लॉकडाउन की सारी बंदिशें तोड़ते हुए लुधियाना में मज़दूर दिवस सम्मेलन

पुलिस द्वारा कर्फ्यू के बहाने रोकने की कोशिश नाकामयाब

लुधियाना। पंजाब में दमनाकारी लॉकडाउन के बाजजूद आज (1 मई) मज़दूर संगठनों ने लुधियाना में अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाते हुए मज़दूर दिवस सम्मेलन का आयोजन किया। पुलिस ने कर्फ्यू के बहाने सम्मेलन को स्थगित करवाने की कोशिश की। संगठनों के अडिग रहने पर पुलिस ने सिर्फ आधे घंटे का समय दिया, लेकिन ढाई घंटे का कार्यक्रम हुआ।

लुधियाना के विभिन्न इलाकों से मज़दूर जोश-ओ-खरोश के साथ, गगनभेदी नारे बुलंद करते हुए सम्मेलन में पहुँचें। वक्ताओं ने भाषण में मई दिवस की क्रांतिकारी विरासत, मौजूदा हालतों, मज़दूरों मेहनतकशों के सामने पेश चुनौतियों, कोरोना ड्रामे, थोपी जा रही नाजायज पाबंदियों, छीने जा रहे अधिकारों आदि के बारे में खुलकर बात रखी। क्रांतिकारी नाटक-गीत पेश हुए। सम्मेलन के दौरान लोगों ने पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ इंकलाबी नारे बुलंद किए।

टेक्सटाइल हौज़री कामगार यूनियन और कारखाना मज़दूर यूनियन ने नौजवान भारत सभा के सहयोग से ‘मज़दूर दिवस संमेलन’ आज मज़दूर पुस्तकाल्य, ई.डब्ल्यू.एस कालोनी, ताज़पुर रोड, लुधियाना में हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत मज़दूर वर्ग के संघर्षों व कुरबानियों के प्रतीक लाल झंडे को लहराकर गगन भेदी नारों से की गई। अलग-अलग वक्ताओं ने मई दिवस के इतिहासिक महत्व व देश-दुनिया के हालातों व मज़दूर वर्ग के समक्ष चनौतियों पर बातचीत की। नौजवान भारत सभा की ओर से क्रांतिकारी गीतों व नाटकों का कार्यक्रम पेश किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि मई दिवस मज़दूरों के संघर्षों का प्रतीक है। दुनिया भर में हर वर्ष 1 मई ‘आठ घंटे काम, आठ घंटे आराम, आठ घंटे मनोरंज़न’ की माँग को लेकर हुए संघर्ष के दौरान कुर्बान हुए मज़दूर शहीदों की य़ाद में मनाया जाता है। मई दिवस के शहीदों के विचार, उनकी शहादतें, उनका जीवन शोषित जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि यह दिन मज़दूर-मेहनतकशों के लिए सबक है कि सरकार व पूँजीपतियों ने कभी भी मज़दूरों को कोई हक-अधिकार थाली में परोस कर नहीं दिया, बल्कि मज़दूर वर्ग के एकजुट संघर्षों, कुर्बानियों, शहादतों की बदौलत हमें विभिन्न अधिकार हासल हुए हैं।

वक्ताओं ने कहा कि जब भी सरकारें व पूँजीपति मज़दूरों की एकता को कमज़ोर देखते हैं तो उन्के अधिकारों पर हमला कर देते हैं। पिछले एक साल से केंद्र में बैठी मोदी सरकार व पंजाब की कैप्टन सरकार ने करोना व लाकडाउन की आड़ में मज़दूरों के पक्ष में बने श्रम कानूनों में संशोधन तेजी से किए है।

पहले मोदी सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म करके 4 कोड बना दिए और अब कैप्टन सरकार ने मज़दूरों के पक्ष में बने नियम व शर्तों से पूँजीपतियों का छुटकारा करवा दिया है। इसके नतीजे में मज़दूरों का आर्थिक शोषण तेज़ होगा और कारखानों में हादसों से सुरक्षा का प्रबंध न होने के चलते मज़दूरों की मौत दर बढेगी।

हुकमरानों द्वारा फैलाया जा रहा कोरोना का डर कृषि-कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले एक साल कोरोना की आड़ में लॉकडाउन लगाकर सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है जिसके चलते लोगों को मिलने वाली सुविधाओं कर कटौती की जा रही है। महंगाई बढ़ रही है। निजीकरण की आँधी के दुशप्रभाव एक बार फिर से साफ़ दिखाई दे रहे है, सरकारी हस्पतालों की जर्जर हालत, आम बीमारियों की बिना इलाज़ व ऑक्सीजन की कमी के चलते लोग मर रहे हैं।

पाँच राज्यों में चुनाव के चलते सभी वोट पार्टीयों ने बडी-बडी रैलियां की, कुंभ का मेला करवाया गया लेकिन हक-अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को दबाने के लिए सरकारें पाबंदियों का सहारा ले रही हैं। करोना एक आम मौसमी बीमारी है व इसकी असलीयत को समझते हुए लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

सम्मेलन को टेक्सटाइल हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविंदर, कारखाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविंदर, नौजवान भारत सभा के नेता नवजोत, मुक्ति संग्राम की ओर से जसमीत ने संबोधित किया। नौजवान भारत सभा और कारखाना मज़दूर यूनियन के साथियों ने क्रांतिकारी नाटक-गीत पेश किए। मंच संचालन जगदीश ने किया।

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