दमन : श्रमिक संयुक्त मोर्चा नेताओं पर शांति भंग की आशंका का केस दर्ज

कोर्ट के आदेश पर कार्यबहाली नहीं, पीएफ घोटाले पर प्रबंधन की गिरफ्तारी नहीं, लेकिन मज़दूरों पर मुक़दमे

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। इलाके में जैसे ही मज़दूर यूनियनें संगठित हुई और श्रमिक संयुक्त मोर्चा मजबूती के साथ मज़दूरों की आवाज उठाने लगा, प्रशासन ने दमन का हथियार चला दिया। श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष व महासचिव सहित चार नेताओं पर उसने कथित शांति भंग की आशंका का मुकदमा दर्ज कर दिया है।

जिला प्रशासन जारी मज़दूर आंदोलनों को कुचलने के लिए कोविड-19 को अवसर बनाते हुए श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश चंद तिवारी, महासचिव चंद्र मोहन लखेडा, वोल्टास इम्पलाइज यूनियन के महामंत्री दिनेश चंद्र पंत और भगवती माइक्रोमैक्स के श्रमिक नेता नंदन सिंह के ऊपर शांति भंग की कथित आशंका के आधार पर धारा 107/116 का मुकदमा दर्ज कर दिया है!

आदेश में एक वर्ष की अवधि के लिए सदाचार कायम रखने के लिए ₹50000 के दो बंधपत्र भरने का फरमान सुनाया है। आरोप है कि सिडकुल क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन करते हैं, जुलूस व बाइक रैली निकलते हैं। यानी विरोध के संवैधानिक अधिकार भी अपराध हैं।

उल्लेखनीय है कि उधम सिंह नगर जिले में मज़दूरों की जटिल और विकट समस्याओं को लेकर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने लगातार आवाज बुलंद की। वर्तमान में चल रहे भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड माइक्रोमैक्स के 303 श्रमिकों की कोर्ट के आदेश पर कार्य बहाली और वोल्टास लिमिटेड में 9 श्रमिकों की गैरकानूनी गेट बंदी खुलवाने सहित विभिन्न कंपनियों के मुद्दों को लेकर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने लगातार सक्रियता दिखलाइए।

4 माह पूर्व जिलाधिकारी ने श्रमिक समस्याओं के निस्तारण के लिए एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक कमेटी का गठन किया था और 1 महीने में समस्त श्रमिक समस्याओं का निस्तारण करने का आश्वासन दिया था। लेकिन कुछ एक वार्ताओं की खानापूर्ति के अलावा कमेटी ने कुछ नहीं किया। यहाँ तक कि मोर्चा से वार्ता करने से भी प्रशासन कतराने लगा।

इस बीच श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने वोल्टास मज़दूरों के पक्ष में आवाज उठाई और समर्थन में उनके धरना स्थल पर प्रतिदिन एक यूनियन के प्रतिनिधि क्रमिक अनशन पर बैठने लगे। अबतक राने मद्रास, थाई सुमित नीला ऑटो (जेबीएम), नेस्ले इंडिया की दोनों यूनियनें, बजाज मोटर्स, यजाकी के प्रतिनिधि क्रमवार अनशन पर बैठ चुके हैं और उनकी शिफटें भी समर्थन में आती रहीं।

इससे पुलिस और प्रशासन में खलबली बढ़ गई और उसने दमन का यह रास्ता चुना। वह भी ऐसे समय में जब जिले में 3 मई तक लॉकडाउन लगी हुई है। पंतनगर पुलिस चौकी द्वारा मोर्चा प्रतिनिधियों को बुलाकर यह नोटिस थमाई गई। खबर यह भी मिली है कि वोल्टास लिमिटेड के जो श्रमिक पिछले दिनों हड़ताल करके कंपनी के अंदर बैठे थे, उनके लिए भी पुलिस नोटिस लेकर पहुंची।

पुलिस प्रशासन की दमनकारी नीति के खिलाफ मज़दूरों में बेहद रोष व्याप्त है। मोर्चा प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन पूरी तरीके से कंपनियों की सिडकुल वेलफेयर एसोसिएशन के दबाव में है और उसी के निर्देश पर वह काम कर रही है।

सवाल साफ है, जो प्रशासन गुजरात अंबुजा सितारगंज के प्रबंधन पर पीएफ और ईएसआई के घोटाले का कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं करती है, जो प्रशासन कोर्ट के आदेश के बावजूद भगवती माइक्रोमैक्स के श्रमिकों की कार्यबहाली नहीं करा रहा है, जो प्रशासन उप श्रम आयुक्त द्वारा वोल्टास मजदूरों की गेट बंदी को अवैध करार देने के बावजूद कार्य बहाली नहीं करा रहा है, उसी प्रशासन ने शांति भंग की आशंका का हवाला देकर मुकदमा दर्ज कर दिया।

यह भी ध्यान देने की बात है कि दो साल पहले भगवती माइक्रोमैक्स और इंटरार्क के मज़दूरों का आंदोलन चल रहा था, उस वक्त लोकसभा चुनाव की आड़ में चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर इन दोनों कंपनियों के मज़दूरों को चुनाव के समय में खतरनाक साबित होना बताकर पाबंद किया था।

साफ है कि प्रशासन से लेकर सरकार तक उद्योगपतियों और पूँजीपतियों की जेब में बैठी हुई है और हर प्रकार से मज़दूरों को दबाकर मालिकों का बंधुआ बनाने में सहयोग कर रही हैं।

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