाने का काम कर रहे हैं।

अस्पतालों में साफ-सफाई से लेकर संक्रमित लोगों के घरों से कूड़ा उठाना और रोज का साफ-सफाई कार्य के साथ इनको सैनिटाइजेशन के कार्य भी लगाया गया। ऐसे जोखिम में कर्मचारी किसी न किसी तरह से संक्रमण की चपेट में आ ही जाते हैं।

मृतकों में स्वास्थ्य कर्मी व शिक्षक भी

शेष 45 मौतों में से 13 स्वास्थ्य कर्मी थे, जिनमें पाँच डॉक्टर भी हैं। दो डॉक्टर दक्षिणनगर निगम, एक पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल और एक उत्तरी दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में मेडिसिन के प्रोफेसर और वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे।

जबकि शिक्षा विभाग के सात अधिकारियों की कोरोना से मौत हुई, जिनमें से कुछ राशन वितरण में भी लगे हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार शिक्षक, दो प्रिंसिपल और एक स्कूल अटेंडेंट की भी मौत कोरोना के कारण हुई है।

सफाई कर्मचारी यूनियनों ने जताया रोष

सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू) ने दिल्ली के विभिन्न नगर निगम और दिल्ली सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के जरूरी उपायों में लगातार हो रही लापरवाही की कड़ी निंदा की और कहा कि एक प्रमुख अखबार में आई खबर के अनुसार विभिन्न नगर निगमों में कोविड-19 से मृतक हुए कर्मियों में आधे सफाई कर्मचारी हैं।  

दिल्ली नगर निगम सफाई मजदूर संघ के प्रभारी राजेंद्र मेवाती ने कहा कि सुपरवाइजर को मास्क दिए जाते हैं लेकिन शायद ही कभी कर्मचारियों को मास्क मिला हो। ज्यादातर होता है कि एक या दो पीड़ितों को लाभ दे दिया जाता है, पीड़ित परिवार के साथ फोटो खिंचवाकर अन्य लोगों की फाइलों को प्रक्रिया में रखा जाता है, जिससे अत्यधिक देरी होती है।

दिल्ली सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन संजय गहलोत ने बताया कि सफाई कर्मचारी के पास संसाधनों का अभाव रहता है। साथ ही वह ऐसे कार्य में रहता है जहां पर श्वास से जुड़ी दमे जैसी बीमारियां होने का ज्यादा खतरा रहता है। वहीं, उच्च रक्तचाप की भी बीमारी होती है। ऐसे में उन्हें कोरोना होता है तो उनके लिए वह अन्य लोगों की अपेक्षा में ज्यादा खतरनाक हो जाता है।

जातिवादी व वर्गीय भेदभाव से अनदेखी

एसकेयू के नेता हरीश गौतम ने जारी एक बयान में कहा कि सफाई कर्मियों की सुरक्षा में अनदेखी के पीछे समाज में व्यापक रूप से व्याप्त जातिवादी मानसिकता और वर्गीय भेदभाव हैं। बहुसंख्यक सफाई कर्मी दलित समुदाय से आते हैं और बेहद खराब हालातों में काम करने और रहने के लिए मजबूर हैं। इन आर्थिक व सामाजिक अक्षमताओं के चलते ही वे सरकार व अधिकारियों की उदासीनता का शिकार होते हैं।

ठेके पर नियुक्ति शोषण का मुख्य आधार

यूनियन नेता गौतम ने कहा कि सभी सरकारी विभागों में सफाई कर्मचारियों की ठेके पर नियुक्ति उनके लिए और भी मुश्किलें खड़ी करती हैं। सरकारी व निजी संस्थानों द्वारा ठेके पर नियुक्त किए गए सफाई कर्मियों को जरूरत अनुसार न तो मास्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं और न ही सैनिटाइज़र दिया जाता है। कोविड-19 की जांच करवाने में अनदेखी, जबरन काम पर बुलाया जाना बेहद आम है, जबकि जान का खतरा सभी को समान रूप से है।

हरीश गौतम ने अंबेडकर विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ विश्वविद्यालय अधिकारियों, दिल्ली के श्रम मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को तमाम माध्यमों से सूचित करने के बावजूद, लगातार लापरवाही बनी हुई है। इसी तरह के हालात दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थानों में भी देखने को मिल सकते हैं।

पीड़ित सफाई कर्मचारियों को मुआवजा और नौकरी की माँग

एसकेयू ने प्रेस बयान के माध्यम से मांग उठाई कि सभी सफाई कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी के साथ महामारी भत्ता सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यदि कोई सफाई कामगार संक्रमित हों, तो उन्हें और उनके परिवारों को अनिवार्य रूप से इलाज मुहैया किया जाए।

इसके अतिरिक्त, उन सभी सफाई कर्मचारियों के परिवारों को 1 करोड़ मुआवज़ा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, जिनकी महामारी के दौरान मृत्यु हुई है, और टीकाकरण प्रक्रिया में सफाई कामगारों को प्राथमिकता दी जाए।

दिल्ली नगर निगम सफाई मजदूर संघ ने भी मास्क आदि की उचित व्यवस्था के साथ ही, प्रत्येक सफ़ाई कर्मचारी को मौत के एक सप्ताह में 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और उनके आश्रितों के लिए स्थायी नौकरी देने की माँग की।

सफाई कामगार यूनियन ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को भी एक ज्ञापन भेजा है और कहा है कि वो प्रण लेते हैं कि आने वाले दिनों में सफाई कर्मचारी के प्रति उदासीनता के खिलाफ अपना आन्दोलन तेज़ करेंगे।

निगमों की घोषणा कागजी

पूर्वी दिल्ली के मेयर निर्मल जैन ने अखबार को बताया कि मंडल के प्रत्येक कर्मचारी जिनकी कोविड-19 से मृत्यु हुई है, उन्हें 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और एक योजना तैयार की जा रही है ताकि उनके परिवारों में किसी एक को नौकरी दी जा सके। सात लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है और शेष मामलों में कागजी कार्रवाई का इंतजार है।  

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक परिवार के एक आश्रित को नौकरी मिले और पांच से दस लाख रुपये के राहत कोष की व्यवस्था की जा रही हो।

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