सरकार मीडिया में अपनी छवि बनाने के बजाय, संघर्षरत किसानों से बातचीत कर माँगें माने

किसानों के धरने में मना ईद का त्यौहार, बाँटने वाली ताकतों को करारा जवाब

सयुंक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने PM किसान सम्मान योजना की 8 वीं क़िस्त जारी की। यह अफसोसजनक है कि एक निरन्तर चल रही योजना को बार बार त्यौहार की तरह पेश किया जाता है सिर्फ छवि चमकाने की कोशिश की जाती है।

एक तरफ जहां 450 के करीब किसानों की इस आंदोलन के दौरान मौत हो गयी है व किसान 5 महीनों से ज्यादा सड़को पर समय गुजार रहे है, उस समय सरकार सिर्फ कुछ पैसे की क़िस्त भेज कर किसानों का सम्मान करने का दिखावा कर रही है, हम इसकी निंदा करते है।

इसलिए सयुंक्त किसान मोर्चा इसे किसान सम्मान की बजाय किसान अपमान की तरह देखता है। किसानों का असली सम्मान तभी होगा सभी फसलों पर सभी किसानों को C2+50% फार्मूला पर MSP की कानूनी गारन्टी मिलेगी व सही खरीद होगी।

वर्तमान में पूरे देश के किसानो की सबसे बड़ी आ सार्वभौमिक आवश्यकता न्यूनतम समर्थन मूल्य है जो वे अपनी फसलों पर चाहते है। किसान पूरी मेहनत करके भी अपनी फसलों के भाव नहीं ले पाते है। आज अपने भाषण में प्रधनमंत्री ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले गेहूं की MSP पर खरीद इस साल 10% ज्यादा हुई है।

सरकार न तो कभी जनता को आश्वस्त कर पाई है व न ही किसान संगठनों के साथ बैठकों में समझा पाई है कि सभी किसानों को सभी फसलों पर MSP मिलेगा। जब सरकार यह कहती है कि MSP पर वर्तमान प्रणाली चलती रहेगी तो यही कहना चाहती है कि किसान MSP से वंचित रहेंगे। प्रधानमंत्री ने आज के भाषण में सिर्फ गेहूं के MSP के बारे में बात की परंतु बाकी फसलों के भाव की लूट के बारे में चुप रहे।

भाषण में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज दिया जा रहा है। परन्तु सच यह है कि तीन कृषि कानूनो के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी। खेती सेक्टर में कॉरपोरेट के प्रवेश होने व आवश्यक वस्तुओं पर स्टॉक लिमिट हटाने के बाद PDS सिस्टम भी बंद हो जाएगा व देश की अधिकांश गरीब जनता भुखमरी से मर जाएगी। सयुंक्त किसान मोर्चा का संघर्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर है।

यह बहुत निंदनीय है कि प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री देश ने आज के कार्यक्रम में एक बार भी प्रदर्शनकारी किसानों का नाम नहीं लिया। पिछले साढ़े पांच महीनों से सड़को पर समय गुजार रहे किसानों से सरकार आत्मसम्मान छीन कर उन्हें बदनाम कर रही है। किसान को चरमपंथी, कट्टरपंथी व अन्य शब्दों का प्रयोग कर बदनाम किया गया है टेलीविजन पर किसान सम्मान शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। हम इसकी कड़ी निंदा करता है।

22 जनवरी के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत नहीं कि है। आज के प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भी सुनियोजित तरीको से पहले से तैयार बातचीत के फॉरमेट पर ही कुछ किसानों से बातचीत हुई। सरकार मीडिया में अपनी छवि के बजाय दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से बातचीत करे व किसानों की मांगे माने।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने एक बार फिर किसान विरोधी चेहरा दिखाया है। अपने शासन व्यवस्था की नाकामी का ठीकरा किसानों पर फोड़ते हुए खट्टर ने कहा है कि किसानों की वजह से कोरोना फैला है। यह बहुत निंदनीय बयान है, हम इसका विरोध करते है। हरियाणा सरकार किसानों के जज्बे व हौसलें को तोड़ना चाहती है जिसे किसान नहीं टूटने देंगें।

सिंघु बॉर्डर पर आज ईद भी मनाई गई। इस आंदोलन की शुरुआत से ही मुस्लिम समुदाय के लोगो ने खुले मन से सेवा दी है। लंगर से लेकर हर प्रबंधन में सहयोग किया है। किसानों के धरने में आज ईद का त्यौहार मनाया गया व किसानों को धर्म के आधार पर बांटने वाली ताकतों को करारा जवाब दिया गया।

जारीकर्ता – बलवीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हनन मौला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उग्राहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़

सयुंक्त किसान मोर्चा

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