उच्च न्यायालय ने सेंट्रल वेयर हाउसिंग मज़दूरों की बहाली का दिया आदेश

प्रबंधन ने मज़दूरों को अवैध तरीके से निकाला था

दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को 36 सालों से सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) पटपड़गंज में काम कर रहे 318 मज़दूरों की पुनःबहाली का आदेश दिया है। इस साल जनवरी में अचानक निकाले गए मज़दूरों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी।

ठेकेदार बदलने के बहाने केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली इस वेयर हाउस के प्रबंधन ने बीते 6 जनवरी को मज़दूरों को निकाल दिया था। निकले गए 318 मज़दूर लोडिंग-अनलोडिंग के कार्य में 1985 से कार्यरत थे।

मज़दूर हुए आंदोलित

मज़दूर इस अन्याय के खिलाफ आंदोलित हो गए। 6 जनवरी से ही मज़दूर सीडब्ल्यूसी आईसीडी, पटपड़गंज में प्रदर्शन जारी रखा। मजदूरों ने जनरल मजदूर लाल झंडा यूनियन (सीआईटीयू) के बैनर तले  सीरी फोर्ट इंस्टिट्यूशनल एरिया स्थित सीडब्ल्यूसी एमडी के मुख्यालय के समक्ष रोष प्रदर्शन किया।

7 जनवरी 2021 को जरनल मज़दूर लाल झंडा यूनियन (सीटू) के सदस्य मजदूरों ने वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल व अनुज अग्रवाल के माध्यम से दिल्ली उच्च न्यायालय में वाद दाखिल किया था। सोमवार को कोर्ट ने मज़दूरों के पक्ष में फैसला दिया।

न्यायालय ने अपने अहम फैसले में इसे अवैध बताते हुए सभी मज़दूरों को बहाल करने का आदेश दिया है। साथ ही इस कृत्य में मुख्य नियोजक सीडब्ल्यूसी के प्रबंधन की गलत भूमिका की आलोचना भी की है।

इससे मज़दूरों में खुशी लहर है। उधर सीडब्ल्यूसी इस आदेश को उच्च न्यायालय की डिवीजनल बेंच के समक्ष चुनौती देने की तैयारी में है। मज़दूर उसका भी मुकाबला करेंगे।

क्या है मामला

पिछले साल दिसंबर में, सीडब्ल्यूसी के पटपड़गंज डिपो प्रबंधन पूर्ववर्ती ठेकेदार “सुमन फॉरवर्डिंग एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड” को हटाकर “राहुल रोडवेज” को लाया। नए ठेकेदार ने पिछले संविदा कर्मचारियों को बहाल करने से इनकार कर दिया। जिसे मज़दूरों ने कोर्ट में चुनौती दी।

13 जनवरी को, एक अंतरिम आदेश में, उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक पीड़ित श्रमिकों के संबंध में नए ठेकेदार को “यथास्थिति बनाए रखने” का निर्देश दिया था। हालाँकि प्रबंधन और ठेकदार ने इसे भी लागू नहीं किया था।

प्रबंधन ने अंतरिम आदेश को नहीं माना

मज़दूर पक्ष ने 20 जनवरी को अदालत में एक आवेदन दायर करके बताया कि नए ठेकेदार ने श्रमिकों को कार्य पर नहीं लिया है। उन्होंने अदालत से अपने अंतरिम आदेश को “स्पष्ट” करने के लिए कहा है। आवेदन में कहा गया है कि श्रमिकों ने आखिरी बार अपने “मुख्य नियोक्ता” सीडब्ल्यूसी के साथ 5 जनवरी तक काम किया था।

सीडब्ल्यूसी प्रबंधन ने 8 फरवरी को जवाब दाखिल करके अदालत को बताया कि उसके और श्रमिकों के बीच “नियोक्ता और कर्मचारी का कोई संबंध नहीं है” और इन्हे पूर्व ठेकेदार द्वारा “नियोजित” किया गया था।

अदालत ने मज़दूरों के पक्ष में दिया फैसला

मज़दूरों ने तर्क दिया कि चूंकि श्रमिकों के नियमितीकरण से संबंधित विवाद वर्तमान में केंद्र सरकार के औद्योगिक न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) के समक्ष लंबित है, इसलिए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 33 के तहत सुलह प्रक्रिया के लंबित रहने के दौरान नियोक्ता को कामगारों की सेवाओं की शर्तों में “बदलाव” नहीं कर सकता है।

मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जो कर्मचारी 05.01.2021 तक एसएफपीएल (सुमन फॉरवर्डिंग एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड) के रोल में थे यानी वो काम कर रहे थे,  उन्हें सीडब्ल्यूसी अपने संबंधित प्रतिष्ठान में वापस काम पर रखेगा, वो भी समान नियम और शर्तों पर।  

न्यायलय  ने सोमवार को सीडब्ल्यूसी को आदेश का पालन करने का निर्देश दिया और कहा जब तक कि ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित कार्यवाही में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता है तब तक मज़दूरों को नहीं निकला जा सकता है।

मज़दूरों के स्थाईकरण का वाद भी है जारी

विभिन्न ठेकेदारों के तहत 30-35 वर्षों से सीडब्ल्यूसी में काम कर रहे श्रमिकों के एक पक्ष ने 2015 में औद्योगिक न्यायाधिकरण में वाद दायर किया है, जिसमें तर्क दिया गया है कि उनके द्वारा किए गए कर्तव्य “बारहमासी” प्रकृति के हैं। इस आधार पर नियमितीकरण की माँग की है, जो वाद अभी विचाराधीन है।

दरअसल ठेका श्रमिक (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत स्थाई प्रकृति के काम पर ठेका श्रमिकों का रोजगार प्रतिबंधित है।

सीडब्ल्यूसी केंद्र सरकार का मिनी रत्न उद्यम है

सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) अनुसूची ‘ए’- मिनी रत्न उद्यम है। ये केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। देश भर में  इसके 415 गोदामों और 25 आईसीडी के साथ, यह कृषि क्षेत्र को सहायता प्रदान करता है, जिसमें वेयर हाउसिंग गतिविधियां शामिल हैं जो खाद्यान्न, या अन्य अधिसूचित वस्तुओं के भंडारण का कार्य करती हैं।

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