मैनेजमेंट बदलते ही मदर डेयरी में लागू हुआ वीआरएस स्कीम

मैनेजमेंट बताता घटा है, सूत्र बताते 200 की होगी छँटनी

मौजूदा समय में देश सबसे भयावह स्वास्थ्य आपदा का सामना कर रहा है। सरकार और संस्थाएं नागरिकों और कर्मचारियों की मदद करने की कोशिश कर रही हैं।

इसी बीच राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी)  की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी- मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड (एमडीएफवीपीएल ) ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम (वीआरएस) की घोषणा की है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार इस स्कीम के तहत योग्य कर्मचारियों को अधितकतम 20 लाख रुपये दिए जाएंगे।

एमडीएफवीपीएल की पटपड़गंज, नई दिल्ली इकाई के लिए लाई गई वीआरएस योजना कर्मचारियों के लिए 31 मई तक उपलब्ध है। यह योजना कंपनी का चार्ज संभालने वाली नई मैनेजमेंट ने लिया है।

मई 2021 में मनीष बंदलिश ने मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर एमडीएफवीपीएल का चार्ज संभाला। वहीं वर्षा जोशी (संयुक्त सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार) ने मार्च 2021 में एनडीडीबी के चेयरपर्सन के तौर पर नियुक्त हुईं।

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए एमडीएफपीएल के प्रवक्ता ने बताया, ”हमने स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम की शुरुआत की है जिसमें हम अपने कर्मचारियों को स्वेच्छा से रिटारमेंट लेने की विकल्प दे रहे हैं। इस स्कीम में इंडस्ट्री के सर्वोत्तम लाभों को शामिल किया गया है। आगे 31 मई तक इच्छुक कर्मचारी स्वेच्छा से रिटारमेंट ले सकते हैं।”

कंपनी के अंदर बहुत से लोग इस वीआरएस स्कीम के समय को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कंपनी के एक सीनियर अधिकारी ने इस बारे में कहा, ”इस स्कीम को लाने का समय सही नहीं है। मैनेजमेंट ने करीब 200 कर्मचारियों को कम करने का लक्ष्य रखा है। अभी के समय में कोरोना से उत्पन्न हुए हालात के चलते  वैकल्पिक रोजगार को पाने के कर्मचारियों की कोशिश पर असर पड़ेगा।”

इस वीआरएस स्कीम को लाने की वजह कंपनी के पिछले दो सालों का घाटा बताया जा रहा है। दरअसल एमडीएफवीपीएल ने 31 मार्च, 2019 को खत्म हुए साल में 142 करोड़ और 31 मार्च 2020 को खत्म हुए साल में 249 करोड़ का घाटा उठाया था।

इससे जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह नुकसान विभिन्न खातों में हुआ है जिसमें 2018-19 में IL & FS में निवेश भी शामिल है जो फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ।

वर्कर्स यूनिटी से साभार

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