भारत में कुंभ और चुनाव की वजह से कोरोना संक्रमण फैला: विश्व स्वास्थ्य संगठन


भारत में कोविड-19 संक्रमण के फैलाव के लिए कुंभ और चुनाव में जुटने वाली भीड़ जिम्मेदार है। कुंभ और चुनाव के आयोजन के जिम्मेदार लोग कौन है ? सरकार और प्रशासन, लाख़ बात को घुमाने का प्रयास करें, गुनहगार कौन है? सब जानते हैं। यही बात अब विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने रिपोर्ट के जरिए कह रहा है।

बंगाल चुनाव में अमित शाह की रैली

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत में कोविड-19 के बढ़ते खतरे के आकलन से यह बात सामने आई है भारत में कोविड-19 के दोबारा उबरने और संक्रमण के तेजी से फैलने के पीछे कई गम्भीर कारक थे जिसमें “धार्मिक और चुनावी राजनीतिक जमावड़े” प्रमुख रूप से जिम्मेदार है जिसकी वजह से सामाजिक आयोजनों को बढ़ावा मिला। इसके अलावा सामाजिक स्वास्थ्य व्यवस्था और कोविड अनुरूप सामाजिक व्यवहार को लगातार नजरअंदाज किया गया और इनपर पर कम ध्यान दिया गया।

भारत में फ़रवरी, मार्च और अप्रैल में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के बढ़ते मामलों के बावजूद पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए गए। जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी राजनीतिक पार्टियों ने कोविड-19 गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए चुनाव आयोग की निगरानी में बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां की जिसने कोविड-19 के प्रचार प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई।

राहुल गांधी चुनाव प्रचार करते हुए

उसके बाद मार्च अप्रैल महीने में ही उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ मेला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए कुंभ स्नान और आस्था के नाम पर देशभर से लाखों लोगों की भीड़ को हरिद्वार में इकट्ठा किया गया, जिसने कोविड-19 के संक्रमण के फैलने में बड़ी भूमिका निभाई। हरिद्वार कुंभ से वापस लौटने वाले लोग अपने-अपने राज्यों में बड़ी संख्या में संक्रमण लेकर वापस लौटे। कुंभ के आयोजन के लिए उत्तराखंड में नए मुख्यमंत्री तक की स्थापना कर दी गई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को प्रकाशित अपने COVID-19 वीकली एपिडेमियोलॉजिकल अपडेट में कहा कि B.1.617 प्रजाति के वायरस पहली बार भारत में अक्टूबर 2020 में सामने आए थे। हालांकि इन कारकों की वजह से भारत में संक्रमण का कितना फ़ैलाव हुआ है इसका सटीक अनुमान लगाना अभी तक संभव नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने B.1.617 वायरस को पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बताया।

” विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार भारत में COVID-19 मामलों में दुबारा उभार और बढ़ती मौतों ने B.1.617 और तेजी से फैलने वाले अन्य वेरिएंट्स (जैसे, B.1.1.7) की संभावित भूमिका पर सवाल उठाए हैं।”

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की वजह से कोविड-19 की दूसरी लहर में तेजी से संक्रमण फैला जिसकी वजह से पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले हजारों शिक्षकों की मौत हुई और ग्रामीण क्षेत्र भी कोविड-19 के भयानक संक्रमण की चपेट में आ गए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति यह है कि लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है, मरने पर अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है, मृत शरीर को लोग नदियों में प्रवाहित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पंचायत चुनाव के आयोजन की आलोचना की थी और राज्य सरकार तथा चुनाव आयोग को कोविड-19 संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार संक्रमण के फैलाव को रोकने और बीमार संक्रमितों के इलाज की व्यवस्था करने में बुरी तरीके से नाकाम रही है।

कोविड की वजह से बिगड़ते हालात पर संज्ञान लेते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने भी महामारी के दौरान चुनाव आयोजित करवाने के लिए चुनाव आयोग को कोविड से होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को जनता की जान से ज्यादा सरकार बनवाने की चिंता है।

पूरी दुनिया में मोदी सरकार द्वारा महामारी के दौरान कुंभ स्नान और चुनाव के आयोजन करवाए जाने की गंभीर आलोचनाएं हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मेडिकल जर्नल्स में लगातार मोदी सरकार के कोविड-19 महामारी से निपटने में विफलता और आंकड़ों को छुपाए जाने की आलोचना हो रही है। आखिर कुंभ के आयोजन और चुनाव करवाए जाने की क्या जल्दी थी?

अब तो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य स्वास्थ्य सलाहकार और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ एंथनी फ़ॉची ने भी कह दिया कि कोरोना के मामले में भारत की स्थिति इतनी ख़राब इसलिए है कि उसने यह ग़लत धारणा बना ली थी कि कोरोना ख़त्म हो गया और समय से पहले ही स्थिति सामान्य कर ली।

स्विटज़रलैंड स्थित इंडीपेंडेंट पैनल फॉर पैंडेमिक प्रीपेयर्डनेस एंड रिस्पॉन्स (आईपीपीपीआर) ने भी कहा कि स्थिति सुधारी जा सकती थी लेकिन जिम्मेदार लोगों ने एक के बाद एक गलत फैसले लिए। संस्थाएं लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा पाने, उनकी सुरक्षा करने में नाकाम रही। कोरोना के इलाज में गैर वैज्ञानिक तरीके को बढ़ावा दिया गया जिस वजह से मृतकों की संख्या बढ़ी। बात सही है भारत में रामदेव के कोरोनिल, गोबर, नींबू, आयुष काढ़ा से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीके से कोरोना का उपचार किया जा रहा था। केंद्र सरकार के कई मंत्री बाबाओं के साथ मिलकर आयुर्वेद के नाम पर चूरन बेच रहे थे।

गलती को स्वीकार करने और आलोचना पर मंथन करने की जगह आत्ममुग्ध और दंभी राजा ने बीजेपी आईटी सेल और चाटुकार पत्रकारों को आलोचकों और विरोधियों के ट्रोलिंग और अपनी महान छवि के निर्माण के लिए काम पर लगा रखा है।

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