प्रवासी मज़दूर : घर पहुंचने से पहले रास्ते में ही खत्म हुआ ज़िन्दगी का सफर

आगरा में घर वापस लौटते बिहार के श्रमिक की मौत

कोरोना संक्रमण के कारण काम-धंधा बंद होने के बाद अपने घर जा रहे बिहार के प्रवासी मजदूर नरेश पंडित (50) की बस में हालत बिगड़ गई। शनिवार को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के फतेहाबाद टोल पर उसे बस से उतारकर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को उसके घर भेज दिया है।

पुलिस के मुताबिक ग्राम पकोलिया पतलापुर, सारण, बिहार निवासी नरेश पंडित पुत्र स्व. शिव पंडित पंजाब के खन्ना जिले में भवन निर्माण का काम करता था। लॉकडाउन के चलते वह अपनी पत्नी उर्मिला के साथ गांव जा रहा था। शुक्रवार शाम करीब 4:00 बजे वह प्राइवेट बस में बैठकर सारण के लिए निकला। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर उसकी तबीयत बिगड़ गई। 

टीबी का मरीज था श्रमिक

बस में सवार साथी सवारियों ने 108 पर सूचना दी। फतेहाबाद टोल प्लाजा पर उसे 108 हेल्पलाइन के साथ फतेहाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। पर, उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पत्नी उर्मिला ने बताया कि नरेश टीबी का मरीज था। रास्ते में उसकी तबीयत बिगड़ गई। 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. अनुज गांधी ने प्रवासी मजदूर की मौत की सूचना थाना फतेहाबाद पुलिस को दी। इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे तथा मृतक की पत्नी से जानकारी की। बाद में शव को एंबुलेंस से बिना पोस्टमार्टम कराए उसके गांव भेज दिया गया।

23 दिन में 55 हजार प्रवासी घर लौटे

आगरा में अब तक महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और हैदराबाद से 25 स्पेशल ट्रेनों से करीब 50 हजार प्रवासी घर लौटे हैं। इनमें आगरा के अलावा आसपास क्षेत्र के रहने वाले लोग भी शामिल हैं। प्रवासियों के लिए एक फेरे और दो फेरे वाली ट्रेनों का संचालन अब भी किया जा रहा है। वहीं दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा से पहले 350 रोडवेज बसों को आगरा से भेजा गया था। इनसे भी पांच हजार से ज्यादा प्रवासी अपने घर लौट चुके हैं।

अमर उजाला से साभार

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