रेलवे: अबतक 1,952 कर्मचारियों की कोरोना से मौत

रेलवे के क़रीब 1,952 कर्मचारियों की मार्च 2020 से लेकर अब तक कोरोना से मौत हो चुकी है। प्रतिदिन 1000 रेलवे कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। इस प्रकार अब तक 1 लाख़ से ज्यादा रेलवे कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। यह सारी सूचना रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने सोमवार को दी।

रेलवे के अस्पतालों में 4000 से ज्यादा बेड रेलवे कर्मचारियों से भरे पड़े हैं। रेलवे ने करीब 74 से ज्यादा अस्पताल कोरोना संक्रमित रोग के इलाज के लिए सुरक्षित कर रखे हैं।

रेलवे के कर्मचारियों की संख्या 12 लाख से ज्यादा है। रेलवे भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है। ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के अनुसार अभी तक 113 स्टेशन मास्टर कोविड 19 का शिकार हो चुके हैं। रेल सुरक्षा बल(आरपीएफ) के 50 कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

रेलवे बोर्ड और विभिन्न रेल डविजन को पत्र लिखकर एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करते हुए 50 लाख़ रुपए की बीमा सहायता राशि देने और तुरंत वैक्सीन लगाने की मांग की है।

कई स्टेशन मास्टर लगातार संक्रमित होकर बीमार पड़ रहे हैं। इस वजह से दूसरे लोगों पर काम का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि स्टेशन को स्टेशन मास्टर के बिना नहीं छोड़ा जा सकता। संक्रमित होने वाले ज्यादातर कर्मचारी वह लोग हैं जिन्हें आम जनता से लगातार संपर्क करना होता है।

जब फ्रंटलाइन वर्कर्स, रेलवे मेडिकल स्टाफ और आरपीएफ कर्मियों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया तब टिकट चेकर्स, स्टेशन मास्टर्स, ड्राइवर , गार्ड और ठेके पर लगे सफ़ाई कर्मचारियों को टीकाकरण अभियान में शामिल नहीं किया गया। रेलवे जोन स्तर पर राज्य सरकारों के साथ मिलकर अपने कर्मचारियों के लिए कोरोना टीकाकरण अभियान चला रही है।

वहीं रेलवे कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन और यूनियन ऑल इंडिया रेलवे कर्मचारी संघ ने कुछ दिनों पहले ही रेल मंत्री पीयूष गोयल से कोरोना महामारी के दौरान जान गवाने वाले रेलवे कर्मचारियों के लिए दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर की तरह 50 लाख़ रुपए की बीमा सहायता राशि देने की मांग की थी। कोरोना से प्रभावित और मृत रेलवे कर्मचारियों के आश्रितों को 25 लाख रुपए बीमा राशि दी जाती है। जिसको लेकर पिछले साल भी रेलवे की यूनियनों और कर्मचारी संघों ने अपना विरोध दर्ज कराया था। रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाली सहायता राशि पेंशन विभाग की ओर से एक्स ग्रेशिया राशि के तौर पर दी जाती है। हालांकि पेंशन विभाग की इस योजना में किसी बीमारी से ग्रसित होने पर सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान नहीं है।

हालांकि कोविड ड्यूटी में लगे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलने वाली 50 लाख रुपए की बीमा सहायता राशि योजना अप्रैल में ख़तम हो गई थी।

ऑल इंडिया रेलवेमैन फ़ेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा के अनुसार अभी तक एक लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं जिनमें से 65000 स्वस्थ होकर अपनी ड्यूटी वापस ज्वाइन कर चुके हैं और 1500 से ज्यादा कर्मचारी अपनी जान गवां चुके हैं। इसलिए रेलवे कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स का दर्जा दिया जाना चाहिए।

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