कतर में मज़दूरों के संघर्ष के बारे में लिखने पर केन्याई मज़दूर गिरफ़्तार

खाड़ी देश कतर में रहकर एक मामूली तनख्वाह पर काम करने वाले श्रमिक को आने वाली परेशानियों और दिक्कतों के बारे में छद्म नाम से दमदार लेख लिखने वाले और अपने अधिकारों की वकालत करने वाले एक केन्याई मज़दूर और ब्लॉगर मैल्कम बिदाली को गिरफ़्तार कर लिया गया।

बिदाली की अचानक गिरफ्तारी 2022 फीफा विश्व कप की मेजबानी करने वाले इस देश में अभिव्यक्ति की सीमा और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है। लेकिन इस खाड़ी देश में यह शायद पहली बार नहीं हो रहा है। खाड़ी देशों में मजदूरी करने वाले प्रवासी मजदूरों को अमानवीय स्थितियों में काम करना पड़ता है यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है। एशिया और अफ्रीका के मजदूरों के साथ यहां दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है।

खाड़ी देशों में प्रवासी मजदूरों की अमानवीय स्थिति है

काम मिलने के वादे पर कई देशों के प्रवासी मजदूर इन खाड़ी देशों में काम करने आते हैं और गगनचुंबी इमारतों के नीचे घंटों खटने पर मजबुर हैं। इस घटना से जाहिर है कि इन मजदूरों को क्या झेलना पड़ता है? क्या व्हाइट कॉलर जॉब के अलावा रोजमर्रा के काम करने वाले मजदूरों को सम्मानजनक निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए?

बिदाली के दोस्तों के अनुसार वो 4 मई की रात से कतर पुलिस की हिरासत में है।

कतर सरकार ने मंगलवार को एसोसिएटेड प्रेस के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बिदाली को “कतर के सुरक्षा कानूनों और नियमों का उल्लंघन करने पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।” यह नहीं बताया गया कि बिदाली को इस वक्त कहां रखा गया है?

28 वर्षीय बिदाली, सुरक्षा गार्ड के रूप में 12 घंटे की ड्यूटी करते थे। अपने खाली समय में, वो “नूह” नाम से एक गार्ड के काम के अपने अनुभवों के बारे में ब्लॉग लिखते थे और उनकी कोशिश थी कि एक मजदूर के तौर पर उन्हें बेहतर सुविधाएं मिले। बिदाली के लेख इतने असरदार थे कि उनके लेखों ने कई बार कतर में “कई मामलों में नई परिपाटी शुरू की”।

बिदाली अपने लेखों में बताया कि- एक कमरे में 10 से ज्यादा लोग एक साथ रहते थे। उन्हें इस बात की निराशा थी कि उन्हें किसी प्रकार की प्राइवेसी का अधिकार नहीं है लेकिन पश्चिम के सफेदपोश विदेशी और कतर के अमीर निजी जीवन जीने का आनंद लेते हैं।

सवाल पूछना गुनाह है?

उन्होंने एक लेख में सवाल उठाते हुए लिखा कि
” निजता और यहां तक कि पारिवारिक जीवन पर भी खास अधिकार प्राप्त कुछ देशवासियों और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों का ही अधिकार क्यों हो?” मजदूरों के खुलकर पारिवारिक जीवन जीने पर पाबंदी क्यों है?

बिदाली की नजरबंदी या गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट नहीं है। कुछ दिन पहले वे सिविल सोसाइटी और ट्रेड यूनियन समूहों के साथ अनुभव साझा करते हुए एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में दिखाई दिए थे। विरोध करने वालों पर खाड़ी देश जासूसी सॉफ्टवेयर और हैकिंग के जरिए कड़ी निगरानी रखते हैं।

हाल ही में उन्होंने एक लेख में कतर के पूर्व अमीर की पत्नी और कतर फाउंडेशन की प्रमुख शेखा मोजा बिन्त नासिर का नाम लेकर आलोचना की थी। बिदाली, कतर फाउंडेशन के देखरेख में बन रहे जीएसएस सर्टिस के लिए सुरक्षा गार्ड का काम कर रहे थे। फाउंडेशन ने इस मामले में अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

बिदाली के दोस्तों और जीएसएस सर्टिफिकेट के दूसरे कर्मचारियों को नहीं पता कि बिदाली कहां है।

कतर में दो कंपनियों के सुरक्षा गार्डों ने भी हाल ही में वेतन और काम के मुद्दों पर हड़ताल करने की कोशिश की थी।

वाशिंगटन स्थित समूह फ्रीडम हाउस के अनुसार, कतर के जनरल यूनियन ऑफ वर्कर्स के साथ केवल कतर के नागरिकों को ही हड़ताल करने का अधिकार है। कतर में अगर कोई “विदेशी मज़दूर और घरेलू कामगार “मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो वे निर्वासन का जोखिम उठाते हैं यानि उन्हें जबरदस्ती अपने देश वापस भेज दिया जाता है।”

शायद बिदाली ने यह दोनों जोखिम उठाए हैं।

कतर स्थित केन्याई दूतावास ने इस मामले में टिप्पणी के लिए भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल, फेयरस्क्वेयर और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे मानवाधिकार समूहों ने कतर के अधिकारियों को पत्र लिखकर आशंका जताई है कि बिदाली को “अब तक किसी वकील या कांउसलर की सहायता नहीं दी गई है”।

कतर, अरब प्रायद्वीप पर एक छोटा सा राष्ट्र है। कतर का अल-जज़ीरा समाचार नेटवर्क, राज्य द्वारा वित्त पोषित है। हालांकि, इस खाड़ी देश में अभिव्यक्ति पर कड़ा नियंत्रण है। यहां नागरिकों को निजी बातचीत करने की थोड़ी बहुत इजाज़त है मगर विदेशी नागरिकों और श्रमिकों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। सोशल मीडिया पोस्ट पर सरकार के खिलाफ कुछ राजनीतिक टिप्पणी करना दंडनीय अपराध है।

खाड़ी देशों की चकाचौंध प्रवासी मजदूरों के श्रम पर ही निर्भर है। अभी भी सामंती मानसिकता से ग्रसित तेल के अथाह कुएं वाले इन देशों में असहमति की आवाज उठाने वालों का सर अकसर कलम कर दिया जाता है। खाड़ी देशों में पत्रकारों पर भी कई तरह की पाबंदियां है। ऐसे में इन खाड़ी देशों में मैल्कम बिदाली का अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना बहुत महत्वपूर्ण है। सोचिए कितनी सतर्कता और निगरानी है कि एक मजदूर के आवाज उठाने पर पूरी व्यवस्था चौकस हो जाती है और उसे गायब कर दिया जाता है।

मूल खबर “एसोसिएटेड प्रेस” की है।

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